Monday, October 19, 2026
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जी20 इंटरफेथ फोरम में एमडब्ल्यूएल प्रमुख डॉ. अल-ईसा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल

जी20 इंटरफेथ फोरम में एमडब्ल्यूएल प्रमुख डॉ. अल-ईसा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल

अमेरिका के यूटा राज्य में आयोजित इस वर्ष के जी20 इंटरफेथ फोरम में मुस्लिम वर्ल्ड लीग (एमडब्ल्यूएल) के महासचिव और ऑर्गनाइजेशन ऑफ मुस्लिम स्कॉलर्स के अध्यक्ष शेख डॉ. मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-ईसा ने विशिष्ट अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। यह फोरम अमेरिका में हो रहे जी20 समिट के साथ तालमेल बिठाते हुए आयोजित किया गया था।

जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 18 अक्टूबर 2026 को बताया, डॉ. अल-ईसा ने फोरम के दौरान वैश्विक शांति और सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देने में धर्मों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बात की। उन्होंने हर रूप में ध्रुवीकरण के खतरों और इससे उत्पन्न होने वाले संकटों के प्रति आगाह किया।

डॉ. अल-ईसा ने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक नेताओं की एक विशेष जिम्मेदारी है, क्योंकि ध्रुवीकरण, उकसावे और हिंसा अक्सर विकृत धार्मिक विमर्श का सहारा लेते हैं। क्या धार्मिक नेताओं की यह जिम्मेदारी आज के दौर में पहले से कहीं अधिक बड़ी नहीं हो गई है?

उन्होंने इशारा किया कि एमडब्ल्यूएल ने राष्ट्रों और जनताओं के बीच विभाजन को पाटने में मदद करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में इसके सबसे प्रमुख प्रयासों में से एक «बिल्डिंग ब्रिजेज ऑफ अंडरस्टैंडिंग एंड पीस बिटवीन ईस्ट एंड वेस्ट» पहल है। इस पहल के लिए एक ऐतिहासिक सम्मेलन 2023 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित किया गया था, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के नेता तथा धार्मिक, बौद्धिक और शोध से जुड़ी हस्तियां शामिल हुई थीं।

क्या पूर्व और पश्चिम के बीच समझ और शांति के ऐसे पुल आज की ध्रुवीकृत दुनिया में और भी जरूरी नहीं हो गए हैं?

डॉ. अल-ईसा ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से लागू की गई कई मानवीय पहलों की भी समीक्षा की। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि दावोस में विश्व आर्थिक मंच ने अपने इतिहास में पहली बार विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के समाधान में धर्मों की भूमिका पर एक पैनल चर्चा की मेजबानी की। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सक्रिय और प्रभावशाली धार्मिक कूटनीति के महत्व की मान्यता को दर्शाता है।

क्या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर धर्मों की भूमिका पर होने वाली ऐसी चर्चाएं धार्मिक कूटनीति को एक नई पहचान नहीं दे रही हैं?

फोरम का आयोजन अमेरिका में हो रहे जी20 समिट के साथ तालमेल बिठाते हुए किया गया था। एसपीए के अनुसार, डॉ. अल-ईसा ने फोरम में विशिष्ट अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। उन्होंने धार्मिक नेताओं की विशेष जिम्मेदारी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ध्रुवीकरण, उकसावे और हिंसा अक्सर विकृत धार्मिक विमर्श का सहारा लेते हैं।

क्या धार्मिक विमर्श का दुरुपयोग रोकना धार्मिक नेताओं की सबसे बड़ी चुनौती नहीं है?

एमडब्ल्यूएल प्रमुख ने अपने संबोधन में संगठन के उन प्रयासों का जिक्र किया जो राष्ट्रों और जनताओं के बीच विभाजन को पाटने की दिशा में किए गए हैं। इनमें «बिल्डिंग ब्रिजेज ऑफ अंडरस्टैंडिंग एंड पीस बिटवीन ईस्ट एंड वेस्ट» पहल को सबसे प्रमुख बताया गया। इस पहल के तहत 2023 में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के नेताओं के साथ-साथ धार्मिक, बौद्धिक और शोध से जुड़ी हस्तियों ने भाग लिया था।

क्या संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच से जुड़ी ऐसी पहलें जमीन पर वास्तविक बदलाव ला पाती हैं?

डॉ. अल-ईसा ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से चलाई जा रही कई मानवीय पहलों की समीक्षा भी की। उन्होंने दावोस में विश्व आर्थिक मंच का उल्लेख किया, जहां अपने इतिहास में पहली बार विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के समाधान में धर्मों की भूमिका पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। उनके अनुसार, यह सक्रिय और प्रभावशाली धार्मिक कूटनीति के महत्व की मान्यता है।

क्या वैश्विक आर्थिक मंचों पर धर्मों की भूमिका पर चर्चा होना धार्मिक कूटनीति के बढ़ते प्रभाव का संकेत नहीं है?

एसपीए की रिपोर्ट के मुताबिक, फोरम में डॉ. अल-ईसा ने धर्मों की वैश्विक शांति और सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देने में भूमिका पर बात की और हर रूप में ध्रुवीकरण के खतरों के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक नेताओं की विशेष जिम्मेदारी है क्योंकि ध्रुवीकरण, उकसावे और हिंसा अक्सर विकृत धार्मिक विमर्श का सहारा लेते हैं।

क्या ध्रुवीकरण के खिलाफ धार्मिक नेताओं की एकजुट आवाज आज सबसे जरूरी नहीं है?

