क्योटो, 06 अक्टूबर 2026 — सऊदी अरब ने जापान के क्योटो में आयोजित साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन सोसाइटी (एसटीएस) फोरम की 23वीं वार्षिक बैठक में भाग लिया, जिसमें दुनिया भर के प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी व्यक्तित्व, नीति निर्माता तथा अनुसंधान, शैक्षणिक और औद्योगिक संस्थानों के प्रमुख शामिल हुए।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, इस फोरम में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के तेज बदलावों तथा समाजों और विकास के भविष्य पर उनके प्रभावों पर चर्चा हुई। बैठक में विज्ञान में भरोसा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ओपन साइंस और वैज्ञानिक अनुसंधान के भविष्य के साथ-साथ उन्नत प्रौद्योगिकियों द्वारा दिए जाने वाले अवसरों और उनकी चुनौतियों के जिम्मेदार प्रबंधन के बीच संतुलन बनाने की वैज्ञानिक संस्थानों की जिम्मेदारी पर भी विचार-विमर्श हुआ।
किंग अब्दुलअजीज सिटी फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (केएसीएसटी) के अध्यक्ष और रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन अथॉरिटी के कार्यवाहक गवर्नर डॉ. मुनीर अल-देसूकी ने एसटीएस फोरम काउंसिल के विशिष्ट सदस्य के रूप में नियुक्ति के बाद “व्हाई ट्रस्ट साइंस?” शीर्षक वाले पूर्ण सत्र में बात की। उनके साथ जापान के शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री योशिहिरो सेकी; जापानी वैज्ञानिक प्रोफेसर शिमोन साकागुची; नेचर के प्रधान संपादक मैग्डेलेना स्किपर; नोबेल फाउंडेशन के बोर्ड की अध्यक्ष एस्ट्रिड सोडरबर्ग विडिंग; और प्रोफेसर सांता जे. ओनो मौजूद रहे। सत्र की अध्यक्षता अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुदीप पारिख ने की।
सत्र के दौरान डॉ. अल-देसूकी ने अधिक खुले और भरोसेमंद अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की कई दिशाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विज्ञान में भरोसा वैज्ञानिक विनम्रता, खुलेपन और जवाबदेही पर आधारित है, तथा वैज्ञानिक समुदाय की अपने निष्कर्षों की समीक्षा, सत्यापन और पारदर्शी सुधार करने की क्षमता पर भी निर्भर है।
उन्होंने सऊदी अरब की उस दिशा पर जोर दिया जिसमें शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान अवसंरचना तक पहुंच का विस्तार किया जा रहा है, जिससे प्रयोगशालाओं के व्यापक उपयोग को संभव बनाया जा सके।
यह प्रश्न स्वाभाविक है कि विज्ञान पर भरोसा आज वैश्विक बहस का केंद्र क्यों बन गया है? फोरम में यह भी रेखांकित हुआ कि तकनीकी प्रगति के साथ जिम्मेदार प्रबंधन कैसे साधा जाए? प्रतिभागियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ओपन साइंस जैसे विषयों पर चर्चा की, जो आने वाले दशकों में अनुसंधान की दिशा तय कर सकते हैं।
डॉ. अल-देसूकी की भागीदारी ऐसे समय में हुई जब उन्हें एसटीएस फोरम काउंसिल का विशिष्ट सदस्य बनाया गया। यह मंच दुनिया भर के नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है ताकि विज्ञान और समाज के बीच संबंधों पर विचार-विमर्श हो सके।
सत्र में यह भी चर्चा हुई कि वैज्ञानिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल नई खोजें करना नहीं, बल्कि उनके सामाजिक प्रभावों को समझना और उन्हें जिम्मेदारी से संभालना भी है। क्या उन्नत प्रौद्योगिकियों के युग में संस्थान अपनी जवाबदेही पूरी कर पा रहे हैं? यह सवाल फोरम की चर्चाओं के केंद्र में रहा।
सऊदी अरब की ओर से यह संदेश गया कि अनुसंधान अवसंरचना तक पहुंच बढ़ाना और शोधकर्ताओं को सशक्त बनाना प्राथमिकता है। इससे नवप्रवर्तन को बल मिलता है और वैज्ञानिक समुदाय के भीतर विश्वास का निर्माण होता है।
फोरम में यह भी सामने आया कि विज्ञान में भरोसा केवल संस्थानों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता; इसमें पारदर्शिता, खुली समीक्षा और स्वयं सुधार की प्रक्रिया शामिल है। क्या वैज्ञानिक समुदाय अपनी गलतियों को खुलकर स्वीकार करने के लिए तैयार है? यह प्रश्न आगे की बहसों के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।
जापान में आयोजित इस बैठक में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। सऊदी प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी वैश्विक वैज्ञानिक संवाद में साम्राज्य की सक्रिय उपस्थिति को दर्शाती है।
डॉ. अल-देसूकी ने अपने संबोधन में वैज्ञानिक विनम्रता को भरोसे की नींव बताया। उनके अनुसार, खुलापन और जवाबदेही वे तत्व हैं जो शोध निष्कर्षों की विश्वसनीयता बढ़ाते हैं।
यह पूछा जा सकता है कि ओपन साइंस का विस्तार किस हद तक संभव है? फोरम में इस पर भी विचार हुआ कि अनुसंधान डेटा और परिणामों तक व्यापक पहुंच कैसे सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग में नैतिकता और जिम्मेदारी कैसे बनी रहे?
