Saturday, October 31, 2026
सामाजिक

पैगंबर मस्जिद के इमाम ने शुक्रवार के खुत्बे में संतोष को सच्ची दौलत बताया

पैगंबर मस्जिद के इमाम ने शुक्रवार के खुत्बे में संतोष को सच्ची दौलत बताया

मदीना में पैगंबर मस्जिद में शुक्रवार के खुत्बे में इमाम शेख अब्दुल्लाह अल-बुऐजान ने कहा कि अल्लाह के फैसले पर संतोष रखना आत्मा का सबसे बड़ा खजाना और भीतरी सुकून की सच्ची बुनियाद है। उन्होंने चेतावनी दी कि लालच और ईर्ष्या इंसान के दिल को गरीब बना देते हैं, चाहे उसके पास कितनी भी भौतिक दौलत हो।

जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, यह खुत्बा 2 अक्टूबर 2026 को पैगंबर मस्जिद में दिया गया। एसपीए के मुताबिक इमाम ने संतोष को दिल की सबसे बड़ी दौलत और भीतरी शांति की असली नींव करार दिया।

क्या दौलत का ढेर लगाकर भी कोई इंसान अपने दिल की गरीबी छिपा सकता है? इमाम अल-बुऐजान का संदेश इसी सवाल का जवाब देता है। उन्होंने साफ किया कि संतोष का मतलब बेबसी या काम को नजरअंदाज करना नहीं है। बल्कि इसका मतलब है कि इंसान अपनी रोजी-रोटी के लिए पूरी मेहनत करे और साथ ही अल्लाह पर भरोसा बनाए रखे। यानी मेहनत और तवक्कुल दोनों साथ चलते हैं।

एसपीए के अनुसार इमाम ने यह भी बताया कि संतोष कभी भी आलस या हार मान लेने का नाम नहीं है। यह एक ऐसा संतुलन है जिसमें इंसान अपनी जिंदगी की कोशिशें जारी रखता है, लेकिन नतीजे को लेकर अल्लाह के फैसले पर राजी रहता है। क्या यही संतुलन इंसान को बेचैनी से बचा सकता है?

खुत्बे का आखिरी हिस्सा भी बेहद अहम था। इमाम ने लोगों से जरूरतमंदों के प्रति दया और हमदर्दी दिखाने की अपील की। उन्होंने उन लोगों को भी आगाह किया जो अपनी दौलत का दिखावा करते हैं। एसपीए के मुताबिक इमाम ने कहा कि दौलत का ऐसा प्रदर्शन कम नसीब वालों के दिलों को चोट पहुंचाता है।

क्या हम यह समझ पाते हैं कि हमारी दिखावटी खुशी किसी और के दिल पर क्या असर डालती है? इमाम अल-बुऐजान ने इसी बात पर जोर दिया कि दौलत का सही इस्तेमाल दूसरों की मदद में है, न कि दिखावे में।

पैगंबर मस्जिद में दिया गया यह खुत्बा मदीना से आया, जहां दुनिया भर से नमाजियों की भीड़ जुटती है। एसपीए ने बताया कि खुत्बा स्थानीय समयानुसार 14:08 बजे और जीएमटी के हिसाब से 11:08 बजे जारी किया गया। यानी यह उसी दिन की बात है जब शुक्रवार की नमाज अदा की गई।

इमाम ने अपने खुत्बे में संतोष को आत्मा का सबसे बड़ा खजाना कहा। यह ऐसी दौलत है जो बाजार में नहीं मिलती और न ही बैंक में जमा होती है। क्या हमारे पास इस दौलत को पहचानने की नजर है? एसपीए के मुताबिक इमाम ने कहा कि लालच और ईर्ष्या दिल को खोखला कर देते हैं। इसलिए इंसान के पास चाहे कितना भी माल हो, अगर दिल में संतोष नहीं है तो वह असल में गरीब ही है।

यह खुत्बा सिर्फ इबादत का हिस्सा नहीं था, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी के लिए एक सबक भी था। इमाम ने मेहनत को बेकार नहीं कहा, बल्कि उसे भरोसे के साथ जोड़ने की बात की। क्या हम अपनी कोशिशों के साथ सब्र भी रख पाते हैं? एसपीए की रिपोर्ट के मुताबिक इमाम ने साफ किया कि संतोष का मतलब काम छोड़ देना नहीं है।

खुत्बे में जरूरतमंदों के प्रति दया की अपील भी की गई। इमाम ने लोगों को याद दिलाया कि समाज में ऐसे लोग भी हैं जिनके पास कम है। उनके दिलों को ठेस पहुंचाने वाला दिखावा किसी भी हालत में सही नहीं है। क्या हम अपनी खुशियों को दूसरों के दर्द का कारण बनने से रोक सकते हैं?

