रियाद को ओआईसी के पहले साइबर सुरक्षा मंत्रिस्तरीय परिषद का मुख्यालय बनने का अवसर मिला है। ओआईसी के विदेश मंत्रियों की परिषद के 52वें सत्र ने सऊदी अरब के प्रस्ताव पर साइबर सुरक्षा मंत्रियों की एक परिषद स्थापित करने को मंजूरी दी है। यह निर्णय ओआईसी के ढांचे में साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए संगठन का मुख्य संदर्भ बिंदु तैयार करता है।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 19 अक्टूबर 2026 को बताया, इस परिषद का उद्देश्य ओआईसी सदस्य देशों में साइबर सुरक्षा को मजबूत करना, उनके महत्वपूर्ण हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करना, सहयोग को गहरा करना तथा साइबर सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों में उनके हितों की रक्षा करना है।
निर्णय के अनुसार परिषद ओआईसी का एक सहायक निकाय होगी और साइबर सुरक्षा से संबंधित मामलों के लिए संगठन का मुख्य संदर्भ होगी। इसका महासचिवालय और कार्यकारी कार्यालय रियाद में स्थित होंगे, और प्रत्येक का नेतृत्व मेजबान देश का एक प्रतिनिधि करेगा। परिषद में ओआईसी सदस्य देशों की साइबर सुरक्षा एजेंसियां शामिल होंगी।
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्राधिकरण के गवर्नर माजेद अल-माज़येद ने कहा कि सऊदी अरब का प्रस्ताव दुनिया भर में बढ़ते साइबर खतरों के बीच आया है, जो राष्ट्रों के महत्वपूर्ण हितों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तथा सरकारी सेवाओं और गतिविधियों के लिए जोखिम पैदा करते हैं।
उन्होंने ओआईसी सदस्य देशों में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया और इसे आर्थिक विकास, समुदाय की भलाई और व्यक्तिगत समृद्धि का एक प्रमुख चालक तथा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का एक बुनियादी स्तंभ बताया।
अल-माज़येद ने साइबर सुरक्षा क्षेत्र के लिए सऊदी नेतृत्व के मजबूत समर्थन की सराहना भी की और राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्राधिकरण के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्यों को उनके निरंतर ध्यान और निगरानी के लिए धन्यवाद दिया। बोर्ड की अध्यक्षता राज्य मंत्री और कैबिनेट सदस्य मुसाद अल-ऐबान करते हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सऊदी अरब के पास साइबर स्पेस की स्थिरता को मजबूत करने, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा संस्थाओं की मेजबानी करने तथा इस क्षेत्र में रणनीतिक पहलों का समर्थन करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का एक लंबा रिकॉर्ड है।
रियाद का ओआईसी साइबर सुरक्षा मंत्रिस्तरीय परिषद के मुख्यालय के रूप में चयन इस बात का संकेत है कि सदस्य देश साइबर खतरों के सामूहिक मोर्चे पर सहमत हैं। लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या यह परिषद सदस्य देशों की अलग-अलग साइबर क्षमताओं के बीच समन्वय स्थापित कर पाएगी?
ओआईसी के 52वें विदेश मंत्रियों के सत्र में यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब दुनिया भर में साइबर हमलों की प्रकृति और दायरा दोनों बदल रहे हैं। सरकारी सेवाओं, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर निर्भरता बढ़ने के साथ इन पर हमलों का असर भी गहरा होता जा रहा है। क्या सदस्य देश इस चुनौती का सामना करने के लिए अपनी राष्ट्रीय एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने का एक स्थायी तंत्र बना पाएंगे?
परिषद की संरचना में महासचिवालय और कार्यकारी कार्यालय दोनों रियाद में होंगे और इनका नेतृत्व मेजबान देश का प्रतिनिधि करेगा। यह व्यवस्था परिषद के संचालन को एक स्पष्ट केंद्र देती है। पर क्या एक ही देश के नेतृत्व वाला सचिवालय सभी सदस्य देशों की प्राथमिकताओं को समान रूप से प्रतिबिंबित कर सकेगा?
अल-माज़येद ने साइबर सुरक्षा को आर्थिक विकास, समुदाय की भलाई और व्यक्तिगत समृद्धि का प्रमुख चालक बताया। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का बुनियादी स्तंभ भी कहा। यह दृष्टिकोण साइबर सुरक्षा को केवल तकनीकी विषय न मानकर विकास और स्थिरता से जोड़ता है। क्या सदस्य देश इस ढांचे को अपनी राष्ट्रीय नीतियों में उतनी ही प्राथमिकता देंगे?
सऊदी अरब के प्रस्ताव को ओआईसी के विदेश मंत्रियों की परिषद के 52वें सत्र में मंजूरी मिली। यह परिषद ओआईसी का सहायक निकाय होगी और साइबर सुरक्षा मामलों में संगठन का मुख्य संदर्भ होगी। परिषद में सदस्य देशों की साइबर सुरक्षा एजेंसियां शामिल होंगी। क्या यह मंच सदस्य देशों के बीच क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के क्षेत्र में ठोस नतीजे दे पाएगा?
अल-माज़येद ने सऊदी नेतृत्व के समर्थन की सराहना की और राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्राधिकरण के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का आभार व्यक्त किया, जिसकी अध्यक्षता राज्य मंत्री और कैबिनेट सदस्य मुसाद अल-ऐबान करते हैं। उन्होंने सऊदी अरब के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि देश के पास साइबर स्पेस की स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय पहलों का लंबा रिकॉर्ड है। क्या यह अनुभव नई परिषद के शुरुआती कामकाज को गति दे पाएगा?
