Saturday, October 24, 2026
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मदीना में प्रोफेट्स मस्जिद के इमाम ने शुक्रवार के खुत्बे में इखलास और एकता पर जोर दिया

मदीना में प्रोफेट्स मस्जिद के इमाम ने शुक्रवार के खुत्बे में इखलास और एकता पर जोर दिया

मदीना की प्रोफेट्स मस्जिद में 23 अक्टूबर 2026 को शुक्रवार के खुत्बे में इमाम शेख अली अल-हुधैफी ने कलिमा शहादत के गहरे अर्थ को रेखांकित किया और कहा कि सच्चे ईमान का अर्थ है कि सारी इबादत खालिस तौर पर अल्लाह के लिए हो और पैगंबर मुहम्मद की तालीमात की पैरवी की जाए।

जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, इमाम ने मुसलमानों से अपील की कि वे अपने अकीदे को कुरान और सुन्नत की हिदायत पर आधारित करें। उन्होंने कहा कि अल्लाह की सिफात को बिना तहरीफ और बिना इनकार के मानना चाहिए और साझा अकीदे को अमल की एकता में बदलना चाहिए।

खुत्बे के अंत में उन्होंने फूट और तफरका के खिलाफ आगाह किया और जोर दिया कि समाज मुश्किलों पर एकजुटता, आपसी हमदर्दी और इस्लामी अकदार पर मजबूती से डटे रहने के जरिए काबू पाते हैं।

क्या कलिमा शहादत का असली मतलब सिर्फ जुबान से कह देना है, या यह जिंदगी के हर फैसले में उतरना चाहिए? इमाम अल-हुधैफी ने इसी सवाल को खुत्बे का केंद्र बनाया और साफ किया कि ईमान की बुनियाद इबादत की खालिस नीयत और पैगंबर की सीरत की पैरवी है।

मदीना की प्रोफेट्स मस्जिद में दिया गया यह खुत्बा सऊदी अरब के उस दैनिक धार्मिक जीवन का हिस्सा है जिसे एसपीए नियमित रूप से रिपोर्ट करता है। इमाम ने अपनी बात कुरान और सुन्नत की हिदायत पर टिकाई और कहा कि अकीदे को इन दो स्रोतों पर आधारित रखना चाहिए।

उन्होंने अल्लाह की सिफात के मामले में तहरीफ या इनकार से बचने की ताकीद की। यानी न उनमें कोई बदलाव किया जाए और न उन्हें झुठलाया जाए। क्या उम्मत के लिए यह तौर-तरीका आज के दौर में और भी जरूरी नहीं हो गया है, जब अकीदे के मामले में तरह-तरह की बातें सामने आती हैं?

इमाम ने सिर्फ नजरिए की बात नहीं की, बल्कि कहा कि साझा अकीदे को अमल की एकता में बदलना चाहिए। यह इशारा इस ओर है कि एक जैसा ईमान रखने वाले लोगों को अमल में भी एक साथ दिखना चाहिए। क्या अकीदा और अमल के बीच यह पुल बनाए बिना समाज में असली एकता आ सकती है?

खुत्बे का आखिरी हिस्सा तंबीह के लिए था। इमाम ने फूट और तफरका से आगाह किया। उन्होंने कहा कि समुदाय मुश्किलों का सामना एकजुटता, आपसी हमदर्दी और इस्लामी अकदार पर मजबूती से डटे रहने से करते हैं। क्या मुश्किल वक्त में बिखराव कभी किसी उम्मत का भला कर सकता है?

मदीना में दिया गया यह खुत्बा ऐसे वक्त में सामने आया है जब दुनिया भर के मुसलमान अपने-अपने मुल्कों में अलग-अलग हालात से गुजर रहे हैं। ऐसे में इमाम की बात एकजुटता और हमदर्दी पर केंद्रित रही। उन्होंने यह नहीं कहा कि मुश्किलें नहीं आएंगी, बल्कि यह बताया कि उनसे निपटने का रास्ता सब्र, सहयोग और अकदार पर जमे रहना है।

एसपीए के मुताबिक, खुत्बे में कलिमा शहादत के मायने पर सबसे पहले जोर दिया गया। इमाम ने कहा कि सच्चा ईमान तब बनता है जब सारी इबादत खालिस अल्लाह के लिए हो और पैगंबर मुहम्मद की तालीमात की पैरवी हो। यह दो बातें साथ चलती हैं, अकेले एक से काम नहीं चलता। क्या इबादत में खुलूस और सीरत की पैरवी, दोनों को एक साथ अपनाना आसान है?