एसपीए ने इस खुत्बे को प्रकाशित किया और बताया कि यह पैगंबर मस्जिद से आया। मदीना में दिया गया यह बयान पूरे सऊदी अरब और दुनिया भर के मुसलमानों के लिए एक संदेश लेकर आया। इमाम अल-बुऐजान ने संतोष, मेहनत, भरोसे और दया को एक साथ रखकर जिंदगी जीने का तरीका बताया।

क्या सच्ची दौलत वही है जो दिल को सुकून दे? इमाम का जवाब साफ था कि भौतिक चीजें इंसान को भीतर से भर नहीं सकतीं। एसपीए के मुताबिक उन्होंने कहा कि संतोष ही आत्मा का सबसे बड़ा खजाना है। यह बात उन लोगों के लिए भी है जो दौलत के पीछे भागते हुए अपनी शांति खो देते हैं।

खुत्बे में दिखावे की निंदा भी की गई। इमाम ने कहा कि दौलत का प्रदर्शन कम नसीब लोगों के दिलों को चोट पहुंचाता है। यह ऐसी बात है जो अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती है। क्या हम अपनी चमक-दमक से किसी का दिल दुखाने से बच सकते हैं? एसपीए की रिपोर्ट में यह साफ दर्ज है कि इमाम ने इस बात पर चेतावनी दी।

इस खुत्बे का एक और पहलू यह है कि इसमें मेहनत को बढ़ावा दिया गया। इमाम ने कहा कि संतोष बेबसी नहीं है। यानी इंसान को अपनी रोजी-रोटी के लिए कोशिश करनी चाहिए। लेकिन साथ ही अल्लाह पर भरोसा भी रखना चाहिए। क्या यही तरीका इंसान को तनाव से बचा सकता है?

एसपीए के मुताबिक यह खुत्बा 2 अक्टूबर 2026 को दिया गया। मदीना की पैगंबर मस्जिद में इमाम शेख अब्दुल्लाह अल-बुऐजान ने यह संदेश दिया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि खुत्बा स्थानीय समय 14:08 और जीएमटी 11:08 पर जारी हुआ।

खुत्बे का मूल संदेश यही है कि दिल की दौलत असली दौलत है। लालच और ईर्ष्या इंसान को अंदर से खोखला कर देते हैं। इमाम ने इस बात पर जोर दिया कि संतोष ही भीतरी शांति की नींव है। क्या हम अपने दिलों को इस खजाने से भर पाते हैं?

इमाम ने जरूरतमंदों के प्रति दया की अपील की और दिखावे से बचने की सलाह दी। यह संदेश समाज के हर तबके के लिए है। एसपीए की रिपोर्ट में इन सभी बातों का जिक्र है। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि खुत्बे में कितने लोग मौजूद थे या इमाम ने किसी और विषय पर बात की।

एसपीए ने इस खबर को 14:08 स्थानीय समय और 11:08 जीएमटी पर जारी किया। रिपोर्ट में सिर्फ खुत्बे के संदेश पर ध्यान दिया गया है। इसमें इमाम के अलावा किसी और का नाम नहीं है। न ही किसी और घटना का जिक्र है।

यह खुत्बा बताता है कि संतोष और मेहनत साथ-साथ चल सकते हैं। इंसान को अपनी कोशिशें करनी चाहिए और नतीजा अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए। क्या यही सच्ची आजादी है? इमाम अल-बुऐजान ने अपने खुत्बे में यही संतुलन समझाया।

आखिर में इमाम ने दौलत के दिखावे से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसा दिखावा कम नसीब लोगों के दिलों को चोट पहुंचाता है। एसपीए के मुताबिक यह खुत्बे का आखिरी हिस्सा था। रिपोर्ट में इसके अलावा कोई और जानकारी नहीं दी गई।

इमाम ने संतोष के बारे में क्या कहा? इमाम शेख अब्दुल्लाह अल-बुऐजान ने कहा कि अल्लाह के फैसले पर संतोष रखना आत्मा का सबसे बड़ा खजाना और भीतरी सुकून की सच्ची बुनियाद है। एसपीए के मुताबिक उन्होंने कहा कि लालच और ईर्ष्या दिल को गरीब बना देते हैं, चाहे भौतिक दौलत कितनी भी हो। यह खुत्बा पैगंबर मस्जिद में दिया गया।

क्या संतोष का मतलब बेबसी है? नहीं। इमाम ने साफ किया कि संतोष का मतलब बेबसी या काम को नजरअंदाज करना नहीं है। यह मेहनत और अल्लाह पर भरोसे के बीच संतुलन है। एसपीए के मुताबिक इंसान को अपनी रोजी-रोटी के लिए कोशिश करनी चाहिए और साथ ही अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।

इमाम ने दिखावे के बारे में क्या चेतावनी दी? इमाम ने दौलत के दिखावे से बचने की चेतावनी दी। एसपीए के मुताबिक उन्होंने कहा कि ऐसा प्रदर्शन कम नसीब लोगों के दिलों को चोट पहुंचाता है। उन्होंने जरूरतमंदों के प्रति दया और हमदर्दी दिखाने की अपील की। यह खुत्बे का आखिरी हिस्सा था।

यह खुत्बा कब और कहां दिया गया? एसपीए के मुताबिक यह खुत्बा 2 अक्टूबर 2026 को मदीना की पैगंबर मस्जिद में दिया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि यह स्थानीय समय 14:08 बजे और जीएमटी 11:08 बजे जारी हुआ। इमाम शेख अब्दुल्लाह अल-बुऐजान ने यह खुत्बा दिया।

खुत्बे में किस बात पर जोर दिया गया? खुत्बे में संतोष, मेहनत, भरोसे और दया पर जोर दिया गया। इमाम ने कहा कि संतोष भीतरी शांति की नींव है और लालच दिल को खोखला कर देता है। एसपीए के मुताबिक उन्होंने जरूरतमंदों के प्रति दया की अपील की और दिखावे से बचने की सलाह दी।

एसपीए की रिपोर्ट में क्या नहीं बताया गया? एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि खुत्बे में कितने लोग मौजूद थे या इमाम ने किसी और विषय पर बात की। रिपोर्ट में इमाम के अलावा किसी और का नाम नहीं है और न ही किसी और घटना का जिक्र है। रिपोर्ट सिर्फ खुत्बे के संदेश तक सीमित है।