जेद्दा में 21 अक्टूबर 2026 को “क्षेत्रीय जलवायु सेवाएं: सहयोग मजबूत करना और क्षमता निर्माण” शीर्षक से एक वर्चुअल कार्यशाला आयोजित की गई, जिसे मध्य पूर्व ग्रीन इनिशिएटिव के महासचिवालय ने राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के सहयोग से आयोजित किया। राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का प्रतिनिधित्व क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र ने किया।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के सीईओ डॉ. अयमान गुलाम ने इस अवसर पर क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने, विशेषज्ञता और ज्ञान का आदान-प्रदान करने तथा जलवायु सेवाओं को विकसित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये प्रयास राष्ट्रीय नीतियों, रणनीतियों और अनुकूलन योजनाओं को समर्थन देते हैं तथा जलवायु लचीलापन बनाने में मदद करते हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन के सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभाव कम होते हैं।
डॉ. गुलाम ने कहा कि सऊदी विजन 2030 के ढांचे के भीतर साम्राज्य ने सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव और मध्य पूर्व ग्रीन इनिशिएटिव के माध्यम से पर्यावरणीय नीतियों को विकास के मार्गों में एकीकृत करने का काम किया है। ये प्रयास पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, जैव विविधता संरक्षण, वृक्षारोपण और भूमि पुनर्वास कार्यक्रमों को समर्थन देते हैं।
उन्होंने समझाया कि महामहिम क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद द्वारा घोषित क्षेत्रीय केंद्र और कार्यक्रम पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की स्थिरता बढ़ाने के प्रमुख स्तंभों के रूप में कार्य करते हैं। इनमें क्षेत्रीय रेत और धूल तूफान केंद्र, क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र और क्षेत्रीय बादल बीजन कार्यक्रम शामिल हैं। इनकी वैज्ञानिक, शोध, परिचालन और समन्वय गतिविधियां इन उद्देश्यों को प्राप्त करने में योगदान देती हैं।
डॉ. गुलाम ने आगे बताया कि 2023 में अपनी स्थापना के बाद से क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इनमें विशेष जलवायु अध्ययन और विश्लेषण तैयार करना, निर्णय निर्माताओं के समर्थन के लिए डेटाबेस और संकेतक विकसित करना तथा स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को शामिल करते हुए वैज्ञानिक बैठकों और कार्यशालाओं का आयोजन करना शामिल है। केंद्र ने सहयोग को भी मजबूत किया है।
यह कार्यशाला ऐसे समय में हुई जब क्षेत्र के देश जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अपनी क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। क्या क्षेत्रीय सहयोग वास्तव में जलवायु सेवाओं को उस स्तर तक पहुंचा सकता है जहां वे राष्ट्रीय नीतियों का आधार बन सकें? डॉ. गुलाम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सऊदी अरब अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में काम कर रहा है।
सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव और मध्य पूर्व ग्रीन इनिशिएटिव के तहत साम्राज्य पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, जैव विविधता संरक्षण, वृक्षारोपण और भूमि पुनर्वास जैसे कार्यक्रमों पर काम कर रहा है। क्या इन पहलों के परिणाम जलवायु सेवाओं के बिना मापे जा सकते हैं? जलवायु सेवाएं न केवल डेटा प्रदान करती हैं, बल्कि नीति निर्माताओं को सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाती हैं, जिससे अनुकूलन योजनाएं अधिक प्रभावी हो सकती हैं।
क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र की स्थापना 2023 में हुई थी और तब से यह विशेष जलवायु अध्ययन और विश्लेषण तैयार करने, डेटाबेस और संकेतक विकसित करने तथा विशेषज्ञ बैठकों के आयोजन में लगा हुआ है। क्या ये प्रयास क्षेत्र के देशों को जलवायु जोखिमों के प्रति अधिक तैयार कर पाए हैं? केंद्र का काम निर्णय निर्माताओं के लिए विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराने पर केंद्रित है, जिससे वे अपनी रणनीतियों और अनुकूलन योजनाओं को बेहतर ढंग से आकार दे सकें।
