Sunday, November 8, 2026
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मदीना में प्रोफेट्स मस्जिद के खुत्बे में ईमान, एकता और शरिया पर जोर

मदीना में प्रोफेट्स मस्जिद के खुत्बे में ईमान, एकता और शरिया पर जोर

मदीना में प्रोफेट्स मस्जिद के इमाम शेख हुसैन आल आल-शेख ने शुक्रवार के खुत्बे में मुसलमानों से अल्लाह का डर रखने और उसकी आज्ञाकारिता पर दृढ़ रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सच्ची सफलता और असली खुशी सच्चे ईमान, शुद्ध तौहीद, शरिया के अमल और पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत तथा सालेह पूर्वजों के मार्ग पर सख्ती से चलने से ही हासिल होती है।

जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, यह खुत्बा 6 नवंबर 2026 को मदीना में दिया गया। एसपीए के अनुसार इमाम ने लालच और अनैतिकता के खिलाफ चेतावनी दी और इन्हें तबाही के प्रमुख कारण बताया। यह खुत्बा ऐसे समय में दिया गया जब मस्जिद-ए-नबवी दुनिया भर के ज़ायरीन के लिए एक केंद्र बनी हुई है और शुक्रवार की नमाज़ में बड़ी संख्या में लोग शिरकत करते हैं।

शेख हुसैन आल आल-शेख ने कहा कि नेक लोगों की सबसे बड़ी खूबियों और ईमान के गहरे फलों में मुश्किलों के सामने सब्र, लगातार तौबा और इस्तिगफार, अल्लाह का निरंतर ज़िक्र, और भलाई का हुक्म देकर बुराई से रोककर समाज में एकता कायम करना शामिल है। उन्होंने इन बातों को ईमान की पहचान बताया।

क्या मुश्किलों में सब्र और लगातार तौबा कोई मुसलमान अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उतार पाता है? यह सवाल इस खुत्बे की मूल भावना से जुड़ा है, जिसमें इमाम ने इन्हें ईमान के फल बताया। एसपीए के मुताबिक उन्होंने ज़िक्र, इस्तिगफार और अम्र बिल मारूफ व नही अनिल मुनकर को सामुदायिक एकता का ज़रिया कहा।

इमाम ने अपने खुत्बे के अंत में कहा कि सऊदी अरब का राज्य तौहीद को बुलंद करने, इस्लामी शरिया को लागू करने और मुस्लिम उम्मah के मसलों की पैरवी करने पर कायम हुआ है। उन्होंने अल्लाह के जीत के वादे और दुश्मनों की चालों को नाकाम करने पर अटूट यकीन की दावत दी। उन्होंने कहा कि दुश्मन की साज़िशों का मुकाबला करने के लिए सफ़ों का एक होना ज़रूरी है।

क्या सफ़ों की एकता के बिना किसी समाज की हिफाज़त मुमकिन है? इमाम ने इसी बात पर ज़ोर दिया कि मुसलमानों को अल्लाह के वादे पर भरोसा रखना चाहिए और दुश्मनों की चालों के सामने एकजुट रहना चाहिए। एसपीए की रिपोर्ट के अनुसार यह खुत्बा मदीना में दिया गया और इसमें ईमान, तौहीद और शरिया के अमल को सफलता की कुंजी बताया गया।

खुत्बे में इमाम ने लालच और अनैतिकता को तबाही के प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि इन बुराइयों से बचना ईमान की हिफाज़त के लिए ज़रूरी है। एसपीए के मुताबिक उन्होंने नेक लोगों की खूबियों में सब्र, तौबा, इस्तिगफार, ज़िक्र और समाज में भलाई को बढ़ावा देना गिनाया।

क्या लालच और अनैतिकता आज के समाज में तबाही का सबसे बड़ा ज़रिया बन सकते हैं? इमाम ने इसी खतरे से आगाह किया और इन्हें तबाही के प्रमुख कारणों में शुमार किया। उन्होंने ईमान के फलों की तरफ लौटने की नसीहत दी।

एसपीए के अनुसार इमाम ने कहा कि सऊदी अरब की बुनियाद तौहीद, इस्लामी शरिया के अमल और मुस्लिम दुनिया के मसलों की पैरवी पर रखी गई है। उन्होंने अल्लाह के जीत के वादे पर यकीन और दुश्मनों की चालों को नाकाम करने की बात कही। साथ ही उन्होंने सफ़ों की एकता को ज़रूरी बताया।

