Saturday, October 31, 2026
संस्कृति

संस्कृति मंत्रालय बुधवार को रियाद के फेना अलअव्वल सेंटर में क्वार्टर टोन प्रदर्शनी शुरू करेगा

संस्कृति मंत्रालय बुधवार को रियाद के फेना अलअव्वल सेंटर में क्वार्टर टोन प्रदर्शनी शुरू करेगा

रियाद के फेना अलअव्वल सेंटर में बुधवार से क्वार्टर टोन प्रदर्शनी शुरू होगी, जो 7 नवंबर तक चलेगी। यह कला प्रदर्शनी संगीत और दृश्य कला के बीच के संगम को एक संवेदी अनुभव के रूप में पेश करती है।

जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, यह प्रदर्शनी संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित की जा रही है और इसका विचार कलाकार नसीर शम्मा ने तैयार किया है। प्रदर्शनी का आरंभ बुधवार को होगा और यह 7 नवंबर तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी।

क्या संगीत को आँखों से देखा जा सकता है? क्वार्टर टोन प्रदर्शनी इसी प्रश्न को अपनी कला का आधार बनाती है। इसकी संकल्पना में ऊद बनाने की प्रक्रिया में निकलने वाली लकड़ी की छीलन और लकड़ी के बचे हुए टुकड़ों का उपयोग करके दृश्य कलाकृतियाँ बनाई जाती हैं। यह सामग्री अपने पारंपरिक उपयोग से आगे बढ़कर ऐसी रचनाओं में बदल जाती है जो ध्वनि, मक़ाम और लय की अनुभूति कराती हैं।

ऊद एक ऐसा वाद्य है जिसकी पहचान उसकी ध्वनि से है, लेकिन यहाँ उसी वाद्य के निर्माण से बची लकड़ी कला का माध्यम बन जाती है। क्या किसी वाद्य के बनने की प्रक्रिया में निकला अपशिष्ट भी संगीत का हिस्सा कहा जा सकता है? प्रदर्शनी इसी सोच को मूर्त रूप देती है, जहाँ लकड़ी की छीलन और टुकड़े ध्वनि, मक़ाम और लय जैसी संगीत की अवधारणाओं को दृश्य रूप में प्रस्तुत करते हैं।

प्रदर्शनी के साथ एक विविध सांस्कृतिक और कलात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में कलाकारों और शोधकर्ताओं के साथ चर्चा सत्र शामिल हैं, जो ध्वनि और स्थान, स्मृति तथा पहचान के बीच के संबंध पर केंद्रित होंगे। क्या ध्वनि किसी स्थान की पहचान बन सकती है? क्या कोई राग हमें किसी विशेष जगह या समय की याद दिला सकता है? ये चर्चाएँ इन्हीं सवालों के इर्द-गिर्द घूमेंगी।

ध्वनि और स्थान का संबंध, स्मृति और पहचान का संबंध, और संगीत तथा दृश्य कला का संबंध — प्रदर्शनी इन तीनों धागों को एक साथ बुनती है। क्या कला किसी समुदाय की सामूहिक स्मृति को सहेज सकती है? चर्चा सत्रों में कलाकार और शोधकर्ता इन विषयों पर अपने अनुभव और शोध साझा करेंगे।

प्रदर्शनी दर्शकों के लिए सप्ताह के सभी दिन सुबह 10:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुली रहेगी। शुक्रवार को यह शाम 5:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुलेगी। क्या समय की यह सीमा दर्शकों की भागीदारी को आकार देगी? सप्ताह के दिनों में लंबे घंटे और शुक्रवार को अपेक्षाकृत छोटा समय — यह व्यवस्था दर्शकों को अपनी सुविधा के अनुसार प्रदर्शनी देखने का अवसर देती है।

फेना अलअव्वल सेंटर रियाद में स्थित है, और यह प्रदर्शनी वहाँ बुधवार से 7 नवंबर तक चलेगी। संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित यह प्रदर्शनी संगीत और दृश्य कला के बीच के संबंध को एक संवेदी अनुभव के रूप में प्रस्तुत करती है।

