Wednesday, October 28, 2026
अर्थव्यवस्था

अलबुदैवी: जीसीसी देश ऊर्जा निर्यात मार्गों में विविधता और आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता पर काम कर रहे हैं

अलबुदैवी: जीसीसी देश ऊर्जा निर्यात मार्गों में विविधता और आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता पर काम कर रहे हैं

मनामा में 5 अक्टूबर 2026 को हुई जीसीसी पेट्रोलियम सहयोग समिति की 37वीं बैठक में जीसीसी महासचिव जासिम अलबुदैवी ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा अब केवल उत्पादन क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हर परिस्थिति में आपूर्ति के प्रवाह और उसकी निरंतरता सुनिश्चित करना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि जीसीसी देश ऊर्जा निर्यात मार्गों में विविधता लाने और आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता सुनिश्चित करने पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जिससे जीसीसी ऊर्जा प्रणाली की लचीलापन और तेज वैश्विक बदलावों का सामना करने की तैयारी मजबूत होती है।

जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, यह बैठक मनामा में आयोजित हुई और इसकी अध्यक्षता बहरीन के तेल और पर्यावरण मंत्री तथा जलवायु मामलों के विशेष दूत डॉ. मोहम्मद बिन मुबारक बिन दैना ने की, जो वर्तमान सत्र के अध्यक्ष भी हैं। बैठक में समिति के सदस्यों ने भाग लिया।

अपने संबोधन की शुरुआत में जीसीसी महासचिव ने बताया कि 2025 के संकेतक वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जीसीसी देशों की प्रमुख स्थिति को दर्शाते हैं। कच्चे तेल के भंडार 518 अरब बैरल से अधिक अनुमानित हैं और प्राकृतिक गैस के भंडार 44 ट्रिलियन घन मीटर से अधिक हैं। इसके साथ ही कच्चे तेल का उत्पादन 16 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक रहा और विपणन योग्य प्राकृतिक गैस का उत्पादन लगभग 461 अरब घन मीटर तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े खाड़ी के संसाधनों की ताकत और पैमाने तथा उनके प्रबंधन की दक्षता को दर्शाते हैं, साथ ही वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और बाजार स्थिरता बनाए रखने में जीसीसी देशों की केंद्रीय जिम्मेदारी को भी रेखांकित करते हैं।

क्या ऊर्जा सुरक्षा की परिभाषा अब उत्पादन से आगे बढ़कर आपूर्ति की निरंतरता तक पहुंच चुकी है? अलबुदैवी ने कहा कि कई ऊर्जा पारगमन मार्गों और समुद्री गलियारों में व्यवधान इस बात की पुष्टि करते हैं कि आपूर्ति की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए जीसीसी समन्वय को बढ़ाना आवश्यक है। यह ऊर्जा संक्रमण के प्रति संतुलित और यथार्थवादी दृष्टिकोण बनाए रखने के साथ-साथ होता है, जिसमें आपूर्ति सुरक्षा और बाजार स्थिरता को बनाए रखते हुए स्थिरता और उन्नत प्रौद्योगिकियों में निवेश को आगे बढ़ाया जाता है।

जीसीसी महासचिव ने कई अन्य बिंदुओं के महत्व पर भी जोर दिया, जिनका उल्लेख एसपीए की रिपोर्ट में किया गया है। उन्होंने बताया कि जीसीसी देश वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अपनी भूमिका को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। बैठक में समिति के सदस्यों ने भी अपने विचार रखे और आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

क्या खाड़ी देशों के ऊर्जा भंडार और उत्पादन के ये आंकड़े वैश्विक बाजार में उनकी स्थिति को और मजबूत करते हैं? अलबुदैवी ने कहा कि 518 अरब बैरल से अधिक के कच्चे तेल भंडार और 44 ट्रिलियन घन मीटर से अधिक के प्राकृतिक गैस भंडार जीसीसी देशों की संसाधन क्षमता को दर्शाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 16 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक का कच्चा तेल उत्पादन और लगभग 461 अरब घन मीटर का विपणन योग्य प्राकृतिक गैस उत्पादन इन देशों की प्रबंधन दक्षता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में उनकी भूमिका को उजागर करता है।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे बहरीन के तेल और पर्यावरण मंत्री डॉ. मोहम्मद बिन मुबारक बिन दैना ने भी बैठक में अपनी भूमिका निभाई। वे जलवायु मामलों के विशेष दूत भी हैं और वर्तमान सत्र के अध्यक्ष हैं। बैठक में समिति के सदस्यों ने भाग लिया और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

