Wednesday, October 14, 2026
अर्थव्यवस्था

आईएमएफ ने मोहम्मद अलजदान की आईएमएफसी अध्यक्षता जनवरी 2028 तक बढ़ाई

आईएमएफ ने मोहम्मद अलजदान की आईएमएफसी अध्यक्षता जनवरी 2028 तक बढ़ाई

बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वित्त मंत्री मोहम्मद अलजदान की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और वित्तीय समिति (आईएमएफसी) की अध्यक्षता का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ाकर जनवरी 2028 तक कर दिया है। यह विस्तार उनके मूल तीन वर्ष के कार्यकाल पूरा होने के बाद हुआ।

जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 13 अक्टूबर 2026 को बताया, यह विस्तार समिति के सदस्यों के अनुरोध को मंत्री द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद हुआ। समिति के सदस्यों ने उनसे अध्यक्षता जारी रखने का अनुरोध किया था, और मंत्री ने उस अनुरोध को स्वीकार कर लिया। इसके बाद आईएमएफ ने एक वर्ष के विस्तार की घोषणा की, जिससे उनका कार्यकाल जनवरी 2028 तक चलेगा।

आईएमएफसी आईएमएफ की प्रमुख मंत्रिस्तरीय सलाहकार संस्था है। यह कोष की प्राथमिकताओं पर रणनीतिक मार्गदर्शन देने और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा तथा वित्तीय प्रणाली को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए जिम्मेदार है। समिति आईएमएफ के 191 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व 25 सदस्यों के माध्यम से करती है, जिनमें वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर शामिल होते हैं।

यह विस्तार समिति के सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से और आईएमएफ प्रबंधन के समर्थन से तय हुआ। इसका कारण आर्थिक चुनौतियों और बढ़ी हुई अनिश्चितता के बीच आर्थिक तथा वित्तीय मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने में सऊदी अरब की सफल अध्यक्षता को मान्यता देना है। साथ ही यह कदम संवाद को बढ़ावा देने और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के प्रति साम्राज्य की पहलों और अटूट प्रतिबद्धता की सराहना में भी उठाया गया है।

सऊदी अरब की अध्यक्षता को इस बात के लिए स्वीकार किया गया कि उसने आर्थिक चुनौतियों और बढ़ी हुई अनिश्चितता के दौर में अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने में भूमिका निभाई। समिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह विस्तार स्वीकार किया, जिसे आईएमएफ प्रबंधन का भी समर्थन मिला। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि अध्यक्षता का विस्तार किसी एक पक्ष के निर्णय से नहीं, बल्कि सदस्यों की सामूहिक सहमति और प्रबंधन के समर्थन से हुआ।

आईएमएफसी का स्वरूप ही ऐसा है कि उसमें वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर एक साथ बैठते हैं। 25 सदस्यों के माध्यम से 191 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व होता है। ऐसे में अध्यक्ष की भूमिका केवल बैठकों के संचालन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सदस्यों के बीच सहमति बनाने और कोष की प्राथमिकताओं पर मार्गदर्शन देने तक फैलती है। क्या यही कारण है कि समिति के सदस्यों ने मौजूदा अध्यक्ष के कार्यकाल को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया?

मूल कार्यकाल तीन वर्ष का था, जो पूरा हो चुका है। उसके बाद एक वर्ष का विस्तार दिया गया है, जिससे अध्यक्षता जनवरी 2028 तक चलेगी। यह समय-सीमा स्पष्ट है और एसपीए की रिपोर्ट में इसका उल्लेख है। विस्तार की अवधि एक वर्ष है, और वह जनवरी 2028 में समाप्त होगी। इससे समिति को अगले वर्षों की आर्थिक और वित्तीय चर्चाओं में निरंतरता मिलेगी।

समिति की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और वित्तीय प्रणाली को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है। यह सलाहकार निकाय होने के नाते कोष की प्राथमिकताओं पर रणनीतिक मार्गदर्शन देता है। ऐसे में अध्यक्ष की भूमिका इन विमर्शों को दिशा देने में होती है। क्या आर्थिक चुनौतियों और अनिश्चितता के बीच सहमति बनाना अध्यक्ष की सबसे कठिन जिम्मेदारी नहीं है?

