अरब दुनिया के आसमान में कल सूर्योदय से पहले पूर्वी क्षितिज के ऊपर घटता हुआ वर्धमान चंद्रमा, रेगुलस, बृहस्पति और मंगल एक के बाद एक दिखाई देंगे। यह खगोलीय संरेखण साफ आसमान के नीचे नग्न आंखों से देखा जा सकेगा।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 7 अक्टूबर 2026 को बताया, जेद्दा एस्ट्रोनॉमी सोसाइटी के अध्यक्ष इंजी. माजिद अबू ज़हरा ने इस घटना की जानकारी दी। क्या यह अद्भुत दृश्य प्रकृति की जटिलता को नहीं दर्शाता है?
इंजी. माजिद अबू ज़हरा के अनुसार, चंद्रमा क्षितिज के पास नीचे दिखाई देगा, जिसके बाद रेगुलस और फिर बृहस्पति नजर आएंगे, जबकि मंगल इस व्यवस्था में सबसे ऊपर दिखाई देगा। क्या हम वास्तव में ब्रह्मांड की विशालता को महसूस कर सकते हैं? चंद्रमा का प्रकाशित हिस्सा लगभग 6% होगा क्योंकि यह 10 अक्टूबर को नए चंद्रमा के चरण की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यह संरेखण केवल पृथ्वी से देखने वाले के परिप्रेक्ष्य का परिणाम है, जबकि इन खगोलीय पिंडों के बीच की वास्तविक दूरियां अत्यंत विशाल हैं। क्या यह सोचना रोमांचक नहीं है कि हमारी दृष्टि हमें ऐसा भ्रम देती है? यह व्यवस्था उनके क्रांतिवृत्त (ecliptic) से निकटता से जुड़ी है, जिसके पास सूर्य, चंद्रमा और अधिकांश ग्रह चलते हुए प्रतीत होते हैं। क्या यह खगोलीय यांत्रिकी हमें आश्चर्यचकित नहीं करती है? क्या हम इस दुर्लभ संरेखण को देखने के लिए तैयार हैं? क्या यह दृश्य हमें अंतरिक्ष के रहस्यों के और करीब नहीं ले जाएगा?
विज्ञप्ति में इस घटना के सटीक समय, दृश्यता की अवधि या किसी विशिष्ट टेलीस्कोप के उपयोग की आवश्यकता के बारे में जानकारी नहीं दी गई है।
आसमान में कौन-से खगोलीय पिंड दिखाई देंगे? पूर्वी क्षितिज पर घटता हुआ वर्धमान चंद्रमा, रेगुलस, बृहस्पति और मंगल एक क्रम में दिखाई देंगे। एसपीए के अनुसार, यह संरेखण साफ आसमान में नग्न आंखों से देखा जा सकेगा।
इन पिंडों की स्थिति क्या होगी? इंजी. माजिद अबू ज़हरा ने बताया कि चंद्रमा क्षितिज के पास सबसे नीचे होगा, उसके बाद रेगुलस और बृहस्पति आएंगे। मंगल इस पूरी व्यवस्था में सबसे ऊपर दिखाई देगा।
चंद्रमा की वर्तमान स्थिति क्या है? चंद्रमा का प्रकाशित हिस्सा लगभग 6% है। यह 10 अक्टूबर को आने वाले नए चंद्रमा (new moon) के चरण की ओर बढ़ रहा है।
यह संरेखण क्यों होता है? यह संरेखण पृथ्वी से देखने वाले के परिप्रेक्ष्य के कारण होता है, जबकि पिंडों के बीच की दूरी बहुत अधिक है। यह उनकी क्रांतिवृत्त (ecliptic) से निकटता के कारण संभव होता है।