मदीना में पैगंबर की मस्जिद में शुक्रवार 9 अक्टूबर 2026 को दिए गए जुमे के खुतबे में इमाम शेख खालिद अल-मुहन्ना ने कहा कि इस्लाम की पूर्णता उसके शुद्ध भाषण और सौम्य संवाद के आह्वान में दिखती है। उन्होंने नमाज़ियों से कहा कि वे पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के उस बेमिसाल बयान, शिष्टता और कठोरता या अश्लीलता से बचने वाले तरीके को अपनाएं।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, इमाम ने जमात से अपनी जुबान की हिफाजत करने और संयम रखने की अपील की। उन्होंने जोर दिया कि मीठी बात एक तरह का दान है, जो आध्यात्मिक दर्जा ऊंचा करती है, जरूरतमंद को सुकून देती है और टूटे दिलों को जोड़ती है।
यह खुतबा मदीना की उस मस्जिद में दिया गया, जहां दुनिया भर से आने वाले जायरीन जुमे की नमाज़ में शामिल होते हैं। एसपीए के मुताबिक खुतबा स्थानीय समय 14:49 बजे और जीएमटी के हिसाब से 11:49 बजे जारी किया गया।
जुबान की हिफाजत क्यों जरूरी है?
इमाम शेख खालिद अल-मुहन्ना ने अपने खुतबे में सबसे पहले इस बात पर जोर दिया कि इस्लाम की पूर्णता उसके शुद्ध भाषण और सौम्य संवाद के आह्वान में नजर आती है। क्या किसी समाज में बातचीत का लहजा ही उसकी असली पहचान नहीं बन जाता? उन्होंने नमाज़ियों से कहा कि वे पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बयान, शिष्टता और कठोरता या अश्लीलता से बचने के तरीके को अपनाएं। एसपीए के अनुसार, इमाम ने जमात से अपनी जुबान की हिफाजत करने और संयम बरतने की अपील की।
यह अपील ऐसे मौके पर आई जब मदीना की मस्जिद में जुमे की नमाज़ के लिए बड़ी तादाद में लोग जमा होते हैं। इमाम ने कहा कि मीठी बात एक तरह का दान है। यह दान आध्यात्मिक दर्जा ऊंचा करता है, जरूरतमंद को सुकून देता है और टूटे दिलों को जोड़ता है। क्या हम रोजमर्रा की भागदौड़ में यह सादा-सा दान देना भूल नहीं जाते?
मीठी बात को दान क्यों कहा गया?
खुतबे का केंद्रीय विचार यही था कि अच्छी बात सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि इबादत का हिस्सा है। एसपीए के मुताबिक इमाम ने कहा कि मीठी बात आध्यात्मिक दर्जा ऊंचा करती है। साथ ही यह जरूरतमंद को सुकून देती है और टूटे दिलों को जोड़ती है। क्या कोई ऐसा इंसान है जिसे सहानुभूति भरी बात की जरूरत नहीं होती?
इमाम ने नमाज़ियों से पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बयान और शिष्टता को अपनाने की बात कही। उन्होंने कठोरता और अश्लीलता से बचने पर जोर दिया। यह संदेश मदीना की मस्जिद से दुनिया भर के मुसलमानों तक पहुंचा, क्योंकि एसपीए ने खुतबे को जारी किया।
सौम्य संवाद और सुलह का रास्ता
स्रोत के मुताबिक इमाम ने सौम्य संवाद पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस्लाम की पूर्णता शुद्ध भाषण और नरम बातचीत के आह्वान में दिखती है। क्या नरमी से बात करना कमजोरी है या सबसे बड़ी ताकत? इमाम ने जमात से संयम रखने की अपील की और जुबान की हिफाजत पर जोर दिया।
खुतबे में यह भी कहा गया कि मीठी बात टूटे दिलों को जोड़ती है। यानी यह सिर्फ व्यक्तिगत आचरण नहीं, बल्कि रिश्तों को सुधारने का जरिया भी है। एसपीए ने बताया कि इमाम ने नमाज़ियों से पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शिष्टता को अपनाने की बात कही। क्या आपसी मतभेद सख्त लहजे से कभी कम हुए हैं?
