Thursday, October 15, 2026
सऊदी समाचार

ओआईसी ने इजरायली बस्तियों को वैध ठहराने के प्रयासों की निंदा की, जबरन विस्थापन की चेतावनी दी

ओआईसी ने इजरायली बस्तियों को वैध ठहराने के प्रयासों की निंदा की, जबरन विस्थापन की चेतावनी दी

जेद्दा में इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) ने इजरायली कैबिनेट द्वारा पश्चिमी तट की 13 अवैध बस्तियों को अलग करने की मंजूरी की कड़ी निंदा की है, जिसे उपनिवेशी बस्तियों के रूप में वैध ठहराने की तैयारी बताया गया। ओआईसी के अनुसार यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन है।

जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 24 मार्च 2025 को बताया, ओआईसी ने इस फैसले के बाद इजरायली वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच के चरमपंथी और नस्लवादी बयानों का भी उल्लेख किया, जिनमें इस कदम को पश्चिमी तट पर इजरायल की तथाकथित संप्रभुता थोपने की योजना का हिस्सा बताया गया।

ओआईसी ने “स्वैच्छिक प्रस्थान” के नाम पर फिलिस्तीनियों के विस्थापन के लिए एक विशेष इजरायली एजेंसी बनाए जाने के खतरे से आगाह किया। संगठन ने फिलिस्तीनी लोगों को उनकी भूमि के भीतर या बाहर, व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से विस्थापित करने, जबरन विस्थापन या निर्वासन के सभी इरादों को पूरी तरह खारिज किया और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन बताया।

क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तरह के कदमों को रोकने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने को तैयार है? ओआईसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आग्रह किया कि वह इजरायली अपराधों का सामना करने में अपनी जिम्मेदारियां पूरी करे। इन अपराधों में नरसंहार, अवैध बस्तियां, घरों को ध्वस्त करना, जबरन विस्थापन और संप्रभुता थोपने के प्रयास शामिल बताए गए।

संगठन ने प्रतिबंध लगाने और दो-राज्य समाधान का समर्थन करने की अपील की। ओआईसी का यह रुख ऐसे समय आया है जब पश्चिमी तट को लेकर तनाव बना हुआ है और बस्तियों के विस्तार तथा विस्थापन की योजनाओं पर चिंता जताई जा रही है।

क्या सुरक्षा परिषद प्रतिबंधों पर आगे बढ़ेगी? ओआईसी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वह फिलिस्तीनी लोगों के विस्थापन के किसी भी व्यक्तिगत या सामूहिक प्रयास को स्वीकार नहीं करता, चाहे वह उनकी भूमि के भीतर हो या बाहर। संगठन ने इसे जबरन विस्थापन या निर्वासन की श्रेणी में रखा और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।

एसपीए के अनुसार ओआईसी ने 13 बस्तियों को अलग करने की इजरायली कैबिनेट की मंजूरी को उपनिवेशी बस्तियों को वैध ठहराने की तैयारी कहा। संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन बताया। बयान में वित्त मंत्री स्मोट्रिच के बयानों का जिक्र करते हुए कहा गया कि वे पश्चिमी तट पर संप्रभुता थोपने की योजना का हिस्सा हैं।

क्या बस्तियों को वैध ठहराने की कोशिशें रुकेंगी? ओआईसी ने “स्वैच्छिक प्रस्थान” नामक एजेंसी के गठन के खतरे पर भी प्रकाश डाला और कहा कि वह फिलिस्तीनियों के विस्थापन की किसी भी योजना को पूरी तरह खारिज करता है। संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का उल्लंघन बताया।

ओआईसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायली अपराधों का सामना करने की अपील की, जिनमें नरसंहार, अवैध बस्तियां, घरों को ध्वस्त करना, जबरन विस्थापन और संप्रभुता के प्रयास शामिल हैं। संगठन ने प्रतिबंध लगाने और दो-राज्य समाधान का समर्थन करने पर जोर दिया।

क्या दो-राज्य समाधान को नई गति मिलेगी? एसपीए की रिपोर्ट के मुताबिक ओआईसी ने सुरक्षा परिषद से अपनी जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया। संगठन ने फिलिस्तीनी लोगों के विस्थापन को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन करार दिया।

बयान में यह भी कहा गया कि इजरायली कैबिनेट की मंजूरी के बाद स्मोट्रिच के बयान आए, जिन्हें ओआईसी ने चरमपंथी और नस्लवादी बताया। संगठन ने इसे पश्चिमी तट पर संप्रभुता थोपने की योजना का हिस्सा माना।

क्या प्रतिबंधों की मांग पर ठोस कार्रवाई होगी? ओआईसी ने कहा कि वह फिलिस्तीनियों के व्यक्तिगत या सामूहिक विस्थापन, जबरन विस्थापन या निर्वासन को पूरी तरह खारिज करता है। संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का उल्लंघन बताया।

एसपीए के अनुसार ओआईसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायली अपराधों का सामना करने और प्रतिबंध लगाने की अपील की। संगठन ने दो-राज्य समाधान का समर्थन किया। बयान में नरसंहार, अवैध बस्तियां, घरों को ध्वस्त करना, जबरन विस्थापन और संप्रभुता के प्रयासों का जिक्र किया गया।

क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ेगा? ओआईसी ने 13 बस्तियों को अलग करने की मंजूरी को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन कहा। संगठन ने “स्वैच्छिक प्रस्थान” नामक एजेंसी के गठन के खतरे से आगाह किया।