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एमडब्ल्यूएल ने राष्ट्रों और जनताओं के बीच विभाजन को पाटने में मदद करने के लिए काम किया है। इस संदर्भ में «बिल्डिंग ब्रिजेज ऑफ अंडरस्टैंडिंग एंड पीस बिटवीन ईस्ट एंड वेस्ट» पहल का विशेष उल्लेख किया गया, जिसका ऐतिहासिक सम्मेलन 2023 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुआ था।

क्या पूर्व और पश्चिम के बीच संवाद की ऐसी पहलें आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी ढांचा बना पाएंगी?

एसपीए के अनुसार, डॉ. अल-ईसा ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से लागू मानवीय पहलों की समीक्षा की और दावोस में विश्व आर्थिक मंच द्वारा पहली बार धर्मों की भूमिका पर आयोजित पैनल चर्चा का जिक्र किया। उन्होंने इसे सक्रिय और प्रभावशाली धार्मिक कूटनीति के महत्व की मान्यता बताया।

क्या धार्मिक कूटनीति को वैश्विक नीति-निर्माण का स्थायी हिस्सा बनाने का समय आ गया है?

एसपीए की इस विज्ञप्ति में फोरम में शामिल अन्य प्रतिभागियों के नाम, फोरम के सत्रों की संख्या, डॉ. अल-ईसा के संबोधन की अवधि, या फोरम में लिए गए किसी निर्णय का उल्लेख नहीं है। रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि फोरम में कितने देशों या संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

जी20 इंटरफेथ फोरम में मुस्लिम वर्ल्ड लीग के महासचिव की क्या भूमिका रही? एसपीए के अनुसार, मुस्लिम वर्ल्ड लीग (एमडब्ल्यूएल) के महासचिव और ऑर्गनाइजेशन ऑफ मुस्लिम स्कॉलर्स के अध्यक्ष शेख डॉ. मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-ईसा ने इस वर्ष के जी20 इंटरफेथ फोरम में विशिष्ट अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। फोरम अमेरिका के यूटा राज्य में आयोजित किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह आयोजन अमेरिका में हो रहे जी20 समिट के साथ तालमेल बिठाते हुए किया गया था।

डॉ. अल-ईसा ने फोरम में किन मुद्दों पर बात की? एसपीए के अनुसार, डॉ. अल-ईसा ने वैश्विक शांति और सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देने में धर्मों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बात की। उन्होंने हर रूप में ध्रुवीकरण के खतरों और इससे उत्पन्न संकटों के प्रति आगाह किया। उन्होंने जोर दिया कि धार्मिक नेताओं की विशेष जिम्मेदारी है, क्योंकि ध्रुवीकरण, उकसावे और हिंसा अक्सर विकृत धार्मिक विमर्श का सहारा लेते हैं।

«बिल्डिंग ब्रिजेज ऑफ अंडरस्टैंडिंग एंड पीस बिटवीन ईस्ट एंड वेस्ट» पहल क्या है? एसपीए के मुताबिक, डॉ. अल-ईसा ने बताया कि एमडब्ल्यूएल ने राष्ट्रों और जनताओं के बीच विभाजन को पाटने में मदद करने का काम किया है। इस दिशा में सबसे प्रमुख प्रयासों में «बिल्डिंग ब्रिजेज ऑफ अंडरस्टैंडिंग एंड पीस बिटवीन ईस्ट एंड वेस्ट» पहल शामिल है। इस पहल का एक ऐतिहासिक सम्मेलन 2023 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित हुआ था, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के नेता तथा धार्मिक, बौद्धिक और शोध से जुड़ी हस्तियां शामिल हुई थीं।

डॉ. अल-ईसा ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच के संदर्भ में क्या कहा? एसपीए के अनुसार, डॉ. अल-ईसा ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से लागू की गई कई मानवीय पहलों की समीक्षा की। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि दावोस में विश्व आर्थिक मंच ने अपने इतिहास में पहली बार विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के समाधान में धर्मों की भूमिका पर एक पैनल चर्चा की मेजबानी की। उन्होंने कहा कि यह सक्रिय और प्रभावशाली धार्मिक कूटनीति के महत्व की मान्यता को दर्शाता है।

जी20 इंटरफेथ फोरम का आयोजन कहां और किस अवसर पर हुआ? एसपीए के मुताबिक, इस वर्ष का जी20 इंटरफेथ फोरम अमेरिका के यूटा राज्य में आयोजित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इसका आयोजन अमेरिका में हो रहे जी20 समिट के साथ तालमेल बिठाते हुए किया गया था। एसपीए ने यह जानकारी 18 अक्टूबर 2026 को जारी की। रिपोर्ट में फोरम में शामिल अन्य प्रतिभागियों या सत्रों की संख्या का उल्लेख नहीं है।

एसपीए की रिपोर्ट में क्या जानकारी नहीं दी गई है? एसपीए की इस विज्ञप्ति में फोरम में शामिल अन्य प्रतिभागियों के नाम, फोरम के सत्रों की संख्या, डॉ. अल-ईसा के संबोधन की अवधि, या फोरम में लिए गए किसी निर्णय का उल्लेख नहीं है। रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि फोरम में कितने देशों या संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। रिपोर्ट में केवल डॉ. अल-ईसा की भागीदारी और उनके संबोधन के मुख्य बिंदु दिए गए हैं।