Monday, September 28, 2026
संस्कृति

मक्का के व्यक्ति ने ‘एटीज़ मजलिस’ के जरिए 1980 के दशक का रमजान इफ्तार पुनर्जीवित किया

मक्का के व्यक्ति ने ‘एटीज़ मजलिस’ के जरिए 1980 के दशक का रमजान इफ्तार पुनर्जीवित किया

मक्का में एक सऊदी व्यक्ति ने अपने घर के एक हिस्से को ‘एटीज़ मजलिस’ (Eighties Majlis) में बदलकर 1980 के दशक के रमजान इफ्तार के माहौल को फिर से बनाया है। इस स्थान पर पुराने फर्नीचर, लकड़ी की छतें, पारंपरिक कालीन, उस दौर का टेलीविजन और रेडियो, खजूर के पत्तों के गलीचे और पुराने बर्तन शामिल हैं।

जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 7 मार्च 2025 को बताया, अवद बिन दुईस ने अपने बचपन की सरल यादों से प्रेरित होकर इस परियोजना को शुरू किया। उन्होंने अपने दोस्तों की मदद से दुर्लभ प्राचीन वस्तुएं एकत्र कीं ताकि उस दौर के आकर्षण को वापस लाया जा सके।

रमजान से पहले शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट में रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों को इफ्तार के लिए आमंत्रित किया गया। यहाँ कांच के कप, धातु के बर्तन, जूस के जग, लालटेन और ऊद से भरे लकड़ी के धूपदान का उपयोग किया गया है।

बिन दुईस ने यह सुनिश्चित किया कि इस स्थान पर कोई आधुनिक तत्व न हो, जिसके लिए उन्होंने पुराने अंदाज में कपड़े का पर्दा और लकड़ी की खिड़की भी डिजाइन की। विज्ञप्ति में इस परियोजना पर हुए खर्च का विवरण नहीं दिया गया है।

एटीज़ मजलिस में किन वस्तुओं का उपयोग किया गया है? इस स्थान पर पुराने फर्नीचर, लकड़ी की छतें, पारंपरिक कालीन, उस दौर का टेलीविजन, रेडियो और खजूर के पत्तों के गलीचे लगाए गए हैं। साथ ही यहाँ कांच के कप, धातु के बर्तन, जूस के जग, लालटेन और ऊद वाला लकड़ी का धूपदान मौजूद है।

अवद बिन दुईस ने इस परियोजना को क्यों शुरू किया? बिन दुईस ने इसे अपने बचपन की सरल और सुंदर यादों के प्रति गहरे जुड़ाव के कारण शुरू किया। उन्होंने अपने दोस्तों की मदद से दुर्लभ प्राचीन वस्तुओं को इकट्ठा किया ताकि 1980 के दशक के माहौल को पुनर्जीवित किया जा सके।

मजलिस की सजावट में किन विशेष बातों का ध्यान रखा गया? बिन दुईस ने सुनिश्चित किया कि स्थान पर कोई भी आधुनिक तत्व न हो। इसके लिए उन्होंने पुराने अंदाज में एक कपड़े का पर्दा और लकड़ी की खिड़की विशेष रूप से डिजाइन की।