डॉ. गुलाम ने क्षेत्रीय केंद्रों और कार्यक्रमों को पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की स्थिरता बढ़ाने के प्रमुख स्तंभ बताया। इनमें रेत और धूल तूफान केंद्र, जलवायु परिवर्तन केंद्र और बादल बीजन कार्यक्रम शामिल हैं। क्या रेत और धूल तूफानों जैसी सीमा-पार समस्याओं का समाधान क्षेत्रीय सहयोग के बिना संभव है? ये केंद्र अपनी वैज्ञानिक, शोध, परिचालन और समन्वय गतिविधियों के माध्यम से इन चुनौतियों का सामना करने में योगदान देते हैं।
कार्यशाला का आयोजन मध्य पूर्व ग्रीन इनिशिएटिव के महासचिवालय ने राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के सहयोग से किया, जिसका प्रतिनिधित्व क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र ने किया। यह वर्चुअल आयोजन था, जो दर्शाता है कि क्षेत्रीय सहयोग के लिए भौगोलिक दूरी बाधा नहीं है। क्या वर्चुअल मंच क्षेत्रीय जलवायु सहयोग को उतनी ही गहराई दे सकते हैं जितनी आमने-सामने की बैठकें? डॉ. गुलाम ने विशेषज्ञता और ज्ञान के आदान-प्रदान पर जोर दिया, जो ऐसे मंचों का केंद्रीय उद्देश्य है।
सऊदी विजन 2030 के तहत पर्यावरणीय नीतियों को विकास के मार्गों में एकीकृत करने का काम सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव और मध्य पूर्व ग्रीन इनिशिएटिव के जरिए हो रहा है। क्या विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाना वास्तव में संभव है? डॉ. गुलाम के अनुसार, ये प्रयास पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, जैव विविधता संरक्षण, वृक्षारोपण और भूमि पुनर्वास को समर्थन देते हैं, जो जलवायु लचीलापन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
जलवायु सेवाओं का विकास राष्ट्रीय नीतियों, रणनीतियों और अनुकूलन योजनाओं को समर्थन देने के लिए किया जा रहा है। डॉ. गुलाम ने कहा कि इन प्रयासों से जलवायु परिवर्तन के सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है। क्या जलवायु सेवाएं नीति निर्माताओं के लिए निर्णय लेने का आधार बन सकती हैं? क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र द्वारा तैयार किए जा रहे डेटाबेस और संकेतक इसी दिशा में एक प्रयास हैं।
2023 में स्थापित क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र ने विशेष जलवायु अध्ययन और विश्लेषण तैयार किए हैं, डेटाबेस और संकेतक विकसित किए हैं, और स्थानीय तथा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ वैज्ञानिक बैठकों और कार्यशालाओं का आयोजन किया है। क्या इन गतिविधियों से क्षेत्र के देशों की जलवायु अनुकूलन क्षमता में वास्तविक वृद्धि हुई है? केंद्र ने सहयोग को भी मजबूत किया है, जो क्षेत्रीय स्तर पर ज्ञान साझा करने के लिए आवश्यक है।
डॉ. गुलाम ने क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद द्वारा घोषित क्षेत्रीय केंद्रों और कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जो पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की स्थिरता बढ़ाने के स्तंभ हैं। इनमें रेत और धूल तूफान केंद्र, जलवायु परिवर्तन केंद्र और बादल बीजन कार्यक्रम शामिल हैं। क्या ये केंद्र क्षेत्रीय स्तर पर जलवायु चुनौतियों का समाधान देने में सक्षम होंगे? इनकी गतिविधियां वैज्ञानिक, शोध, परिचालन और समन्वय के क्षेत्रों में फैली हुई हैं।
कार्यशाला का शीर्षक “क्षेत्रीय जलवायु सेवाएं: सहयोग मजबूत करना और क्षमता निर्माण” था, जो इस बात पर केंद्रित था कि क्षेत्रीय सहयोग और क्षमता निर्माण कैसे जलवायु सेवाओं को मजबूत कर सकते हैं। क्या क्षमता निर्माण के बिना क्षेत्रीय सहयोग प्रभावी हो सकता है? डॉ. गुलाम ने विशेषज्ञता और ज्ञान के आदान-प्रदान को इस प्रक्रिया का केंद्रीय तत्व बताया, जिससे राष्ट्रीय नीतियों और अनुकूलन योजनाओं को समर्थन मिलता है।
सऊदी अरब ने सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव और मध्य पूर्व ग्रीन इनिशिएटिव के माध्यम से पर्यावरणीय नीतियों को विकास के मार्गों में एकीकृत करने का काम किया है। ये प्रयास पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, जैव विविधता संरक्षण, वृक्षारोपण और भूमि पुनर्वास जैसे कार्यक्रमों को समर्थन देते हैं। क्या इन कार्यक्रमों के परिणाम दीर्घकालिक होंगे? जलवायु लचीलापन बनाने के लिए यह आवश्यक है कि जलवायु सेवाएं नीति निर्माण का हिस्सा बनें, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम किया जा सके।
डॉ. गुलाम ने कहा कि जलवायु सेवाओं का विकास राष्ट्रीय नीतियों, रणनीतियों और अनुकूलन योजनाओं को समर्थन देता है और जलवायु लचीलापन बनाने में मदद करता है। क्या क्षेत्रीय सहयोग के बिना जलवायु सेवाएं प्रभावी हो सकती हैं? उन्होंने सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभावों को कम करने की बात कही, जो जलवायु परिवर्तन के बहुआयामी प्रभावों को दर्शाती है।
