Tuesday, November 3, 2026
सऊदी समाचार

जीसीसी महासचिव ने अल-अक्सा मस्जिद में घुसपैठ की निंदा की

जीसीसी महासचिव ने अल-अक्सा मस्जिद में घुसपैठ की निंदा की

रियाद में जीसीसी महासचिव जासेम मोहम्मद अलबुदैवी ने अल-अक्सा मस्जिद के प्रांगण में इजरायली कब्जे वाली सरकार के भीतर चरमपंथियों के धावे की कड़ी और सख्त शब्दों में निंदा की।

जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 28 सितंबर 2026 को बताया, अलबुदैवी ने इजरायली कब्जा बलों की सुरक्षा में बार-बार हो रही बस्तीवासियों की घुसपैठ और उकसाने वाली रस्मों का भी जिक्र किया। यह बयान रियाद से जारी हुआ और एसपीए ने इसे स्थानीय समयानुसार 22:00 बजे और जीएमटी के अनुसार 19:00 बजे प्रकाशित किया।

महासचिव ने कहा कि ये उल्लंघन अल-अक्सा मस्जिद की पवित्रता पर खुला हमला हैं और यह एक अस्वीकार्य बढ़ाव है जो तनाव भड़काता है और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता को खतरे में डालता है। क्या किसी पवित्र स्थल के प्रांगण में इस तरह बार-बार प्रवेश को सामान्य घटना माना जा सकता है, जब वही स्थल इतिहास और कानून दोनों की दृष्टि से संरक्षित दर्जा रखता हो?

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाए और इन जारी उल्लंघनों को रोकने तथा पवित्र मस्जिद की ऐतिहासिक और कानूनी यथास्थिति की रक्षा के लिए तेज और निर्णायक कार्रवाई करे। अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपीलों के बावजूद घुसपैठ जारी रहती है, तो क्या यथास्थिति की रक्षा के लिए केवल बयान ही पर्याप्त माने जाएंगे?

अलबुदैवी ने जीसीसी सदस्य देशों के उस स्थिर रुख को दोहराया जिसमें फलस्तीनी मुद्दे और फलस्तीनी जनता के वैध अधिकारों का समर्थन शामिल है। उन्होंने कहा कि इनमें सबसे प्रमुख अधिकार 4 जून 1967 की सीमाओं के अनुरूप एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना है, जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम हो। क्या किसी भी क्षेत्रीय संगठन के लिए यह संभव है कि वह इस रुख को बदले बिना सदस्य देशों की साझा स्थिति बनाए रखे?

एसपीए की रिपोर्ट के अनुसार, महासचिव ने कहा कि इजरायली कब्जे वाली सरकार के भीतर मौजूद चरमपंथी अल-अक्सा मस्जिद के प्रांगण में धावा बोल रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बस्तीवासियों की घुसपैठ और उकसाने वाली रस्में बार-बार हो रही हैं और ये इजरायली कब्जा बलों की सुरक्षा में होती हैं। क्या सुरक्षा बलों की मौजूदगी में होने वाली ऐसी कार्रवाइयों को अलग-अलग घटनाएं कहा जा सकता है या ये एक व्यवस्थित प्रवृत्ति दर्शाती हैं?

महासचिव ने इन उल्लंघनों को अल-अक्सा मस्जिद की पवित्रता पर खुला हमला बताया। उनके अनुसार यह अस्वीकार्य बढ़ाव तनाव भड़काता है और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता को खतरे में डालता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तेज और निर्णायक कार्रवाई की मांग की ताकि जारी उल्लंघन रुकें और पवित्र मस्जिद की ऐतिहासिक तथा कानूनी यथास्थिति बनी रहे। जब तनाव भड़कने की बात हो और यथास्थिति का उल्लंघन हो, तो क्या देर से उठाया गया कदम अपना असर खो देता है?

रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि अलबुदैवी ने जीसीसी सदस्य देशों के रुख को दोहराया। यह रुख फलस्तीनी मुद्दे और फलस्तीनी जनता के वैध अधिकारों के समर्थन पर आधारित है। इन अधिकारों में सबसे प्रमुख 4 जून 1967 की सीमाओं पर आधारित स्वतंत्र राज्य की स्थापना है, जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम हो। क्या क्षेत्रीय स्थिरता की चर्चा में फलस्तीनी अधिकारों के इस स्पष्ट संदर्भ को छोड़ा जा सकता है?

