Wednesday, September 9, 2026
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सऊदी इस्लामिक मामलों मंत्रालय और फिलीपींस मुस्लिम मामलों आयोग के बीच समझौता

सऊदी इस्लामिक मामलों मंत्रालय और फिलीपींस मुस्लिम मामलों आयोग के बीच समझौता

मक्का मुकर्रमा में सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों, दावत और मार्गदर्शन मंत्रालय और फिलीपींस गणराज्य के मुस्लिम मामलों के राष्ट्रीय आयोग ने इस्लामिक मामलों के क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 12 अगस्त 2026 को बताया, मंत्रालय की ओर से उप मंत्री डॉ. अववाद बिन सबती अल-अनज़ी और फिलीपींस की ओर से राष्ट्रीय मुस्लिम मामलों आयोग के मंत्री सबुडिन अब्दुलरहीम ने इस पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता मंत्री शेख डॉ. अब्दुललतीफ बिन अब्दुलअजीज अल शेख के प्रतिनिधित्व में हुआ।

इस समझौते का उद्देश्य इस्लाम और इसके मूल्यों का परिचय देना, समकालीन मुद्दों पर इस्लाम के दृष्टिकोण को स्पष्ट करना, मुसलमानों के सांस्कृतिक स्तर को ऊपर उठाना और उनके अस्तित्व व पहचान को सुरक्षित रखना है। यह दोनों देशों के कानूनों के अनुसार प्रेम, दया और एकजुटता के मूल्यों को मजबूत करने पर केंद्रित है।

सहयोग के क्षेत्रों में विभिन्न भाषाओं में शोध, पुस्तकों और वैज्ञानिक प्रकाशनों का आदान-प्रदान, फिलीपींस की यात्रा के लिए हरमैन शरीफैन के इमामों का समन्वय, और प्रचारकों, उपदेशकों, इमामों और मुअज़ज़िन के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित करना शामिल है। इसके अलावा, दोनों देशों में आयोजित इस्लामिक सम्मेलनों और बैठकों में विशेषज्ञों और विद्वानों की भागीदारी भी शामिल है।

समझौते पर हस्ताक्षर किसने किए? सऊदी अरब की ओर से इस्लामिक मामलों, दावत और मार्गदर्शन मंत्रालय के उप मंत्री डॉ. अववाद बिन सबती अल-अनज़ी ने हस्ताक्षर किए। फिलीपींस की ओर से राष्ट्रीय मुस्लिम मामलों आयोग के मंत्री सबुडिन अब्दुलरहीम ने हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के मुख्य उद्देश्य क्या हैं? इसका उद्देश्य इस्लाम और इसके मूल्यों का परिचय देना और समकालीन मुद्दों पर इसके दृष्टिकोण को स्पष्ट करना है। यह मुसलमानों के सांस्कृतिक स्तर को बढ़ाने और प्रेम व एकजुटता के मूल्यों को मजबूत करने पर केंद्रित है।

सहयोग के किन क्षेत्रों को शामिल किया गया है? इसमें विभिन्न भाषाओं में शोध और वैज्ञानिक प्रकाशनों का आदान-प्रदान शामिल है। साथ ही, हरमैन शरीफैन के इमामों की फिलीपींस यात्रा और प्रचारकों व इमामों के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का समन्वय किया जाएगा।

विद्वानों की भागीदारी कैसे होगी? समझौते के तहत दोनों देशों में आयोजित होने वाले इस्लामिक सम्मेलनों और बैठकों में विशेषज्ञ विद्वानों और प्रचारकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। एसपीए ने किसी विशिष्ट समय-सीमा का उल्लेख नहीं किया है।