क्या ऊर्जा पारगमन मार्गों में व्यवधान जीसीसी देशों के लिए समन्वय बढ़ाने का संकेत हैं? अलबुदैवी ने कहा कि इन व्यवधानों से आपूर्ति की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए जीसीसी समन्वय को ऊंचा उठाने की आवश्यकता स्पष्ट होती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा संक्रमण के प्रति संतुलित और यथार्थवादी दृष्टिकोण बनाए रखना जरूरी है, जिसमें आपूर्ति सुरक्षा और बाजार स्थिरता के साथ-साथ स्थिरता और उन्नत प्रौद्योगिकियों में निवेश पर ध्यान दिया जाए।

जीसीसी महासचिव ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि जीसीसी देश ऊर्जा निर्यात मार्गों में विविधता लाने और आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इससे जीसीसी ऊर्जा प्रणाली की लचीलापन बढ़ती है और तेज वैश्विक बदलावों का सामना करने की तैयारी मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा अब केवल उत्पादन क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हर परिस्थिति में आपूर्ति के प्रवाह और उसकी निरंतरता सुनिश्चित करना भी शामिल है।

क्या जीसीसी देशों की ऊर्जा नीति वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं के बीच एक स्थिर आधार प्रदान कर सकती है? अलबुदैवी ने कहा कि 2025 के संकेतक जीसीसी देशों की वैश्विक ऊर्जा बाजारों में प्रमुख स्थिति को दर्शाते हैं। उन्होंने कच्चे तेल के भंडार, प्राकृतिक गैस के भंडार, कच्चे तेल के उत्पादन और विपणन योग्य प्राकृतिक गैस के उत्पादन के आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े खाड़ी के संसाधनों की ताकत और पैमाने तथा उनके प्रबंधन की दक्षता को दर्शाते हैं।

बैठक में समिति के सदस्यों ने भाग लिया और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की। बहरीन के तेल और पर्यावरण मंत्री डॉ. मोहम्मद बिन मुबारक बिन दैना ने बैठक की अध्यक्षता की। वे जलवायु मामलों के विशेष दूत भी हैं और वर्तमान सत्र के अध्यक्ष हैं। बैठक मनामा में आयोजित हुई।

क्या ऊर्जा संक्रमण के प्रति संतुलित दृष्टिकोण आपूर्ति सुरक्षा और स्थिरता दोनों को साध सकता है? अलबुदैवी ने कहा कि ऊर्जा संक्रमण के प्रति संतुलित और यथार्थवादी दृष्टिकोण बनाए रखना आवश्यक है, जिसमें आपूर्ति सुरक्षा और बाजार स्थिरता को बनाए रखते हुए स्थिरता और उन्नत प्रौद्योगिकियों में निवेश को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा पारगमन मार्गों और समुद्री गलियारों में व्यवधान जीसीसी समन्वय को बढ़ाने की आवश्यकता को पुष्ट करते हैं।

जीसीसी महासचिव ने कहा कि जीसीसी देश वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और बाजार स्थिरता बनाए रखने में केंद्रीय जिम्मेदारी निभाते हैं। उन्होंने कहा कि 518 अरब बैरल से अधिक के कच्चे तेल भंडार और 44 ट्रिलियन घन मीटर से अधिक के प्राकृतिक गैस भंडार इन देशों की संसाधन क्षमता को दर्शाते हैं। इसके साथ ही 16 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक का कच्चा तेल उत्पादन और लगभग 461 अरब घन मीटर का विपणन योग्य प्राकृतिक गैस उत्पादन इन देशों की प्रबंधन दक्षता को उजागर करता है।

क्या जीसीसी देशों का यह समन्वय वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को अधिक लचीला बना सकता है? अलबुदैवी ने कहा कि जीसीसी देश ऊर्जा निर्यात मार्गों में विविधता लाने और आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता सुनिश्चित करने पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इससे जीसीसी ऊर्जा प्रणाली की लचीलापन बढ़ती है और तेज वैश्विक बदलावों का सामना करने की तैयारी मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा अब केवल उत्पादन क्षमता तक सीमित नहीं है।

बैठक में समिति के सदस्यों ने भाग लिया और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। बहरीन के तेल और पर्यावरण मंत्री डॉ. मोहम्मद बिन मुबारक बिन दैना ने बैठक की अध्यक्षता की। वे जलवायु मामलों के विशेष दूत भी हैं और वर्तमान सत्र के अध्यक्ष हैं। बैठक मनामा में आयोजित हुई।