इसके बाद इमाम ने अकीदे की बुनियाद पर बात की। उन्होंने मुसलमानों को कुरान और सुन्नत की हिदायत पर अपना अकीदा टिकाने की दावत दी। साथ ही अल्लाह की सिफात को बिना तहरीफ और बिना इनकार के मानने की बात कही। यही वह नजरिया है जिसे उन्होंने साझा अकीदे को अमल की एकता में बदलने से जोड़ा।

खुत्बे का समापन फूट के खिलाफ आगाह करने के साथ हुआ। इमाम ने कहा कि समुदाय मुश्किलों पर एकजुटता, आपसी हमदर्दी और इस्लामी अकदार पर डटे रहने से काबू पाते हैं। यह तीन बातें उनके खुत्बे की आखिरी ताकीद थीं। क्या एकजुटता, हमदर्दी और अकदार पर जमे रहना, ये तीनों मिलकर ही असर दिखाते हैं?

प्रोफेट्स मस्जिद में शुक्रवार का खुत्बा मदीना की धार्मिक जिंदगी का अहम हिस्सा माना जाता है। एसपीए ने इस खुत्बे को 23 अक्टूबर 2026 की तारीख के साथ रिपोर्ट किया। खबर में यह भी दर्ज है कि यह स्थानीय समयानुसार 15:00 बजे और जीएमटी के हिसाब से 12:00 बजे जारी हुआ।

इमाम शेख अली अल-हुधैफी ने अपने खुत्बे में जो बातें रखीं, वे तीन हिस्सों में बंटी हुई थीं। पहला हिस्सा कलिमा शहादत के मायने और इबादत की खालिस नीयत से जुड़ा था। दूसरा हिस्सा अकीदे की बुनियाद, कुरान और सुन्नत की हिदायत तथा अल्लाह की सिफात को बिना तहरीफ और बिना इनकार के मानने पर था। तीसरा हिस्सा फूट से आगाह करने और एकजुटता, हमदर्दी तथा अकदार पर डटे रहने की ताकीद पर था।

क्या खुत्बे का यह तीन-हिस्सों वाला ढांचा अपने आप में एक संदेश है कि अकीदा, अमल और एकता, तीनों को साथ लेकर चलना है? इमाम ने पहले ईमान की नीयत साफ की, फिर अकीदे की बुनियाद मजबूत करने की बात की और आखिर में समाज को फूट से बचाने की ताकीद की। यह क्रम अपने आप में एक तरतीब बताता है।

एसपीए की रिपोर्ट के मुताबिक, इमाम ने मुसलमानों से अपील की कि वे अपने अकीदे को कुरान और सुन्नत की हिदायत पर आधारित करें। उन्होंने अल्लाह की सिफात को बिना तहरीफ और बिना इनकार के मानने की बात कही। यही नजरिया साझा अकीदे को अमल की एकता में बदलने की बुनियाद बनता है।

खुत्बे में फूट और तफरका के खिलाफ आगाह करते हुए इमाम ने कहा कि समुदाय मुश्किलों का सामना एकजुटता, आपसी हमदर्दी और इस्लामी अकदार पर मजबूती से डटे रहने से करते हैं। यह बात खास तौर पर उस वक्त अहम हो जाती है जब समाज के सामने कोई मुश्किल खड़ी हो। क्या मुश्किल के वक्त में एकजुटता दिखाना उतना ही जरूरी है जितना आसान वक्त में शुक्र अदा करना?

मदीना की प्रोफेट्स मस्जिद में दिए गए इस खुत्बे की खबर एसपीए ने जारी की। रिपोर्ट में इमाम के नाम, जगह, तारीख और समय का जिक्र है। खबर में खुत्बे के मुख्य नुकतों को रखा गया है, जिनमें कलिमा शहादत का मतलब, इबादत की खालिस नीयत, पैगंबर की तालीमात की पैरवी, कुरान और सुन्नत की हिदायत पर अकीदे की बुनियाद, अल्लाह की सिफात को बिना तहरीफ और बिना इनकार के मानना, साझा अकीदे को अमल की एकता में बदलना, और फूट तथा तफरका से आगाह शामिल हैं।

इस खबर में इमाम के खुत्बे के अलावा किसी और बयान, आंकड़े या घटना का जिक्र नहीं है। एसपीए ने खुत्बे में शामिल लोगों की तादाद, मस्जिद में मौजूद नमाजियों की संख्या या किसी अन्य कार्यक्रम का उल्लेख नहीं किया। रिपोर्ट में सिर्फ इमाम के खुत्बे की बातें दर्ज हैं, जो कलिमा शहादत, अकीदे की बुनियाद और एकजुटता के इर्द-गिर्द हैं।

खुत्बे में इमाम ने यह भी कहा कि सच्चे ईमान के लिए जरूरी है कि सारी इबादत खालिस अल्लाह के लिए हो और पैगंबर मुहम्मद की तालीमात की पैरवी की जाए। यह बात कलिमा शहादत के गहरे अर्थ से जुड़ी हुई है। क्या इबादत की खालिस नीयत और पैगंबर की तालीमात की पैरवी, दोनों को रोजमर्रा की जिंदगी में उतारना मुमकिन है?