एसपीए ने बयान का समय भी दर्ज किया। यह स्थानीय समयानुसार 22:00 बजे और जीएमटी के अनुसार 19:00 बजे जारी हुआ। रिपोर्ट के अंत में 0076 का संदर्भ भी दिया गया है। क्या ऐसे बयानों के समय और संदर्भ से यह समझने में मदद मिलती है कि घटनाक्रम किस गति से आगे बढ़ रहा है?

महासचिव ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह भी कहा कि वह इन जारी उल्लंघनों को रोके और पवित्र मस्जिद की ऐतिहासिक तथा कानूनी यथास्थिति को संरक्षित रखे। उन्होंने इसे एक ऐसा बढ़ाव बताया जो तनाव भड़काता है और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता को खतरे में डालता है। क्या यथास्थिति की रक्षा की मांग तब तक प्रभावी हो सकती है जब तक सभी पक्ष इसे मानने पर सहमत न हों?

रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि महासचिव ने इजरायली कब्जे वाली सरकार के भीतर चरमपंथियों के धावे और बस्तीवासियों की घुसपैठ तथा उकसाने वाली रस्मों का जिक्र किया। ये सभी बातें इजरायली कब्जा बलों की सुरक्षा में होने का उल्लेख है। क्या किसी पवित्र स्थल के आसपास इस तरह की गतिविधियों का असर केवल उसी स्थान तक सीमित रहता है या वह पूरे क्षेत्र में फैलता है?

जीसीसी महासचिव का यह बयान ऐसे समय आया है जब रिपोर्ट में बार-बार होने वाली घुसपैठों और रस्मों का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, महासचिव ने इन्हें अल-अक्सा मस्जिद की पवित्रता पर खुला हमला कहा और इसे अस्वीकार्य बढ़ाव बताया। उन्होंने कहा कि यह तनाव भड़काता है और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता को खतरे में डालता है। क्या बार-बार दोहराई जाने वाली घटनाएं अंतरराष्ट्रीय ध्यान को स्थायी रूप से आकर्षित कर पाती हैं?

बयान में फलस्तीनी मुद्दे के प्रति जीसीसी सदस्य देशों के स्थिर रुख का जिक्र है। इसमें फलस्तीनी जनता के वैध अधिकारों का समर्थन शामिल है। सबसे प्रमुख अधिकार 4 जून 1967 की सीमाओं के अनुरूप स्वतंत्र राज्य की स्थापना है, जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम हो। क्या किसी क्षेत्रीय संगठन के लिए यह संभव है कि वह इस रुख को दोहराए बिना सदस्य देशों की एकजुट स्थिति दर्ज कराए?

एसपीए की रिपोर्ट में महासचिव की ओर से अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की गई अपील का स्पष्ट उल्लेख है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अपनी जिम्मेदारी निभाए और इन जारी उल्लंघनों को रोकने तथा पवित्र मस्जिद की ऐतिहासिक और कानूनी यथास्थिति की रक्षा के लिए तेज और निर्णायक कार्रवाई करे। क्या तेज और निर्णायक कार्रवाई की मांग तब तक अधूरी रहती है जब तक उसका कोई ठोस तंत्र न बने?

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महासचिव ने इन उल्लंघनों को अल-अक्सा मस्जिद की पवित्रता पर खुला हमला कहा। उन्होंने इसे अस्वीकार्य बढ़ाव बताया जो तनाव भड़काता है और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता को खतरे में डालता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यथास्थिति की रक्षा के लिए कदम उठाने की अपील की। क्या पवित्र स्थलों से जुड़े मामलों में कानूनी यथास्थिति की रक्षा केवल बयानों से संभव है?

एसपीए ने इस बयान को रियाद से जारी बताया और इसका समय स्थानीय समयानुसार 22:00 बजे तथा जीएमटी के अनुसार 19:00 बजे दर्ज किया। रिपोर्ट के अंत में 0076 का संदर्भ भी है। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि बयान किस विशेष घटना की प्रतिक्रिया में आया, न ही किसी विशेष तारीख या स्थान का जिक्र है। क्या बिना किसी विशेष घटना के संदर्भ के ऐसे बयान का असर कम हो जाता है?

महासचिव ने जीसीसी सदस्य देशों के रुख को दोहराते हुए फलस्तीनी मुद्दे और फलस्तीनी जनता के वैध अधिकारों के समर्थन की बात कही। इनमें 4 जून 1967 की सीमाओं के अनुरूप स्वतंत्र राज्य की स्थापना प्रमुख है, जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम हो। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उन्होंने इन उल्लंघनों को क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा बताया। क्या क्षेत्रीय स्थिरता की बहस में फलस्तीनी अधिकारों का संदर्भ अनिवार्य हो जाता है?