एसपीए के अनुसार, विस्तार के पीछे सऊदी अरब की सफल अध्यक्षता को मान्यता देना प्रमुख कारण रहा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साम्राज्य की पहलों और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने तथा संवाद बढ़ाने की प्रतिबद्धता की सराहना की गई। यह सराहना समिति के सदस्यों और आईएमएफ प्रबंधन के समर्थन के साथ दर्ज की गई।

सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय यह दिखाता है कि सदस्य देशों के बीच इस विस्तार पर एकमत था। आईएमएफ प्रबंधन का समर्थन भी इसके साथ रहा। ऐसी स्थिति में अध्यक्ष को आगे भी वही भूमिका निभानी होगी, जो उन्होंने पिछले तीन वर्षों में निभाई। क्या निरंतरता ही इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य है?

आईएमएफसी में 25 सदस्य होते हैं, जो 191 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर शामिल होते हैं। इतने बड़े प्रतिनिधित्व वाले मंच पर सहमति बनाना आसान नहीं होता। आर्थिक चुनौतियों और बढ़ी हुई अनिश्चितता के बीच यह काम और कठिन हो जाता है। क्या इसी कठिनाई के कारण अनुभवी अध्यक्षता को जारी रखना आवश्यक समझा गया?

रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि विस्तार मंत्री द्वारा समिति के सदस्यों के अनुरोध को स्वीकार करने के बाद हुआ। यानी पहल सदस्यों की ओर से हुई और स्वीकृति मंत्री की ओर से आई। इसके बाद आईएमएफ ने आधिकारिक घोषणा की। यह क्रम दर्शाता है कि निर्णय प्रक्रिया में सदस्यों की सहमति और पदाधिकारी की स्वीकृति दोनों शामिल रहे।

अध्यक्षता का विस्तार जनवरी 2028 तक है। इसका अर्थ है कि आने वाले समय में समिति की बैठकों और विमर्शों की अध्यक्षता वही करेंगे। कोष की प्राथमिकताओं पर रणनीतिक मार्गदर्शन देने की जिम्मेदारी भी उनके पास रहेगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और वित्तीय प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श भी उनकी अध्यक्षता में होगा। क्या इससे बहुपक्षीय संवाद को गति मिलेगी?

एसपीए की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विस्तार को सऊदी अरब की अध्यक्षता की सफलता की मान्यता के रूप में देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, साम्राज्य ने आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने में भूमिका निभाई। साथ ही संवाद को बढ़ावा देने और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की सराहना की गई।

समिति का काम केवल सलाह देने तक सीमित नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और वित्तीय प्रणाली को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श भी करती है। ऐसे में अध्यक्ष की भूमिका विमर्शों को दिशा देने और सदस्यों के बीच सहमति बनाने में होती है। आर्थिक चुनौतियों और अनिश्चितता के दौर में यह भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। क्या सदस्यों ने इसी कारण उनसे अध्यक्षता जारी रखने का अनुरोध किया?

रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि विस्तार की चर्चा कब शुरू हुई या अनुरोध कब किया गया। यह भी नहीं बताया गया कि सदस्यों ने किन आधारों पर अनुरोध किया। रिपोर्ट में केवल यह कहा गया है कि विस्तार सर्वसम्मति से और आईएमएफ प्रबंधन के समर्थन से हुआ। इन ब्यौरों का उल्लेख एसपीए की रिपोर्ट में नहीं है।

आईएमएफसी के 25 सदस्य 191 देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर शामिल हैं। यह संरचना समिति को व्यापक प्रतिनिधित्व देती है। ऐसे मंच पर अध्यक्ष को विभिन्न देशों के दृष्टिकोणों के बीच सामंजस्य बनाना होता है। क्या यही वजह है कि सहमति बनाने की क्षमता को विस्तार का आधार बताया गया?

विस्तार की अवधि एक वर्ष है और वह जनवरी 2028 तक चलेगी। मूल कार्यकाल तीन वर्ष का था, जो पूरा हो चुका है। इसके बाद यह विस्तार दिया गया। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि विस्तार मंत्री द्वारा अनुरोध स्वीकार किए जाने के बाद हुआ। यह क्रम निर्णय की प्रक्रिया को दर्शाता है।

सऊदी अरब की अध्यक्षता को आर्थिक चुनौतियों और बढ़ी हुई अनिश्चितता के संदर्भ में रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने में साम्राज्य की भूमिका रही। साथ ही संवाद और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की उसकी पहलों की सराहना की गई। यह सराहना समिति के सदस्यों और आईएमएफ प्रबंधन के समर्थन के साथ दर्ज हुई।

अध्यक्षता जनवरी 2028 तक बढ़ने का अर्थ है कि समिति की आगामी बैठकों और विमर्शों की अध्यक्षता में निरंतरता रहेगी। कोष की प्राथमिकताओं पर रणनीतिक मार्गदर्शन देने की जिम्मेदारी भी उसी तरह निभाई जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और वित्तीय प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श भी जारी रहेगा। क्या यह निरंतरता आने वाली आर्थिक चर्चाओं को दिशा देगी?

एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि विस्तार के बाद समिति की अगली बैठक कब होगी। यह भी नहीं बताया गया कि अध्यक्ष के सामने आने वाले समय में कौन-कौन से विशेष मुद्दे रखे जाएंगे। रिपोर्ट में केवल विस्तार, उसकी अवधि, समिति की संरचना और सऊदी अरब की अध्यक्षता की मान्यता का उल्लेख है। इन ब्यौरों के अलावा अन्य जानकारी रिपोर्ट में नहीं दी गई है।

आईएमएफ ने मोहम्मद अलजदान की अध्यक्षता का कार्यकाल कितना बढ़ाया और कब तक? आईएमएफ ने वित्त मंत्री मोहम्मद अलजदान की आईएमएफसी अध्यक्षता का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ाकर जनवरी 2028 तक कर दिया। यह विस्तार उनके मूल तीन वर्ष के कार्यकाल पूरा होने के बाद हुआ। एसपीए के अनुसार, विस्तार समिति के सदस्यों के अनुरोध को मंत्री द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद हुआ। रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि अवधि एक वर्ष है और वह जनवरी 2028 तक चलेगी।

आईएमएफसी क्या है और उसकी संरचना कैसी है? आईएमएफसी आईएमएफ की प्रमुख मंत्रिस्तरीय सलाहकार संस्था है। यह कोष की प्राथमिकताओं पर रणनीतिक मार्गदर्शन देने और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा तथा वित्तीय प्रणाली को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए जिम्मेदार है। समिति आईएमएफ के 191 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व 25 सदस्यों के माध्यम से करती है, जिनमें वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर शामिल होते हैं।

विस्तार किस आधार पर और किस प्रकार स्वीकार किया गया? एसपीए के अनुसार, विस्तार समिति के सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से और आईएमएफ प्रबंधन के समर्थन से तय हुआ। यह आर्थिक चुनौतियों और बढ़ी हुई अनिश्चितता के बीच आर्थिक तथा वित्तीय मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने में सऊदी अरब की सफल अध्यक्षता की मान्यता में किया गया। साथ ही यह संवाद को बढ़ावा देने और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के प्रति साम्राज्य की पहलों और प्रतिबद्धता की सराहना में भी उठाया गया।

विस्तार की प्रक्रिया में किसने पहल की और किसने स्वीकृति दी? एसपीए के अनुसार, विस्तार समिति के सदस्यों के अनुरोध को मंत्री द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद हुआ। यानी पहल सदस्यों की ओर से हुई और स्वीकृति मंत्री की ओर से आई। इसके बाद आईएमएफ ने एक वर्ष के विस्तार की घोषणा की, जिससे कार्यकाल जनवरी 2028 तक चलेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विस्तार सर्वसम्मति से और आईएमएफ प्रबंधन के समर्थन से तय हुआ।

सऊदी अरब की अध्यक्षता की किन बातों की सराहना की गई? एसपीए के अनुसार, सराहना आर्थिक चुनौतियों और बढ़ी हुई अनिश्चितता के बीच आर्थिक तथा वित्तीय मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने में सऊदी अरब की सफल अध्यक्षता के लिए की गई। साथ ही संवाद को बढ़ावा देने और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के प्रति साम्राज्य की पहलों और अटूट प्रतिबद्धता की सराहना भी दर्ज की गई। यह मान्यता समिति के सदस्यों और आईएमएफ प्रबंधन के समर्थन के साथ व्यक्त की गई।

एसपीए की रिपोर्ट में कौन-सी जानकारी नहीं दी गई है? रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि विस्तार की चर्चा कब शुरू हुई या अनुरोध कब किया गया। यह भी नहीं बताया गया कि सदस्यों ने किन आधारों पर अनुरोध किया। रिपोर्ट में यह भी नहीं है कि विस्तार के बाद समिति की अगली बैठक कब होगी या अध्यक्ष के सामने कौन-कौन से विशेष मुद्दे रखे जाएंगे। रिपोर्ट में केवल विस्तार, उसकी अवधि, समिति की संरचना और सऊदी अरब की अध्यक्षता की मान्यता का उल्लेख है।