क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र ने 2023 से अब तक विशेष जलवायु अध्ययन और विश्लेषण तैयार किए हैं, डेटाबेस और संकेतक विकसित किए हैं, और विशेषज्ञ बैठकों तथा कार्यशालाओं का आयोजन किया है। क्या ये गतिविधियां निर्णय निर्माताओं के लिए पर्याप्त हैं? केंद्र ने सहयोग को मजबूत किया है, जो क्षेत्रीय स्तर पर जलवायु कार्रवाई को गति देने में सहायक है।
एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि कार्यशाला में कितने देशों या विशेषज्ञों ने भाग लिया, किन ठोस निर्णयों पर सहमति बनी, या आगे कौन-से कदम उठाए जाएंगे। रिपोर्ट में क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र की भविष्य की योजनाओं या समय-सारणी का भी उल्लेख नहीं है।
कार्यशाला का आयोजन किसने किया और कहां हुआ? कार्यशाला का आयोजन मध्य पूर्व ग्रीन इनिशिएटिव के महासचिवालय ने राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के सहयोग से किया, जिसका प्रतिनिधित्व क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र ने किया। यह 21 अक्टूबर 2026 को जेद्दा में वर्चुअल रूप से आयोजित हुई। कार्यशाला का शीर्षक “क्षेत्रीय जलवायु सेवाएं: सहयोग मजबूत करना और क्षमता निर्माण” था। एसपीए के अनुसार, इसमें क्षेत्रीय सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान पर चर्चा हुई।
डॉ. अयमान गुलाम ने किन बिंदुओं पर जोर दिया? राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के सीईओ डॉ. अयमान गुलाम ने क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने, विशेषज्ञता और ज्ञान का आदान-प्रदान करने तथा जलवायु सेवाओं को विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये प्रयास राष्ट्रीय नीतियों, रणनीतियों और अनुकूलन योजनाओं को समर्थन देते हैं। इससे जलवायु लचीलापन बनाने में मदद मिलती है और जलवायु परिवर्तन के सामाजिक, पर्यावरणीय तथा आर्थिक प्रभाव कम होते हैं।
सऊदी विजन 2030 के तहत पर्यावरणीय नीतियों को कैसे एकीकृत किया जा रहा है? डॉ. गुलाम के अनुसार, सऊदी विजन 2030 के ढांचे के भीतर साम्राज्य ने सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव और मध्य पूर्व ग्रीन इनिशिएटिव के माध्यम से पर्यावरणीय नीतियों को विकास के मार्गों में एकीकृत किया है। ये प्रयास पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, जैव विविधता संरक्षण, वृक्षारोपण और भूमि पुनर्वास कार्यक्रमों को समर्थन देते हैं। इससे पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की स्थिरता बढ़ाने में मदद मिलती है।
क्राउन प्रिंस द्वारा घोषित क्षेत्रीय केंद्र और कार्यक्रम कौन-से हैं? डॉ. गुलाम ने बताया कि क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद द्वारा घोषित क्षेत्रीय केंद्र और कार्यक्रम पर्यावरण तथा प्राकृतिक संसाधनों की स्थिरता बढ़ाने के स्तंभ हैं। इनमें क्षेत्रीय रेत और धूल तूफान केंद्र, क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र और क्षेत्रीय बादल बीजन कार्यक्रम शामिल हैं। इनकी वैज्ञानिक, शोध, परिचालन और समन्वय गतिविधियां इन उद्देश्यों को प्राप्त करने में योगदान देती हैं।
क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र ने 2023 से क्या उपलब्धियां हासिल की हैं? डॉ. गुलाम के अनुसार, 2023 में स्थापना के बाद से क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन केंद्र ने विशेष जलवायु अध्ययन और विश्लेषण तैयार किए हैं। इसने निर्णय निर्माताओं के समर्थन के लिए डेटाबेस और संकेतक विकसित किए हैं तथा स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को शामिल करते हुए वैज्ञानिक बैठकों और कार्यशालाओं का आयोजन किया है। केंद्र ने सहयोग को भी मजबूत किया है।
जलवायु सेवाओं का विकास किस प्रकार मदद करता है? डॉ. गुलाम ने कहा कि जलवायु सेवाओं का विकास राष्ट्रीय नीतियों, रणनीतियों और अनुकूलन योजनाओं को समर्थन देता है। इससे जलवायु लचीलापन बनाने में मदद मिलती है और जलवायु परिवर्तन के सामाजिक, पर्यावरणीय तथा आर्थिक प्रभाव कम होते हैं। क्षेत्रीय सहयोग और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान से ये सेवाएं अधिक प्रभावी बन सकती हैं। एसपीए की रिपोर्ट में कार्यशाला के ठोस नतीजों का उल्लेख नहीं है।