मदीना से जारी हुआ संदेश
यह खुतबा पैगंबर की मस्जिद, मदीना में दिया गया। एसपीए के मुताबिक इसे स्थानीय समय 14:49 बजे और जीएमटी के हिसाब से 11:49 बजे जारी किया गया। खुतबे की तारीख 9 अक्टूबर 2026 है। इमाम शेख खालिद अल-मुहन्ना ने जमात को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।
मदीना की मस्जिद में जुमे का खुतबा हर हफ्ते बड़ी तादाद में लोग सुनते हैं। ऐसे में वहां से उठा हर संदेश व्यापक असर रखता है। एसपीए ने खुतबे के मुख्य बिंदु जारी किए, जिनमें शुद्ध भाषण, सौम्य संवाद, जुबान की हिफाजत, संयम और मीठी बात को दान बताना शामिल है। क्या यह संदेश सिर्फ मस्जिद तक सीमित रहना चाहिए या घर और बाजार तक पहुंचना चाहिए?
एसपीए ने क्या नहीं बताया
एसपीए की रिपोर्ट में खुतबे की अवधि, नमाज़ियों की संख्या या इमाम के अन्य उदाहरणों का जिक्र नहीं है। विज्ञप्ति में खुतबे के पूरे पाठ का उल्लेख भी नहीं है। स्रोत में सिर्फ यह बताया गया है कि इमाम ने शुद्ध भाषण, सौम्य संवाद, जुबान की हिफाजत, संयम और मीठी बात को दान बताने पर जोर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक इमाम ने पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बयान, शिष्टता और कठोरता या अश्लीलता से बचने के तरीके को अपनाने की अपील की। इसमें यह भी कहा गया कि मीठी बात आध्यात्मिक दर्जा ऊंचा करती है, जरूरतमंद को सुकून देती है और टूटे दिलों को जोड़ती है। क्या इन बिंदुओं से ज्यादा कुछ जानना जरूरी है?
एसपीए ने खुतबे को 9 अक्टूबर 2026 को जारी किया। स्थानीय समय 14:49 और जीएमटी 11:49 दर्ज है। स्रोत में इसके अलावा कोई अतिरिक्त विवरण नहीं दिया गया।
खुतबा कहां और कब दिया गया? खुतबा मदीना में पैगंबर की मस्जिद में शुक्रवार 9 अक्टूबर 2026 को दिया गया। एसपीए के मुताबिक इसे स्थानीय समय 14:49 बजे और जीएमटी के हिसाब से 11:49 बजे जारी किया गया। इमाम शेख खालिद अल-मुहन्ना ने जमात को संबोधित किया।
इमाम ने किस बात पर जोर दिया? इमाम ने कहा कि इस्लाम की पूर्णता शुद्ध भाषण और सौम्य संवाद के आह्वान में दिखती है। उन्होंने नमाज़ियों से पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बयान, शिष्टता और कठोरता या अश्लीलता से बचने के तरीके को अपनाने की अपील की। साथ ही जुबान की हिफाजत और संयम रखने पर जोर दिया।
मीठी बात को दान क्यों कहा गया? एसपीए के मुताबिक इमाम ने कहा कि मीठी बात एक तरह का दान है। यह आध्यात्मिक दर्जा ऊंचा करती है, जरूरतमंद को सुकून देती है और टूटे दिलों को जोड़ती है। इस तरह अच्छी बात सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि इबादत का हिस्सा भी है।
खुतबे का मुख्य संदेश क्या था? खुतबे का मुख्य संदेश शुद्ध भाषण, सौम्य संवाद, जुबान की हिफाजत और संयम था। इमाम ने कहा कि मीठी बात दिल जोड़ती है और जरूरतमंद को सुकून देती है। एसपीए ने बताया कि इमाम ने नमाज़ियों से पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शिष्टता अपनाने की अपील की।