रियाद में पाक कला आयोग ने ‘द आर्ट ऑफ सऊदी कुकिंग’ पुस्तक का पुनः प्रकाशन किया है। यह पुस्तक सऊदी व्यंजनों को समर्पित पहला ग्रंथ है और एक अग्रणी कृति मानी जाती है। यह कदम राष्ट्रीय पाक विरासत को संरक्षित करने और सऊदी पाक कलाओं से जुड़े ज्ञान की निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, यह पहल अल-नहदा वुमेन सोसाइटी के सहयोग से की गई है, जिसने मूल संस्करण तैयार किया और प्रकाशित किया था। आयोग ने विशेष ज्ञान-आधारित परियोजनाओं के समर्थन तथा राष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान के एक प्रमुख घटक के रूप में सऊदी व्यंजनों की उपस्थिति बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
इस परियोजना की जड़ें 1981 में जाती हैं, जब अल-नहदा सोसाइटी ने साम्राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से सऊदी व्यंजनों को एकत्र करने और प्रलेखित करने की पहल शुरू की थी। क्या आप जानते हैं कि उस समय ऐसा कोई संकलन मौजूद नहीं था जो सऊदी रसोई को एक साथ दर्ज करता हो? यही कारण है कि इस पहल को अग्रणी माना जाता है।
पुस्तक की तैयारी की निगरानी एक विशेष समिति ने की, जिसने साम्राज्य भर की महिलाओं के साथ व्यापक क्षेत्रीय कार्य पर भरोसा किया। इन महिलाओं ने स्थानीय व्यंजनों को दर्ज किया तथा सामग्री और पारंपरिक तैयारी के तरीकों का प्रलेखन किया। क्या आप सोच सकते हैं कि बिना आधुनिक डिजिटल उपकरणों के यह दस्तावेजीकरण कितना कठिन रहा होगा?
समिति में तीन महिलाएँ शामिल थीं, जिन्होंने पुस्तक तैयार करने में कई वर्ष बिताए। इसमें व्यंजनों को एकत्र करना और सत्यापित करना, माप और तैयारी के तरीकों को एकरूप करना तथा फोटोग्राफी, समीक्षा और अंतिम उत्पादन पूरा करना शामिल रहा। परिणामी संस्करण सऊदी रसोई की विविधता और समृद्धि को दर्शाता है।
क्या यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए रसोई की विरासत को जीवित रखने में सहायक सिद्ध होगी? आयोग का यह प्रयास स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाक विरासत को संरक्षित करने, प्रलेखित करने और प्रदर्शित करने की दिशा में एक कदम है।
यह पुनः प्रकाशन उस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम बन सकता है, जिसे दशकों पहले क्षेत्रीय कार्य के जरिए सहेजा गया था। क्या आप जानना चाहेंगे कि इस संस्करण में कितने व्यंजन शामिल हैं? एसपीए की विज्ञप्ति में व्यंजनों की संख्या, पृष्ठों की संख्या, मूल्य या उपलब्धता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
पुस्तक का मूल संस्करण किसने तैयार किया? अल-नहदा वुमेन सोसाइटी ने मूल संस्करण तैयार और प्रकाशित किया था। परियोजना 1981 में शुरू हुई, जब सोसाइटी ने साम्राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से सऊदी व्यंजनों को एकत्र और प्रलेखित करने की पहल की। पाक कला आयोग ने अब सोसाइटी के सहयोग से इसका पुनः प्रकाशन किया है।
समिति ने क्या कार्य किया? समिति में तीन महिलाएँ शामिल थीं, जिन्होंने कई वर्ष पुस्तक पर काम किया। उन्होंने व्यंजन एकत्र और सत्यापित किए, माप और तैयारी के तरीकों को एकरूप किया तथा फोटोग्राफी, समीक्षा और अंतिम उत्पादन पूरा किया। समिति ने साम्राज्य भर की महिलाओं के साथ क्षेत्रीय कार्य पर भरोसा किया।
इस पहल का उद्देश्य क्या है? आयोग के अनुसार उद्देश्य राष्ट्रीय पाक विरासत को संरक्षित करना और सऊदी पाक कलाओं से जुड़े ज्ञान की निरंतरता सुनिश्चित करना है। आयोग ने विशेष ज्ञान-आधारित परियोजनाओं के समर्थन तथा राष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान के घटक के रूप में सऊदी व्यंजनों की उपस्थिति बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
पुस्तक में क्या दर्शाया गया है? परिणामी संस्करण सऊदी रसोई की विविधता और समृद्धि को दर्शाता है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के व्यंजन, सामग्री और पारंपरिक तैयारी के तरीके शामिल हैं। एसपीए की विज्ञप्ति में व्यंजनों की संख्या या पृष्ठों की संख्या नहीं बताई गई है।





