Thursday, September 17, 2026
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जिद्दा के स्पेशलाइज्ड हॉस्पिटल ने बिना चीरे के किया गर्भाशय का सफल ऑपरेशन

जिद्दा के स्पेशलाइज्ड हॉस्पिटल ने बिना चीरे के किया गर्भाशय का सफल ऑपरेशन

जिद्दा के किंग फहद स्पेशलाइज्ड हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर ने लगभग पचास वर्षीय महिला मरीज का बिना किसी बाहरी सर्जिकल चीरे के एंडोस्कोपिक तकनीक के माध्यम से गर्भाशय हटाने का सफल ऑपरेशन किया है।

जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 10 अगस्त 2026 को बताया, मरीज गर्भाशय फाइब्रॉइड के कारण गंभीर रक्तस्राव से पीड़ित थी। इस प्रक्रिया में प्राकृतिक छिद्रों के माध्यम से एंडोस्कोपिक सर्जिकल तकनीक का उपयोग किया गया।

यह पद्धति पारंपरिक लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से अलग है, जिसमें एंडोस्कोपिक उपकरणों को डालने के लिए पेट की दीवार में चीरे लगाने की आवश्यकता होती है। प्राकृतिक पहुंच के माध्यम से किए गए इस ऑपरेशन से रक्त की हानि कम होती है, दर्द निवारक दवाओं की आवश्यकता घटती है और मरीज के ठीक होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

अस्पताल के प्रसूति और स्त्री रोग विभाग द्वारा अपनाई गई यह तकनीक उच्च-सटीक इमेजिंग और विशेष सर्जिकल उपकरणों के संयोजन से सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करती है। विज्ञप्ति में ऑपरेशन में लगे डॉक्टरों के नाम या कुल समय का उल्लेख नहीं है।

यह ऑपरेशन किस तकनीक से किया गया? यह ऑपरेशन प्राकृतिक छिद्रों के माध्यम से एंडोस्कोपिक सर्जिकल तकनीक का उपयोग करके किया गया। इसमें पारंपरिक लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के विपरीत पेट की दीवार पर कोई बाहरी सर्जिकल चीरा नहीं लगाया गया।

मरीज किस समस्या से पीड़ित थी? लगभग पचास वर्षीय महिला मरीज गर्भाशय फाइब्रॉइड (myoma uteri) से पीड़ित थी। इस समस्या के कारण उसे गंभीर रक्तस्राव का सामना करना पड़ रहा था।

इस सर्जिकल पद्धति के क्या लाभ हैं? इस तकनीक से दर्द कम होता है, रिकवरी की प्रक्रिया तेज होती है और अस्पताल में रुकने की अवधि कम हो जाती है। साथ ही, यह रक्त की हानि को कम करता है और दर्द निवारक दवाओं की जरूरत घटाता है।