क्या अल्लाह के वादे पर यकीन रखने वाला समाज दुश्मन की चालों से डरता है? इमाम ने इस सवाल का जवाब अपने खुत्बे में यह कहकर दिया कि अल्लाह दुश्मनों की चालों को नाकाम करता है और मुसलमानों को एकजुट रहना चाहिए। यह बात एसपीए की रिपोर्ट में दर्ज है।

शुक्रवार का खुत्बा मस्जिद-ए-नबवी में दिया गया, जहां दुनिया भर से ज़ायरीन आते हैं। एसपीए के मुताबिक इमाम ने मुसलमानों से अल्लाह का डर रखने और उसकी आज्ञाकारिता पर दृढ़ रहने की अपील की। उन्होंने सच्चे ईमान, शुद्ध तौहीद, शरिया के अमल और सुन्नत तथा सालेह पूर्वजों के मार्ग पर चलने को सफलता और खुशी का ज़रिया बताया।

क्या सुन्नत और सालेह पूर्वजों के मार्ग पर चलना आज के दौर में उतना ही आसान है जितना कहना? इमाम ने इसी मार्ग को सच्ची कामयाबी की शर्त बताया। एसपीए के अनुसार उन्होंने इसे ईमान की असल बुनियाद के तौर पर पेश किया।

खुत्बे में इमाम ने मुश्किलों के सामने सब्र, लगातार तौबा और इस्तिगफार, अल्लाह के ज़िक्र और समाज में भलाई को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया। उन्होंने इन्हें नेक लोगों की सबसे बड़ी खूबियां और ईमान के गहरे फल बताया। एसपीए के मुताबिक उन्होंने अम्र बिल मारूफ व नही अनिल मुनकर के ज़रिए सामुदायिक एकता कायम करने की बात कही।

क्या समाज में भलाई का हुक्म देना और बुराई से रोकना एकता की बुनियाद बन सकता है? इमाम ने इसे ईमान के फलों में गिना और सामुदायिक एकता का ज़रिया बताया। यह बात एसपीए की रिपोर्ट में साफ तौर पर दर्ज है।

इमाम ने अपने खुत्बे में लालच और अनैतिकता को तबाही के प्रमुख कारण बताया। उन्होंने इनसे बचने की नसीहत दी। एसपीए के अनुसार उन्होंने नेक लोगों की खूबियों में सब्र, तौबा, इस्तिगफार, ज़िक्र और भलाई को बढ़ावा देना शामिल किया।

खुत्बे के अंत में इमाम ने कहा कि सऊदी अरब तौहीद को बुलंद करने, इस्लामी शरिया लागू करने और मुस्लिम उम्मah के मसलों की पैरवी पर कायम हुआ है। उन्होंने अल्लाह के जीत के वादे पर अटूट यकीन और दुश्मनों की चालों को नाकाम करने की बात कही। साथ ही सफ़ों की एकता को ज़रूरी बताया।

क्या सऊदी अरब की बुनियाद में तौहीद और शरिया का अमल ही उसकी पहचान है? इमाम ने अपने खुत्बे में इसी बात को रेखांकित किया। एसपीए के मुताबिक उन्होंने मुस्लिम दुनिया के मसलों की पैरवी को भी इसी बुनियाद का हिस्सा बताया।

एसपीए की रिपोर्ट के अनुसार यह खुत्बा 6 नवंबर 2026 को मदीना में दिया गया। रिपोर्ट में खुत्बे के समय, स्थान और इमाम के नाम का ज़िक्र है। इसमें बताया गया कि इमाम ने मुसलमानों को अल्लाह का डर रखने और उसकी आज्ञाकारिता पर दृढ़ रहने की अपील की।

क्या ईमान, तौहीद और शरिया के अमल के बिना सच्ची खुशी मिल सकती है? इमाम ने अपने खुत्बे में इस सवाल का जवाब यह कहकर दिया कि सच्ची सफलता और असली खुशी इन्हीं रास्तों से हासिल होती है। एसपीए के मुताबिक उन्होंने सुन्नत और सालेह पूर्वजों के मार्ग पर चलने पर ज़ोर दिया।