जीसीसी महासचिव ने कहा कि 2025 के संकेतक जीसीसी देशों की वैश्विक ऊर्जा बाजारों में प्रमुख स्थिति को दर्शाते हैं। उन्होंने कच्चे तेल के भंडार, प्राकृतिक गैस के भंडार, कच्चे तेल के उत्पादन और विपणन योग्य प्राकृतिक गैस के उत्पादन के आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े खाड़ी के संसाधनों की ताकत और पैमाने तथा उनके प्रबंधन की दक्षता को दर्शाते हैं, साथ ही वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और बाजार स्थिरता बनाए रखने में जीसीसी देशों की केंद्रीय जिम्मेदारी को भी रेखांकित करते हैं।

एसपीए की रिपोर्ट में बैठक के दौरान हुई चर्चाओं के विस्तृत विवरण, समिति के सदस्यों के नाम, या आगामी कदमों की समय-सारणी नहीं दी गई है। रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि ऊर्जा निर्यात मार्गों में विविधता लाने के लिए कौन-से विशिष्ट कदम उठाए जा रहे हैं या आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता के लिए कौन-सी परियोजनाएं चल रही हैं।

जीसीसी पेट्रोलियम सहयोग समिति की 37वीं बैठक कहाँ और कब हुई? बैठक मनामा में 5 अक्टूबर 2026 को हुई। इसकी अध्यक्षता बहरीन के तेल और पर्यावरण मंत्री तथा जलवायु मामलों के विशेष दूत डॉ. मोहम्मद बिन मुबारक बिन दैना ने की, जो वर्तमान सत्र के अध्यक्ष भी हैं। बैठक में समिति के सदस्यों ने भाग लिया। एसपीए ने यह जानकारी दी।

अलबुदैवी ने ऊर्जा सुरक्षा के बारे में क्या कहा? जीसीसी महासचिव जासिम अलबुदैवी ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा अब केवल उत्पादन क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हर परिस्थिति में आपूर्ति के प्रवाह और उसकी निरंतरता सुनिश्चित करना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि जीसीसी देश ऊर्जा निर्यात मार्गों में विविधता लाने और आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता सुनिश्चित करने पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

2025 के ऊर्जा संकेतक क्या दर्शाते हैं? अलबुदैवी ने बताया कि 2025 के संकेतक जीसीसी देशों की वैश्विक ऊर्जा बाजारों में प्रमुख स्थिति को दर्शाते हैं। कच्चे तेल के भंडार 518 अरब बैरल से अधिक और प्राकृतिक गैस के भंडार 44 ट्रिलियन घन मीटर से अधिक अनुमानित हैं। कच्चे तेल का उत्पादन 16 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक रहा और विपणन योग्य प्राकृतिक गैस का उत्पादन लगभग 461 अरब घन मीटर तक पहुंचा।

ऊर्जा पारगमन मार्गों में व्यवधानों पर क्या कहा गया? अलबुदैवी ने कहा कि कई ऊर्जा पारगमन मार्गों और समुद्री गलियारों में व्यवधान इस बात की पुष्टि करते हैं कि आपूर्ति की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए जीसीसी समन्वय को बढ़ाना आवश्यक है। यह ऊर्जा संक्रमण के प्रति संतुलित और यथार्थवादी दृष्टिकोण बनाए रखने के साथ-साथ होता है, जिसमें आपूर्ति सुरक्षा और बाजार स्थिरता को बनाए रखते हुए स्थिरता और उन्नत प्रौद्योगिकियों में निवेश को आगे बढ़ाया जाता है।

ऊर्जा संक्रमण के प्रति जीसीसी का दृष्टिकोण क्या है? अलबुदैवी ने कहा कि ऊर्जा संक्रमण के प्रति संतुलित और यथार्थवादी दृष्टिकोण बनाए रखना आवश्यक है। इसमें आपूर्ति सुरक्षा और बाजार स्थिरता को बनाए रखते हुए स्थिरता और उन्नत प्रौद्योगिकियों में निवेश को आगे बढ़ाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा पारगमन मार्गों और समुद्री गलियारों में व्यवधान जीसीसी समन्वय को बढ़ाने की आवश्यकता को पुष्ट करते हैं।

वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में जीसीसी देशों की क्या भूमिका है? अलबुदैवी ने कहा कि जीसीसी देश वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और बाजार स्थिरता बनाए रखने में केंद्रीय जिम्मेदारी निभाते हैं। उन्होंने कहा कि 518 अरब बैरल से अधिक के कच्चे तेल भंडार और 44 ट्रिलियन घन मीटर से अधिक के प्राकृतिक गैस भंडार इन देशों की संसाधन क्षमता को दर्शाते हैं। इसके साथ ही 16 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक का कच्चा तेल उत्पादन और लगभग 461 अरब घन मीटर का विपणन योग्य प्राकृतिक गैस उत्पादन इन देशों की प्रबंधन दक्षता को उजागर करता है।