सऊदी अरब की नीति में अनुसंधान, विकास और नवप्रवर्तन को बढ़ावा देने पर जोर रहा है। केएसीएसटी और रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन अथॉरिटी जैसी संस्थाएं इस दिशा में काम कर रही हैं। डॉ. अल-देसूकी दोनों संस्थाओं में नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं।
फोरम का यह सत्र इस बात पर केंद्रित रहा कि विज्ञान पर जनता का भरोसा कैसे बढ़ाया जाए। इसमें यह भी शामिल है कि वैज्ञानिक संस्थान अपने काम को आम लोगों तक कैसे पहुंचाएं और संवाद कैसे बनाए रखें।
क्या विज्ञान संचार के मौजूदा तरीके पर्याप्त हैं? यह सवाल भी चर्चा में उठा। प्रतिभागियों ने माना कि पारदर्शिता और संवाद से ही विश्वास की पुनर्स्थापना संभव है।
एसटीएस फोरम की वार्षिक बैठक वैज्ञानिक और तकनीकी नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण मंच मानी जाती है, जहां वैश्विक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास होता है। इस बार की बैठक में विज्ञान में भरोसा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ओपन साइंस और अनुसंधान के भविष्य जैसे विषय प्रमुख रहे।
सऊदी प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी से यह स्पष्ट होता है कि साम्राज्य वैश्विक वैज्ञानिक संवाद में सक्रिय रूप से शामिल हो रहा है। डॉ. अल-देसूकी की काउंसिल सदस्यता इस दिशा में एक और कदम है।
सत्र में यह भी उल्लेख हुआ कि वैज्ञानिक संस्थानों को अवसरों और चुनौतियों के बीच संतुलन बनाना होगा। उन्नत प्रौद्योगिकियों के लाभ के साथ-साथ उनके जोखिमों का जिम्मेदार प्रबंधन भी आवश्यक है।
क्या वैश्विक सहयोग के बिना विज्ञान में भरोसा कायम हो सकता है? यह प्रश्न फोरम की भावना को दर्शाता है। विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभवों से यह सिद्ध किया कि साझा प्रयास ही समाधान की दिशा है।
डॉ. अल-देसूकी ने राष्ट्रीय अनुसंधान अवसंरचना तक पहुंच बढ़ाने की बात कही, जिससे शोधकर्ता और नवप्रवर्तक प्रयोगशालाओं का व्यापक उपयोग कर सकें। यह सऊदी अरब की अनुसंधान-समर्थक नीति का हिस्सा है।
फोरम में यह भी स्वीकार किया गया कि विज्ञान में भरोसा केवल दावों से नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं की पारदर्शिता से बनता है। समीक्षा, सत्यापन और सुधार की क्षमता इसका आधार है।
इस बैठक में जापान के मंत्री योशिहिरो सेकी, प्रोफेसर शिमोन साकागुची, मैग्डेलेना स्किपर, एस्ट्रिड सोडरबर्ग विडिंग और प्रोफेसर सांता जे. ओनो जैसे प्रमुख व्यक्तियों की भागीदारी ने चर्चा को व्यापक बनाया। सत्र की अध्यक्षता डॉ. सुदीप पारिख ने की।
सऊदी अरब की भागीदारी यह दर्शाती है कि वैज्ञानिक भरोसे और जिम्मेदार नवप्रवर्तन पर वैश्विक बहस में साम्राज्य की आवाज सुनी जा रही है। केएसीएसटी और आरडीआईए के नेतृत्व में यह भागीदारी और मजबूत होती दिख रही है।
फोरम में विज्ञान के भविष्य पर चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि अनुसंधान संस्थानों को समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप खुद को ढालना होगा। पारदर्शिता और संवाद इसके दो प्रमुख स्तंभ हैं।
क्या आने वाले वर्षों में विज्ञान और समाज के बीच का यह संवाद और प्रभावी होगा? यह प्रश्न फोरम के बाद भी प्रासंगिक बना हुआ है।
एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि फोरम में सऊदी अरब की ओर से कोई विशिष्ट नई पहल या समझौता घोषित हुआ या नहीं, न ही सत्र में किन ठोस सिफारिशों पर सहमति बनी। रिपोर्ट में डॉ. अल-देसूकी के संबोधन के बाद के प्रश्नोत्तर सत्र का विवरण भी शामिल नहीं है।
सऊदी अरब ने किस अंतरराष्ट्रीय मंच में भाग लिया? सऊदी अरब ने जापान के क्योटो में आयोजित साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन सोसाइटी (एसटीएस) फोरम की 23वीं वार्षिक बैठक में भाग लिया। इस बैठक में दुनिया भर के प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी व्यक्तित्व, नीति निर्माता तथा अनुसंधान, शैक्षणिक और औद्योगिक संस्थानों के प्रमुख शामिल हुए। एसपीए के अनुसार, फोरम में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के तेज बदलावों तथा समाजों पर उनके प्रभावों पर चर्चा हुई।
डॉ. मुनीर अल-देसूकी ने किस सत्र में बात की? केएसीएसटी के अध्यक्ष और रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन अथॉरिटी के कार्यवाहक गवर्नर डॉ. मुनीर अल-देसूकी ने “व्हाई ट्रस्ट साइंस?” शीर्षक वाले पूर्ण सत्र में बात की। यह उनकी एसटीएस फोरम काउंसिल के विशिष्ट सदस्य के रूप में नियुक्ति के बाद हुआ। सत्र की अध्यक्षता अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुदीप पारिख ने की।
डॉ. अल-देसूकी ने विज्ञान में भरोसे पर क्या कहा? डॉ. अल-देसूकी ने कहा कि विज्ञान में भरोसा वैज्ञानिक विनम्रता, खुलेपन और जवाबदेही पर आधारित है। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय की अपने निष्कर्षों की समीक्षा, सत्यापन और पारदर्शी सुधार करने की क्षमता पर भी जोर दिया। उन्होंने सऊदी अरब की उस दिशा का उल्लेख किया जिसमें शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान अवसंरचना तक पहुंच बढ़ाई जा रही है।
सत्र में कौन-कौन प्रमुख व्यक्ति शामिल हुए? सत्र में जापान के शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री योशिहिरो सेकी; जापानी वैज्ञानिक प्रोफेसर शिमोन साकागुची; नेचर के प्रधान संपादक मैग्डेलेना स्किपर; नोबेल फाउंडेशन के बोर्ड की अध्यक्ष एस्ट्रिड सोडरबर्ग विडिंग; और प्रोफेसर सांता जे. ओनो शामिल हुए। सत्र की अध्यक्षता डॉ. सुदीप पारिख ने की। डॉ. अल-देसूकी भी इस सत्र में शामिल हुए।
फोरम में किन विषयों पर चर्चा हुई? फोरम में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के तेज बदलावों तथा समाजों और विकास के भविष्य पर उनके प्रभावों पर चर्चा हुई। विषयों में विज्ञान में भरोसा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ओपन साइंस और वैज्ञानिक अनुसंधान का भविष्य शामिल थे। साथ ही वैज्ञानिक संस्थानों की उस जिम्मेदारी पर भी बात हुई कि वे उन्नत प्रौद्योगिकियों के अवसरों और चुनौतियों के जिम्मेदार प्रबंधन में संतुलन कैसे बनाएं।
एसपीए की रिपोर्ट में क्या नहीं बताया गया? एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि फोरम में सऊदी अरब की ओर से कोई विशिष्ट नई पहल या समझौता घोषित हुआ या नहीं। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि सत्र में किन ठोस सिफारिशों पर सहमति बनी। रिपोर्ट में डॉ. अल-देसूकी के संबोधन के बाद के प्रश्नोत्तर सत्र का विवरण भी शामिल नहीं है।