खुत्बे में इमाम ने दुश्मनों की साज़िशों का मुकाबला करने के लिए सफ़ों की एकता को ज़रूरी बताया। उन्होंने अल्लाह के जीत के वादे पर यकीन रखने की दावत दी। एसपीए के अनुसार उन्होंने कहा कि अल्लाह दुश्मनों की चालों को नाकाम करता है।

क्या एकजुट सफ़ों के बिना दुश्मन की साज़िशों का मुकाबला मुमकिन है? इमाम ने इसी बात पर ज़ोर दिया कि मुसलमानों को एकजुट रहना चाहिए और अल्लाह के वादे पर भरोसा रखना चाहिए। यह बात एसपीए की रिपोर्ट में दर्ज है।

एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि खुत्बे में कितने लोग मौजूद थे, न ही खुत्बे की अवधि या अन्य प्रशासनिक विवरण दिए गए हैं। रिपोर्ट में इमाम के नाम, स्थान और तारीख के अलावा खुत्बे के मुख्य संदेशों का ज़िक्र है। इसमें ईमान, तौहीद, शरिया, सुन्नत, सब्र, तौबा, ज़िक्र, एकता और दुश्मनों की चालों को नाकाम करने की बातें शामिल हैं।

खुत्बे में इमाम ने सच्ची सफलता और खुशी का ज़रिया क्या बताया? एसपीए के मुताबिक इमाम शेख हुसैन आल आल-शेख ने कहा कि सच्ची सफलता और असली खुशी सच्चे ईमान, शुद्ध तौहीद, शरिया के अमल और पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत तथा सालेह पूर्वजों के मार्ग पर सख्ती से चलने से हासिल होती है। उन्होंने मुसलमानों से अल्लाह का डर रखने और उसकी आज्ञाकारिता पर दृढ़ रहने की अपील की।

इमाम ने तबाही के प्रमुख कारण किन्हें बताया? एसपीए के अनुसार इमाम ने लालच और अनैतिकता के खिलाफ चेतावनी दी और इन्हें तबाही के प्रमुख कारण बताया। उन्होंने इन बुराइयों से बचने की नसीहत दी। साथ ही उन्होंने नेक लोगों की खूबियों में सब्र, तौबा, इस्तिगफार, ज़िक्र और भलाई को बढ़ावा देना गिनाया।

ईमान के गहरे फल कौन-कौन से बताए गए? एसपीए के मुताबिक इमाम ने कहा कि नेक लोगों की सबसे बड़ी खूबियों और ईमान के गहरे फलों में मुश्किलों के सामने सब्र, लगातार तौबा और इस्तिगफार, अल्लाह का निरंतर ज़िक्र, और भलाई का हुक्म देकर बुराई से रोककर समाज में एकता कायम करना शामिल है। उन्होंने इन्हें ईमान की पहचान बताया।

इमाम ने सऊदी अरब की बुनियाद के बारे में क्या कहा? एसपीए के अनुसार इमाम ने खुत्बे के अंत में कहा कि सऊदी अरब का राज्य तौहीद को बुलंद करने, इस्लामी शरिया को लागू करने और मुस्लिम उम्मah के मसलों की पैरवी करने पर कायम हुआ है। उन्होंने अल्लाह के जीत के वादे और दुश्मनों की चालों को नाकाम करने पर अटूट यकीन की दावत दी।

इमाम ने सफ़ों की एकता पर क्यों ज़ोर दिया? एसपीए के मुताबिक इमाम ने कहा कि दुश्मन की साज़िशों का मुकाबला करने के लिए सफ़ों का एक होना ज़रूरी है। उन्होंने अल्लाह के जीत के वादे पर यकीन रखने और दुश्मनों की चालों को नाकाम करने की बात कही। उन्होंने मुसलमानों को एकजुट रहने की दावत दी।

खुत्बा कब और कहां दिया गया? एसपीए के अनुसार यह खुत्बा 6 नवंबर 2026 को मदीना में प्रोफेट्स मस्जिद में दिया गया। इमाम शेख हुसैन आल आल-शेख ने यह खुत्बा पढ़ा। रिपोर्ट में खुत्बे में मौजूद लोगों की संख्या, अवधि या अन्य प्रशासनिक विवरण नहीं दिए गए हैं।