बयान में कहा गया कि ओआईसी फिलिस्तीनी लोगों के विस्थापन की किसी भी योजना को स्वीकार नहीं करता, चाहे वह उनकी भूमि के भीतर हो या बाहर। संगठन ने इसे जबरन विस्थापन या निर्वासन बताया।

क्या सुरक्षा परिषद अपनी जिम्मेदारी निभाएगी? ओआईसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आग्रह किया कि वह इजरायली अपराधों का सामना करने में अपनी जिम्मेदारियां पूरी करे और प्रतिबंध लगाए। संगठन ने दो-राज्य समाधान का समर्थन किया।

एसपीए की रिपोर्ट के मुताबिक ओआईसी ने इजरायली कैबिनेट की मंजूरी और स्मोट्रिच के बयानों को पश्चिमी तट पर संप्रभुता थोपने की योजना का हिस्सा बताया। संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कहा।

क्या बस्तियों के विस्तार पर रोक लगेगी? ओआईसी ने फिलिस्तीनियों के विस्थापन की किसी भी योजना को पूरी तरह खारिज किया और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन बताया। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से प्रतिबंध लगाने और दो-राज्य समाधान का समर्थन करने की अपील की।

बयान में नरसंहार, अवैध बस्तियां, घरों को ध्वस्त करना, जबरन विस्थापन और संप्रभुता के प्रयासों का जिक्र करते हुए ओआईसी ने सुरक्षा परिषद से अपनी जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया। एसपीए के अनुसार ओआईसी ने इन सभी को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का उल्लंघन बताया।

क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकजुट होगा? ओआईसी ने “स्वैच्छिक प्रस्थान” नामक एजेंसी के गठन के खतरे से आगाह किया और फिलिस्तीनियों के विस्थापन की किसी भी योजना को खारिज किया। संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन कहा।

एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि ओआईसी की अपील पर किसी देश या संस्था ने क्या प्रतिक्रिया दी, न ही प्रतिबंधों को लेकर कोई समय-सीमा या ठोस कदम का जिक्र है। रिपोर्ट में यह भी नहीं है कि इजरायली कैबिनेट की मंजूरी या “स्वैच्छिक प्रस्थान” एजेंसी के गठन पर किसी अन्य पक्ष ने क्या कहा।

ओआईसी ने किस इजरायली कदम की निंदा की? ओआईसी ने इजरायली कैबिनेट द्वारा पश्चिमी तट की 13 अवैध बस्तियों को अलग करने की मंजूरी की कड़ी निंदा की। एसपीए के अनुसार संगठन ने इसे उपनिवेशी बस्तियों को वैध ठहराने की तैयारी और अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन बताया। बयान में कहा गया कि यह कदम बस्तियों को वैध ठहराने की दिशा में है।

ओआईसी ने किस इजरायली एजेंसी के गठन पर चेतावनी दी? ओआईसी ने “स्वैच्छिक प्रस्थान” के नाम पर फिलिस्तीनियों के विस्थापन के लिए एक विशेष इजरायली एजेंसी बनाए जाने के खतरे से आगाह किया। संगठन ने फिलिस्तीनी लोगों के व्यक्तिगत या सामूहिक विस्थापन, जबरन विस्थापन या निर्वासन की सभी योजनाओं को पूरी तरह खारिज किया। एसपीए के अनुसार इसे अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन बताया गया।

ओआईसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या अपील की? ओआईसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आग्रह किया कि वह इजरायली अपराधों का सामना करने में अपनी जिम्मेदारियां पूरी करे। इन अपराधों में नरसंहार, अवैध बस्तियां, घरों को ध्वस्त करना, जबरन विस्थापन और संप्रभुता थोपने के प्रयास शामिल बताए गए। संगठन ने प्रतिबंध लगाने और दो-राज्य समाधान का समर्थन करने की अपील की।

इजरायली वित्त मंत्री के बयानों का क्या जिक्र हुआ? एसपीए के अनुसार ओआईसी ने इजरायली वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच के चरमपंथी और नस्लवादी बयानों का उल्लेख किया। संगठन ने कहा कि स्मोट्रिच ने इस कदम को पश्चिमी तट पर इजरायल की तथाकथित संप्रभुता थोपने की योजना का हिस्सा बताया। ओआईसी ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन करार दिया।

ओआईसी ने विस्थापन को लेकर क्या रुख अपनाया? ओआईसी ने फिलिस्तीनी लोगों के विस्थापन की किसी भी योजना को पूरी तरह खारिज किया, चाहे वह उनकी भूमि के भीतर हो या बाहर, व्यक्तिगत हो या सामूहिक। संगठन ने इसे जबरन विस्थापन या निर्वासन की श्रेणी में रखा। एसपीए के अनुसार ओआईसी ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन बताया।

एसपीए की रिपोर्ट में क्या नहीं बताया गया? एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि ओआईसी की अपील पर किसी देश या संस्था ने क्या प्रतिक्रिया दी। रिपोर्ट में प्रतिबंधों को लेकर कोई समय-सीमा या ठोस कदम का जिक्र भी नहीं है। इसमें यह भी नहीं है कि इजरायली कैबिनेट की मंजूरी या “स्वैच्छिक प्रस्थान” एजेंसी के गठन पर किसी अन्य पक्ष ने क्या कहा।