रिपोर्ट के अनुसार, बयान में इजरायली कब्जे वाली सरकार के भीतर चरमपंथियों के धावे, बस्तीवासियों की बार-बार घुसपैठ और उकसाने वाली रस्मों का उल्लेख है। ये सभी इजरायली कब्जा बलों की सुरक्षा में होने की बात कही गई है। महासचिव ने इन्हें अल-अक्सा मस्जिद की पवित्रता पर खुला हमला और अस्वीकार्य बढ़ाव कहा। क्या सुरक्षा बलों की भूमिका पर सवाल उठाए बिना इस स्थिति का समाधान निकल सकता है?

अंत में, एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि महासचिव ने किस विशेष तारीख या स्थान पर हुई घटना का जिक्र किया, न ही किसी विशेष संख्या या आंकड़े का उल्लेख है। रिपोर्ट में केवल यह दर्ज है कि बयान रियाद से 28 सितंबर 2026 को जारी हुआ और इसमें निंदा, अपील तथा जीसीसी सदस्य देशों के रुख का जिक्र है। क्या ऐसी रिपोर्ट में अनुपस्थित विवरण भी यह समझने में मदद करते हैं कि क्या जानकारी सार्वजनिक की गई और क्या नहीं?

जीसीसी महासचिव ने किस घटना की निंदा की? जीसीसी महासचिव जासेम मोहम्मद अलबुदैवी ने अल-अक्सा मस्जिद के प्रांगण में इजरायली कब्जे वाली सरकार के भीतर चरमपंथियों के धावे की निंदा की। उन्होंने बस्तीवासियों की बार-बार हो रही घुसपैठ और उकसाने वाली रस्मों का भी जिक्र किया, जो इजरायली कब्जा बलों की सुरक्षा में होती हैं। एसपीए की रिपोर्ट में यह जानकारी रियाद से 28 सितंबर 2026 को जारी बताई गई।

महासचिव ने इन उल्लंघनों को क्या कहा? महासचिव ने कहा कि ये उल्लंघन अल-अक्सा मस्जिद की पवित्रता पर खुला हमला हैं। उन्होंने इसे अस्वीकार्य बढ़ाव बताया जो तनाव भड़काता है और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता को खतरे में डालता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह इन जारी उल्लंघनों को रोकने और पवित्र मस्जिद की ऐतिहासिक तथा कानूनी यथास्थिति की रक्षा के लिए तेज और निर्णायक कार्रवाई करे।

जीसीसी सदस्य देशों के रुख में क्या शामिल है? अलबुदैवी ने जीसीसी सदस्य देशों के स्थिर रुख को दोहराया, जिसमें फलस्तीनी मुद्दे और फलस्तीनी जनता के वैध अधिकारों का समर्थन शामिल है। इन अधिकारों में सबसे प्रमुख 4 जून 1967 की सीमाओं के अनुरूप एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना है, जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम हो। रिपोर्ट के अनुसार यह रुख जीसीसी सदस्य देशों की साझा स्थिति दर्शाता है।

बयान कब और कहां से जारी हुआ? एसपीए की रिपोर्ट के अनुसार बयान रियाद से 28 सितंबर 2026 को जारी हुआ। रिपोर्ट में इसका समय स्थानीय समयानुसार 22:00 बजे और जीएमटी के अनुसार 19:00 बजे दर्ज है। रिपोर्ट के अंत में 0076 का संदर्भ भी दिया गया है। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि बयान किस विशेष घटना की प्रतिक्रिया में आया।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या मांग की गई? महासचिव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाए और इन जारी उल्लंघनों को रोकने के लिए तेज तथा निर्णायक कार्रवाई करे। उन्होंने पवित्र मस्जिद की ऐतिहासिक और कानूनी यथास्थिति को संरक्षित रखने की अपील की। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इन उल्लंघनों को क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा बताया।

रिपोर्ट में क्या जानकारी नहीं दी गई? एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि बयान किस विशेष तारीख या स्थान पर हुई घटना की प्रतिक्रिया में आया। रिपोर्ट में किसी विशेष संख्या या आंकड़े का भी उल्लेख नहीं है। इसमें केवल निंदा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील और जीसीसी सदस्य देशों के रुख का जिक्र है। रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।