सऊदी अरब पहले से ही क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा संस्थाओं की मेजबानी करता है और इस क्षेत्र में रणनीतिक पहलों का समर्थन करता रहा है। रियाद का चयन इस निरंतरता का हिस्सा दिखता है। पर क्या मेजबानी का यह क्रम सदस्य देशों के बीच विश्वास और सहयोग को उस स्तर तक ले जा सकेगा जिसकी जरूरत साइबर खतरों के सामने है?
परिषद का उद्देश्य सदस्य देशों के महत्वपूर्ण हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करना तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों में उनके हितों की रक्षा करना है। यह लक्ष्य साइबर सुरक्षा को कूटनीति से जोड़ता है। क्या यह जुड़ाव अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सदस्य देशों की साझा स्थिति बनाने में मदद करेगा?
एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि परिषद की पहली बैठक कब होगी, इसका कार्यकाल क्या होगा, सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की नियुक्ति कैसे होगी, या परिषद के फैसलों की प्रकृति क्या होगी। रिपोर्ट में यह भी नहीं है कि परिषद के पास कोई विशेष बजट होगा या नहीं, या सदस्य देशों के लिए कोई अनुपालन तंत्र बनाया जाएगा या नहीं। इन विवरणों के बिना परिषद के कामकाज की गति और दायरे का आकलन करना मुश्किल है।
फिर भी, ओआईसी के भीतर साइबर सुरक्षा के लिए एक समर्पित मंत्रिस्तरीय परिषद का गठन इस क्षेत्र में सहयोग की दिशा में एक औपचारिक कदम है। यह सदस्य देशों को एक साझा मंच देता है जहां वे खतरों की पहचान, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय पर बात कर सकते हैं। रियाद में स्थित महासचिवालय और कार्यकारी कार्यालय इस प्रक्रिया को एक स्थायी संस्थागत आधार देते हैं। अब देखना यह है कि यह ढांचा कितनी जल्दी धरातल पर दिखने वाले नतीजे देता है।
ओआईसी की नई साइबर सुरक्षा परिषद क्या है? ओआईसी के विदेश मंत्रियों की परिषद के 52वें सत्र ने सऊदी अरब के प्रस्ताव पर साइबर सुरक्षा मंत्रियों की एक परिषद स्थापित करने को मंजूरी दी। यह परिषद ओआईसी का सहायक निकाय होगी और साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों में संगठन का मुख्य संदर्भ होगी। परिषद में ओआईसी सदस्य देशों की साइबर सुरक्षा एजेंसियां शामिल होंगी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों में साइबर सुरक्षा मजबूत करना और उनके महत्वपूर्ण हितों की रक्षा करना है।
परिषद का मुख्यालय कहां होगा और नेतृत्व कौन करेगा? परिषद का महासचिवालय और कार्यकारी कार्यालय रियाद में स्थित होंगे। प्रत्येक का नेतृत्व मेजबान देश का एक प्रतिनिधि करेगा। यह व्यवस्था परिषद के संचालन को एक स्पष्ट केंद्र देती है। रियाद का चयन ओआईसी सदस्य देशों द्वारा किया गया, जिससे सऊदी अरब को इस नई संस्था की मेजबानी का अवसर मिला है। परिषद में सदस्य देशों की साइबर सुरक्षा एजेंसियां शामिल होंगी।
सऊदी अरब ने यह प्रस्ताव क्यों दिया? राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्राधिकरण के गवर्नर माजेद अल-माज़येद ने कहा कि सऊदी अरब का प्रस्ताव दुनिया भर में बढ़ते साइबर खतरों के बीच आया है। ये खतरे राष्ट्रों के महत्वपूर्ण हितों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तथा सरकारी सेवाओं और गतिविधियों के लिए जोखिम पैदा करते हैं। उन्होंने ओआईसी सदस्य देशों में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया।
अल-माज़येद ने साइबर सुरक्षा के महत्व के बारे में क्या कहा? अल-माज़येद ने कहा कि ओआईसी सदस्य देशों में साइबर सुरक्षा को मजबूत करना आर्थिक विकास, समुदाय की भलाई और व्यक्तिगत समृद्धि का एक प्रमुख चालक है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का एक बुनियादी स्तंभ भी बताया। उन्होंने साइबर सुरक्षा क्षेत्र के लिए सऊदी नेतृत्व के मजबूत समर्थन की सराहना की। साथ ही राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्राधिकरण के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का आभार व्यक्त किया।
सऊदी अरब के साइबर सुरक्षा अनुभव का क्या जिक्र हुआ? अल-माज़येद ने कहा कि सऊदी अरब के पास साइबर स्पेस की स्थिरता को मजबूत करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का एक लंबा रिकॉर्ड है। देश क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा संस्थाओं की मेजबानी करता है और इस क्षेत्र में रणनीतिक पहलों का समर्थन करता रहा है। रियाद का ओआईसी परिषद के मुख्यालय के रूप में चयन इस अनुभव की निरंतरता दिखाता है। बोर्ड की अध्यक्षता राज्य मंत्री और कैबिनेट सदस्य मुसाद अल-ऐबान करते हैं।
एसपीए की रिपोर्ट में क्या नहीं बताया गया? एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि परिषद की पहली बैठक कब होगी या इसका कार्यकाल क्या होगा। यह भी नहीं है कि सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की नियुक्ति कैसे होगी या परिषद के फैसलों की प्रकृति क्या होगी। रिपोर्ट में परिषद के बजट या किसी अनुपालन तंत्र का जिक्र भी नहीं है। इन विवरणों के बिना परिषद के कामकाज की गति और दायरे का आकलन करना मुश्किल है।