इसके बाद इमाम ने अकीदे की बुनियाद पर जोर दिया। उन्होंने मुसलमानों को कुरान और सुन्नत की हिदायत पर अपना अकीदा टिकाने की दावत दी। साथ ही अल्लाह की सिफात को बिना तहरीफ और बिना इनकार के मानने की बात कही। यही बात उन्होंने साझा अकीदे को अमल की एकता में बदलने से जोड़ी।

खुत्बे के आखिर में इमाम ने फूट और तफरका से आगाह किया। उन्होंने कहा कि समुदाय मुश्किलों पर एकजुटता, आपसी हमदर्दी और इस्लामी अकदार पर मजबूती से डटे रहने के जरिए काबू पाते हैं। यह ताकीद खुत्बे का समापन थी। क्या फूट से बचने और एकजुट रहने की यह ताकीद हर दौर में उतनी ही जरूरी रहती है?

एसपीए ने इस खबर को मदीना से 23 अक्टूबर 2026 की तारीख के साथ जारी किया। रिपोर्ट के मुताबिक, खुत्बा स्थानीय समयानुसार 15:00 बजे और जीएमटी के हिसाब से 12:00 बजे दर्ज हुआ। खबर में इमाम शेख अली अल-हुधैफी का नाम, प्रोफेट्स मस्जिद का जिक्र और खुत्बे के मुख्य नुकते शामिल हैं।

इस रिपोर्ट में खुत्बे के दौरान मस्जिद में मौजूद लोगों की संख्या, खुत्बे की अवधि, या इमाम के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के बयान का जिक्र नहीं है। एसपीए ने सिर्फ इमाम के खुत्बे की बातें बताई हैं, जो कलिमा शहादत के मायने, इबादत की खालिस नीयत, पैगंबर की तालीमात की पैरवी, कुरान और सुन्नत की हिदायत पर अकीदे की बुनियाद, अल्लाह की सिफात को बिना तहरीफ और बिना इनकार के मानना, साझा अकीदे को अमल की एकता में बदलना, और फूट तथा तफरका से आगाह करने तक सीमित हैं।

खुत्बे में कलिमा शहादत के बारे में क्या कहा गया? इमाम शेख अली अल-हुधैफी ने कलिमा शहादत के गहरे अर्थ को रेखांकित किया और कहा कि सच्चे ईमान के लिए जरूरी है कि सारी इबादत खालिस अल्लाह के लिए हो और पैगंबर मुहम्मद की तालीमात की पैरवी की जाए। एसपीए के मुताबिक, यह बात खुत्बे के केंद्र में रही और इसे ईमान की बुनियाद के तौर पर पेश किया गया।

इमाम ने अकीदे की बुनियाद पर क्या कहा? इमाम ने मुसलमानों से अपील की कि वे अपने अकीदे को कुरान और सुन्नत की हिदायत पर आधारित करें। उन्होंने अल्लाह की सिफात को बिना तहरीफ और बिना इनकार के मानने की बात कही। एसपीए के मुताबिक, इमाम ने साझा अकीदे को अमल की एकता में बदलने पर भी जोर दिया।

खुत्बे के आखिर में किस बात से आगाह किया गया? इमाम ने खुत्बे के अंत में फूट और तफरका के खिलाफ आगाह किया। उन्होंने कहा कि समुदाय मुश्किलों पर एकजुटता, आपसी हमदर्दी और इस्लामी अकदार पर मजबूती से डटे रहने के जरिए काबू पाते हैं। एसपीए की रिपोर्ट के मुताबिक, यही खुत्बे का समापन संदेश था।

यह खुत्बा कहां और कब दिया गया? यह खुत्बा मदीना की प्रोफेट्स मस्जिद में 23 अक्टूबर 2026 को शुक्रवार के दिन दिया गया। एसपीए के मुताबिक, यह स्थानीय समयानुसार 15:00 बजे और जीएमटी के हिसाब से 12:00 बजे जारी हुआ। इमाम शेख अली अल-हुधैफी ने यह खुत्बा दिया।

खुत्बे में एकता को लेकर क्या संदेश दिया गया? इमाम ने साझा अकीदे को अमल की एकता में बदलने की बात कही। साथ ही उन्होंने फूट और तफरका से आगाह करते हुए कहा कि समुदाय मुश्किलों पर एकजुटता, आपसी हमदर्दी और इस्लामी अकदार पर डटे रहने से काबू पाते हैं। एसपीए के मुताबिक, यह खुत्बे की आखिरी ताकीद थी।

एसपीए की रिपोर्ट में क्या नहीं बताया गया? रिपोर्ट में खुत्बे के दौरान मस्जिद में मौजूद लोगों की संख्या, खुत्बे की अवधि या इमाम के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के बयान का जिक्र नहीं है। एसपीए ने सिर्फ इमाम शेख अली अल-हुधैफी के खुत्बे की बातें बताई हैं। खबर में कलिमा शहादत, अकीदे की बुनियाद और एकजुटता से जुड़े नुकते ही दर्ज हैं।