कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में आयोजित चौथा आसियान खैर उम्माह सम्मेलन अपने पहले दिन के पांचवें सत्र के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन का आयोजन सऊदी अरब के इस्लामी मामलों, दावा और मार्गदर्शन मंत्रालय ने किया है।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 5 अक्टूबर 2026 को बताया, सम्मेलन में सऊदी अरब और आसियान सदस्य देशों के विद्वान, अधिकारी और इस्लामी हस्तियां एक साथ आई हैं। पहले दिन का अंतिम सत्र सरकारों और उनकी संस्थाओं की उस भूमिका की जांच करने पर केंद्रित रहा, जो मध्यम मार्ग को बढ़ावा देती है और समुदायों को चरमपंथी विचारों से बचाती है।
शिक्षा और धार्मिक संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा
सत्र में इस बात पर भी चर्चा हुई कि शैक्षिक और धार्मिक संस्थाएं मध्यम मार्ग की संस्कृति को कैसे पोषित करती हैं और साथ ही सहअस्तित्व तथा सामाजिक स्थिरता को कैसे मजबूत करती हैं। प्रतिभागियों ने इस संदर्भ में देखा कि संस्थाएं केवल नीति नहीं बनातीं, बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार और सोच के ढांचे को भी आकार देती हैं।
क्या यह सोचने का समय नहीं है कि शिक्षा और धार्मिक संवाद किस तरह एक साथ मिलकर समाज को चरमपंथ से दूर रख सकते हैं? चर्चा में यह रेखांकित किया गया कि मध्यम मार्ग को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उसे संस्थागत अभ्यास में उतारना होगा।
सत्र में सऊदी अरब के प्रयासों को उजागर किया गया, जो मध्यम दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं। सऊदी अरब के अनुभव को राज्य संस्थाओं और मंत्रालयों के निर्माण के एक व्यावहारिक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस अनुभव में शिक्षा, धार्मिक प्रचार और संवाद में मध्यम मार्ग को बढ़ावा देना शामिल है।
इस दृष्टिकोण के घटकों में राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना, चरमपंथ और वैचारिक विचलन का मुकाबला करना तथा जागरूकता बढ़ाना और आलोचनात्मक सोच को पोषित करना शामिल है। क्या इन उपायों के बिना एक सामंजस्यपूर्ण समाज की कल्पना की जा सकती है? एसपीए के अनुसार, ये उपाय मिलकर एक ऐसे सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण में सहायक हैं जो मध्यम मार्ग और मजबूत वैचारिक प्रतिरोधक क्षमता से युक्त हो।
सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि राज्यों और उनकी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है ऐसी प्रथाओं को स्थापित करने में जो समुदायों की रक्षा करती हैं और वैचारिक सुरक्षा, शांति तथा सहअस्तित्व को मजबूत करती हैं। प्रतिभागियों ने यह भी देखा कि संस्थाओं का यह दायित्व केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा और संवाद के माध्यम से सोच को दिशा देने तक फैला हुआ है।
क्या सरकारें और उनकी संस्थाएं समुदायों को चरमपंथी विचारों से बचाने में अपनी भूमिका को और स्पष्ट रूप से परिभाषित कर सकती हैं? यह प्रश्न इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि सम्मेलन में सऊदी अरब और आसियान सदस्य देशों के विद्वान, अधिकारी और इस्लामी हस्तियां एक साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं।
पहले दिन का यह अंतिम सत्र पांचवां सत्र था, जिसके साथ दिन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। सम्मेलन का आयोजन सऊदी अरब के इस्लामी मामलों, दावा और मार्गदर्शन मंत्रालय द्वारा कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में किया जा रहा है।
सत्र में यह भी सामने आया कि शैक्षिक और धार्मिक संस्थाएं मध्यम मार्ग की संस्कृति को कैसे पोषित कर सकती हैं और सहअस्तित्व तथा सामाजिक स्थिरता को कैसे मजबूत कर सकती हैं। क्या संस्थाओं के भीतर और बाहर संवाद की एक सतत प्रक्रिया आवश्यक नहीं है? यह चर्चा इस विचार पर केंद्रित रही कि मध्यम मार्ग को व्यवहार में उतारने के लिए शिक्षा, धार्मिक प्रचार और संवाद तीनों में समानांतर प्रयास चाहिए।