कलाकार नसीर शम्मा ने इस प्रदर्शनी की संकल्पना तैयार की है। उनकी संकल्पना का केंद्र ऊद निर्माण से निकलने वाली लकड़ी की छीलन और लकड़ी के बचे हुए टुकड़े हैं, जिनसे दृश्य कलाकृतियाँ बनाई जाती हैं। यह सामग्री अपने पारंपरिक कार्य से हटकर ध्वनि, मक़ाम और लय की अनुभूति कराने वाली रचनाओं में बदल जाती है।

क्या किसी वाद्य की लकड़ी में उसकी ध्वनि बसी होती है? ऊद बनाने की प्रक्रिया में जो लकड़ी बचती है, वह सामान्यतः अपने मूल उपयोग से बाहर चली जाती है। इस प्रदर्शनी में उसी बची हुई लकड़ी को कला का आधार बनाया गया है। यह सामग्री अब संगीत के तत्वों — ध्वनि, मक़ाम और लय — को दृश्य रूप में व्यक्त करती है।

प्रदर्शनी के साथ चलने वाले सांस्कृतिक और कलात्मक कार्यक्रम में कलाकारों और शोधकर्ताओं के साथ चर्चा सत्र शामिल हैं। ये सत्र ध्वनि और स्थान, स्मृति और पहचान के संबंध पर केंद्रित हैं। क्या ध्वनि और स्थान के बीच का रिश्ता समय के साथ बदलता है? क्या स्मृति और पहचान को संगीत के जरिए समझा जा सकता है? ये प्रश्न चर्चा सत्रों की दिशा तय करते प्रतीत होते हैं।

प्रदर्शनी का समय सप्ताह के सभी दिन सुबह 10:00 बजे से रात 10:00 बजे तक है, जबकि शुक्रवार को यह शाम 5:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुली रहेगी। यह जानकारी एसपीए ने दी है।

एसपीए की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनी का आरंभ बुधवार को होगा और यह 7 नवंबर तक चलेगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्रदर्शनी संगीत और दृश्य कला के बीच के संगम को एक संवेदी अनुभव के रूप में पेश करती है।

क्या कला प्रदर्शनी केवल देखने के लिए होती है, या वह सुनने और महसूस करने का भी माध्यम बन सकती है? क्वार्टर टोन प्रदर्शनी इसी सवाल को अपने केंद्र में रखती है। यहाँ लकड़ी की छीलन और टुकड़ों से बनी कलाकृतियाँ ध्वनि, मक़ाम और लय की अनुभूति कराती हैं।

प्रदर्शनी की संकल्पना में ऊद निर्माण से निकलने वाली सामग्री का पुनः उपयोग एक कलात्मक हस्तक्षेप के रूप में किया गया है। यह सामग्री अपने पारंपरिक कार्य से हटकर नई रचनाओं में ढल जाती है। क्या किसी चीज़ का पुराना उपयोग समाप्त होने पर उसका नया अर्थ शुरू होता है? प्रदर्शनी इसी विचार को मूर्त करती है।

चर्चा सत्रों में कलाकार और शोधकर्ता ध्वनि और स्थान, स्मृति और पहचान के संबंध पर बात करेंगे। ये सत्र प्रदर्शनी के साथ चलने वाले सांस्कृतिक और कलात्मक कार्यक्रम का हिस्सा हैं। क्या ध्वनि किसी जगह की स्मृति को सहेजने का जरिया बन सकती है? क्या पहचान को संगीत के स्वरूपों में पहचाना जा सकता है? इन सवालों पर चर्चा केंद्रित रहेगी।

प्रदर्शनी रियाद के फेना अलअव्वल सेंटर में आयोजित हो रही है। यह बुधवार से 7 नवंबर तक चलेगी। दर्शक सप्ताह के सभी दिन सुबह 10:00 बजे से रात 10:00 बजे तक और शुक्रवार को शाम 5:00 बजे से रात 10:00 बजे तक प्रदर्शनी देख सकेंगे।

संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित यह प्रदर्शनी संगीत और दृश्य कला के बीच के संबंध को एक संवेदी अनुभव के रूप में सामने रखती है। इसका विचार कलाकार नसीर शम्मा ने तैयार किया है। संकल्पना में ऊद निर्माण से निकलने वाली लकड़ी की छीलन और लकड़ी के बचे हुए टुकड़ों से दृश्य कलाकृतियाँ बनाई जाती हैं।

