किंग फहद स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर जद्दा ने एक 50 वर्षीय महिला के लिए बिना बाहरी सर्जिकल चीरे के लैप्रोस्कोपिक तरीके से गर्भाशय निकालने का सफल ऑपरेशन किया है। महिला गर्भाशय फाइब्रॉमा के कारण अत्यधिक रक्तस्राव से पीड़ित थी।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 10 अगस्त 2026 को बताया, अस्पताल के प्रसूति और स्त्री रोग विभाग द्वारा इस आधुनिक पद्धति का उपयोग किया गया। यह प्रक्रिया पेट में कोई चीरा लगाए बिना की गई, जिससे दर्द, रक्तस्राव, दर्द निवारक दवाओं की आवश्यकता और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि कम हो गई और रिकवरी तेज हो गई।
इस तकनीक के लिए उच्च सर्जिकल कौशल और एक विशेषज्ञ चिकित्सा टीम की आवश्यकता होती है, जो आमतौर पर केवल उन्नत चिकित्सा केंद्रों में उपलब्ध होती है।
विज्ञप्ति में ऑपरेशन में लगे डॉक्टरों के नाम या रिकवरी के सटीक दिनों का उल्लेख नहीं है।
अस्पताल ने कौन-सी प्रक्रिया अपनाई? किंग फहद स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर जद्दा ने बिना बाहरी सर्जिकल चीरे के लैप्रोस्कोपिक तरीके से गर्भाशय निकालने की प्रक्रिया अपनाई। यह ऑपरेशन एक 50 वर्षीय महिला पर किया गया जो गर्भाशय फाइब्रॉमा के कारण अत्यधिक रक्तस्राव से जूझ रही थी।
इस आधुनिक सर्जिकल पद्धति के क्या लाभ हैं? इस पद्धति से पेट में कोई चीरा नहीं लगाया जाता, जिससे मरीज को कम दर्द और कम रक्तस्राव होता है। इसके अलावा, दर्द निवारक दवाओं की जरूरत कम होती है और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि घटने से रिकवरी तेज हो जाती है।
यह ऑपरेशन किस विभाग द्वारा किया गया? यह सफल ऑपरेशन किंग फहद स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के प्रसूति और स्त्री रोग विभाग द्वारा किया गया। एसपीए के अनुसार, इस तकनीक के लिए उच्च सर्जिकल कौशल और विशेषज्ञ टीम की आवश्यकता होती है।