सऊदी अरब के अनुभव को एक व्यावहारिक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करते हुए सत्र में यह बताया गया कि राज्य संस्थाओं और मंत्रालयों का निर्माण किस तरह मध्यम दृष्टिकोण को संस्थागत आधार देता है। इस अनुभव में शिक्षा, धार्मिक प्रचार और संवाद में मध्यम मार्ग को बढ़ावा देना, राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना, चरमपंथ और वैचारिक विचलन का मुकाबला करना तथा जागरूकता बढ़ाना और आलोचनात्मक सोच को पोषित करना शामिल है।
क्या आलोचनात्मक सोच को पोषित किए बिना वैचारिक प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण संभव है? सत्र में यह स्वीकार किया गया कि ये सभी उपाय मिलकर ही एक सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण में सहायक होते हैं, जो मध्यम मार्ग और मजबूत वैचारिक प्रतिरोधक क्षमता से युक्त हो।
सत्र में राज्यों और उनकी संस्थाओं की उस भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया जो समुदायों की रक्षा करने वाली प्रथाओं को स्थापित करती है और वैचारिक सुरक्षा, शांति तथा सहअस्तित्व को मजबूत करती है। क्या यह भूमिका केवल नीति निर्माताओं की है या शिक्षकों, धार्मिक विद्वानों और समुदायों के नेताओं की भी है? चर्चा में यह स्पष्ट हुआ कि संस्थाओं का काम केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि उन नियमों को व्यवहार में उतारना भी है।
सम्मेलन में सऊदी अरब और आसियान सदस्य देशों के विद्वान, अधिकारी और इस्लामी हस्तियां एक साथ आए हैं। पहले दिन के पांचवें सत्र के साथ दिन का कार्यक्रम समाप्त हुआ। एसपीए की खबर में सम्मेलन के आगामी सत्रों के विषय, प्रतिभागियों की संख्या या किसी अन्य कार्यक्रम का विवरण नहीं दिया गया है।
चौथा आसियान खैर उम्माह सम्मेलन कहां और किसने आयोजित किया? सम्मेलन कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में आयोजित किया गया है और इसका आयोजन सऊदी अरब के इस्लामी मामलों, दावा और मार्गदर्शन मंत्रालय ने किया है। एसपीए के अनुसार, सम्मेलन में सऊदी अरब और आसियान सदस्य देशों के विद्वान, अधिकारी और इस्लामी हस्तियां एक साथ आई हैं।
पहले दिन के अंतिम सत्र में क्या चर्चा हुई? पहले दिन का अंतिम सत्र सरकारों और उनकी संस्थाओं की उस भूमिका की जांच करने पर केंद्रित रहा, जो मध्यम मार्ग को बढ़ावा देती है और समुदायों को चरमपंथी विचारों से बचाती है। सत्र में शैक्षिक और धार्मिक संस्थाओं की उस भूमिका पर भी चर्चा हुई जो मध्यम मार्ग की संस्कृति को पोषित करती हैं और सहअस्तित्व तथा सामाजिक स्थिरता को मजबूत करती हैं।
सऊदी अरब के अनुभव को किस रूप में प्रस्तुत किया गया? चर्चा में सऊदी अरब के प्रयासों को उजागर किया गया और राज्य संस्थाओं तथा मंत्रालयों के निर्माण के अनुभव को एक व्यावहारिक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस दृष्टिकोण में शिक्षा, धार्मिक प्रचार और संवाद में मध्यम मार्ग को बढ़ावा देना, राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना, चरमपंथ और वैचारिक विचलन का मुकाबला करना तथा जागरूकता बढ़ाना और आलोचनात्मक सोच को पोषित करना शामिल है।
सत्र में राज्यों और संस्थाओं की क्या भूमिका रेखांकित की गई? सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि राज्यों और उनकी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है ऐसी प्रथाओं को स्थापित करने में जो समुदायों की रक्षा करती हैं और वैचारिक सुरक्षा, शांति तथा सहअस्तित्व को मजबूत करती हैं। एसपीए के अनुसार, ये उपाय मिलकर एक सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण में सहायक हैं जो मध्यम मार्ग और मजबूत वैचारिक प्रतिरोधक क्षमता से युक्त हो।
सम्मेलन के पहले दिन का समापन किस सत्र के साथ हुआ? सम्मेलन के पहले दिन का समापन उसके पांचवें सत्र के साथ हुआ, जो दिन का अंतिम सत्र था। एसपीए की खबर के अनुसार, इसी सत्र में सरकारों और उनकी संस्थाओं की भूमिका तथा शैक्षिक और धार्मिक संस्थाओं के प्रभाव पर चर्चा हुई। खबर में सम्मेलन के आगामी सत्रों के विषय या प्रतिभागियों की संख्या का विवरण नहीं दिया गया है।