एसपीए की रिपोर्ट में प्रदर्शनी के साथ होने वाले सांस्कृतिक और कलात्मक कार्यक्रम का जिक्र है, जिसमें कलाकारों और शोधकर्ताओं के साथ चर्चा सत्र शामिल हैं। ये सत्र ध्वनि और स्थान, स्मृति और पहचान के संबंध को संबोधित करते हैं। क्या संगीत और दृश्य कला के बीच का यह संगम दर्शकों के लिए नया अनुभव बनेगा? यह प्रदर्शनी इसी संभावना को खोलती है।

रिपोर्ट में प्रदर्शनी के टिकट, प्रवेश शुल्क, कलाकृतियों की संख्या, चर्चा सत्रों की तारीखों या प्रतिभागियों के नाम नहीं दिए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनी बुधवार से 7 नवंबर तक रियाद के फेना अलअव्वल सेंटर में चलेगी, और दर्शकों के लिए समय सप्ताह के दिनों में सुबह 10:00 बजे से रात 10:00 बजे तक तथा शुक्रवार को शाम 5:00 बजे से रात 10:00 बजे तक निर्धारित है।

क्वार्टर टोन प्रदर्शनी कहाँ और कब आयोजित होगी? प्रदर्शनी रियाद के फेना अलअव्वल सेंटर में बुधवार से शुरू होकर 7 नवंबर तक चलेगी। इसे संस्कृति मंत्रालय लॉन्च कर रहा है। एसपीए के अनुसार, यह प्रदर्शनी संगीत और दृश्य कला के बीच के संगम को एक संवेदी अनुभव के रूप में पेश करती है। रिपोर्ट में टिकट या प्रवेश शुल्क की जानकारी नहीं दी गई है।

प्रदर्शनी की संकल्पना किसने तैयार की और उसका आधार क्या है? प्रदर्शनी की संकल्पना कलाकार नसीर शम्मा ने तैयार की है। इसका आधार ऊद बनाने की प्रक्रिया में निकलने वाली लकड़ी की छीलन और लकड़ी के बचे हुए टुकड़े हैं। इनसे दृश्य कलाकृतियाँ बनाई जाती हैं, जो सामग्री को उसके पारंपरिक कार्य से हटाकर ध्वनि, मक़ाम और लय की अनुभूति कराने वाली रचनाओं में बदल देती हैं।

प्रदर्शनी के साथ कौन-सा कार्यक्रम होगा? प्रदर्शनी के साथ एक विविध सांस्कृतिक और कलात्मक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें कलाकारों और शोधकर्ताओं के साथ चर्चा सत्र शामिल हैं, जो ध्वनि और स्थान, स्मृति और पहचान के बीच के संबंध पर केंद्रित होंगे। एसपीए की रिपोर्ट में सत्रों की तारीखों या प्रतिभागियों के नाम नहीं दिए गए हैं।

दर्शक प्रदर्शनी किस समय देख सकेंगे? प्रदर्शनी सप्ताह के सभी दिन सुबह 10:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुली रहेगी। शुक्रवार को यह शाम 5:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुलेगी। यह समय-सारणी एसपीए ने बताई है। रिपोर्ट में प्रवेश शुल्क, टिकट या कलाकृतियों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

प्रदर्शनी का मुख्य विषय क्या है? प्रदर्शनी का मुख्य विषय संगीत और दृश्य कला के बीच का संगम है, जिसे एक संवेदी अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। ऊद निर्माण से बची लकड़ी से बनी कलाकृतियाँ ध्वनि, मक़ाम और लय की अनुभूति कराती हैं। एसपीए के अनुसार, चर्चा सत्र ध्वनि और स्थान, स्मृति और पहचान के संबंध को संबोधित करते हैं।

एसपीए की रिपोर्ट में क्या जानकारी नहीं दी गई? रिपोर्ट में प्रदर्शनी के टिकट, प्रवेश शुल्क, कलाकृतियों की संख्या, चर्चा सत्रों की तारीखों या प्रतिभागियों के नाम नहीं दिए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में प्रदर्शनी का स्थान फेना अलअव्वल सेंटर, आरंभ बुधवार, समापन 7 नवंबर और दर्शकों के लिए समय सारणी शामिल है। संकल्पना कलाकार नसीर शम्मा की बताई गई है।