मनामा में रविवार को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों और रूसी संघ के बीच रणनीतिक संवाद की नौवीं संयुक्त मंत्रिस्तरीय बैठक हुई, जिसमें विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान बिन अब्दुल्ला ने भाग लिया। बैठक बहरीन की राजधानी मनामा में आयोजित की गई।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, इस बैठक में जीसीसी सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों, जीसीसी महासचिव और रूसी संघ के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हिस्सा लिया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी क्षेत्र और उसके आसपास कई मोर्चों पर हलचल बनी हुई है। क्या यह संवाद क्षेत्रीय तनाव को कम करने की दिशा में ठोस नतीजे दे पाएगा, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।
एसपीए के अनुसार, बैठक में खाड़ी-रूस संबंधों को बेहतर बनाने, दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक साझेदारी को विकसित करने और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर परामर्श एवं समन्वय तेज करने के तरीकों पर चर्चा हुई। इन प्रयासों का उद्देश्य सुरक्षा और स्थिरता को समर्थन देना तथा विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाना बताया गया।
यही वह बिंदु है जहां यह सवाल उठता है कि शांतिपूर्ण माध्यमों से विवादों के समाधान की बात कागजों तक सीमित रहेगी या जमीन पर भी दिखेगी? बैठक में शामिल पक्षों ने इस दिशा में परामर्श और समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया, जिससे संकेत मिलता है कि दोनों ओर से संवाद की प्रक्रिया जारी रखने की इच्छा बनी हुई है।
एसपीए के मुताबिक, बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा हुई और इस बात पर बल दिया गया कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की जरूरत है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बात की गई।
इन दोनों जलमार्गों का महत्व केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक है। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदब से नौवहन की स्वतंत्रता बनी रहे, यह ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। क्या इन जलमार्गों पर किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक बाजारों में अस्थिरता नहीं पैदा करेगी? यह सवाल इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि बैठक में स्पष्ट रूप से ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा का उल्लेख किया गया।
बैठक में जीसीसी सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ जीसीसी महासचिव और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मौजूद रहे। यह संरचना बताती है कि यह संवाद केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि एक समूह और एक देश के बीच बहुपक्षीय ढांचे में हो रहा है। क्या बहुपक्षीय मंच पर ऐसी बैठकें द्विपक्षीय मुलाकातों से अधिक असरदार साबित होती हैं? इसका जवाब इस बात पर निर्भर करेगा कि बैठक में उठे विषय कितनी जल्दी ठोस कार्रवाई में बदलते हैं।
एसपीए की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक का एजेंडा तीन मुख्य धाराओं में बंटा हुआ दिखता है। पहला, खाड़ी-रूस संबंधों को बेहतर बनाना और रणनीतिक साझेदारी को विकसित करना। दूसरा, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर परामर्श और समन्वय को तेज करना। तीसरा, क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा और कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखने की आवश्यकता पर बल देना।
इन तीनों धाराओं में एक साझा तत्व है — संवाद को बनाए रखना। बैठक में कहा गया कि इन प्रयासों का लक्ष्य सुरक्षा और स्थिरता को समर्थन देना तथा विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाना है। क्या क्षेत्र में स्थिरता केवल बातचीत से आ सकती है, या इसके लिए ठोस और मापने योग्य कदमों की जरूरत है? यह प्रश्न इसलिए भी उठता है क्योंकि बैठक में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखने पर विशेष जोर दिया गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य का उल्लेख इस बैठक के संदर्भ में केंद्रीय महत्व रखता है। एसपीए के अनुसार, बैठक में इन जलमार्गों से नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई, जो ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा में योगदान देती है। यह सीधा संकेत है कि खाड़ी देश और रूस दोनों इन समुद्री मार्गों को केवल क्षेत्रीय नहीं, वैश्विक आर्थिक स्थिरता से जोड़कर देख रहे हैं।
क्या ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की बात करना इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष इन मार्गों पर किसी भी तरह की अस्थिरता को अपने हितों के खिलाफ मानते हैं? बैठक के विवरण से यही संकेत मिलता है, क्योंकि नौवहन की स्वतंत्रता को सीधे ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ा गया है।
यह बैठक जीसीसी और रूस के बीच रणनीतिक संवाद की नौवीं संयुक्त मंत्रिस्तरीय बैठक थी। नौवें दौर तक पहुंचना अपने आप में यह दर्शाता है कि यह संवाद तंत्र समय के साथ जारी रहा है। एसपीए की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख नहीं है कि पिछली बैठकों में क्या नतीजे निकले या इस बार किसी विशेष समझौते पर हस्ताक्षर हुए या नहीं।
रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि बैठक में किन विशिष्ट क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। एसपीए के अनुसार, बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की आवश्यकता पर बात हुई, लेकिन किसी विशेष देश, संघर्ष या घटना का नाम नहीं लिया गया। क्या इस तरह की सामान्य भाषा वास्तविक मतभेदों को छिपाने का काम करती है? यह प्रश्न विश्लेषकों के लिए खुला रहता है।
बैठक में खाड़ी-रूस संबंधों को बेहतर बनाने और रणनीतिक साझेदारी को विकसित करने के तरीकों पर चर्चा हुई। यह संकेत देता है कि दोनों पक्ष संबंधों को केवल राजनीतिक संवाद तक सीमित न रखकर व्यापक साझेदारी के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, एसपीए की रिपोर्ट में इस साझेदारी के किसी विशेष क्षेत्र — जैसे ऊर्जा, व्यापार, निवेश या सुरक्षा — का जिक्र नहीं है।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर परामर्श और समन्वय को तेज करने की बात बैठक के एजेंडे का हिस्सा रही। इसका अर्थ यह है कि दोनों पक्ष न केवल अपने द्विपक्षीय संबंधों पर, बल्कि व्यापक वैश्विक मामलों पर भी अपनी स्थितियों को नजदीक लाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या यह समन्वय आगे चलकर किसी साझा रुख में बदलेगा? इसका कोई स्पष्ट संकेत एसपीए की रिपोर्ट में नहीं मिलता।
बैठक में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया। यह ऐसी भाषा है जो आमतौर पर ऐसी बैठकों के बाद जारी बयानों में देखने को मिलती है। लेकिन इस बार इसे सीधे क्षेत्रीय घटनाक्रमों और नौवहन की स्वतंत्रता से जोड़ा गया, जो इसे अधिक विशिष्ट बनाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य का नाम लेना यह दर्शाता है कि बैठक में समुद्री सुरक्षा एक प्रमुख विषय रहा। एसपीए के अनुसार, इन जलमार्गों से नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई, जो ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा में योगदान देती है। यह सीधा संबंध बताता है कि खाड़ी देश और रूस इन मार्गों को वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मानते हैं।
क्या इन जलमार्गों पर किसी भी तरह की बाधा से वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल आ सकता है? बैठक में ऊर्जा सुरक्षा का जो उल्लेख हुआ, वह इसी चिंता को रेखांकित करता है। हालांकि, एसपीए की रिपोर्ट में इस बात का कोई विवरण नहीं है कि इन जलमार्गों की सुरक्षा के लिए कोई विशेष तंत्र या सहयोग की योजना बनी है या नहीं।
बैठक में जीसीसी महासचिव की उपस्थिति यह बताती है कि यह संवाद संस्थागत ढांचे के तहत हो रहा है। जीसीसी सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों और रूस के विदेश मंत्री के बीच यह बैठक बहुपक्षीय कूटनीति का उदाहरण है। क्या ऐसे बहुपक्षीय मंच छोटे देशों को बड़ी शक्तियों के साथ बातचीत में अधिक जगह देते हैं? यह इस बात पर निर्भर करता है कि एजेंडा कौन तय करता है और नतीजे किसके हित में आते हैं।
एसपीए की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाने की बात कही गई। यह सिद्धांत क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इसका व्यावहारिक अर्थ तभी निकलता है जब पक्ष किसी विशेष विवाद पर इस सिद्धांत को लागू करते हैं। रिपोर्ट में किसी विशेष विवाद का नाम नहीं लिया गया।
बैठक का आयोजन बहरीन की राजधानी मनामा में हुआ। यह स्थान इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि यह खाड़ी क्षेत्र का हिस्सा है और जीसीसी सदस्य देशों में से एक की राजधानी है। एसपीए ने बैठक की तारीख 18 अक्टूबर 2026 बताई है और यह रविवार को हुई।
रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि बैठक कितनी देर चली, कितने देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, या कोई संयुक्त बयान जारी हुआ या नहीं। एसपीए के अनुसार, बैठक में जीसीसी सदस्य देशों के विदेश मंत्री, जीसीसी महासचिव और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मौजूद रहे।
खाड़ी-रूस संबंधों को बेहतर बनाने की बात इस संवाद के केंद्र में रही है। यह संवाद तंत्र नौवें दौर तक पहुंच चुका है, जो इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष इसे जारी रखना चाहते हैं। लेकिन एसपीए की रिपोर्ट में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि इस संवाद से अब तक क्या ठोस परिणाम निकले हैं।
क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा और कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखने की आवश्यकता पर बल देना यह दर्शाता है कि दोनों पक्ष क्षेत्र में स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं। क्या यह स्थिरता केवल बयानों तक सीमित रहेगी या इसे बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे? इसका जवाब भविष्य की बैठकों और उनके नतीजों से मिलेगा।
एसपीए की रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि बैठक में किसी विशेष आर्थिक या व्यापारिक सहयोग पर चर्चा हुई या नहीं। रिपोर्ट के अनुसार, चर्चा मुख्य रूप से खाड़ी-रूस संबंधों को बेहतर बनाने, रणनीतिक साझेदारी विकसित करने, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर परामर्श तेज करने, क्षेत्रीय घटनाक्रमों और नौवहन की स्वतंत्रता पर केंद्रित रही।
ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा का उल्लेख इस बैठक के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि खाड़ी देश और रूस इन मुद्दों को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा विषय मानते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता इसी शृंखला का हिस्सा है।
बैठक में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया। यह ऐसा विषय है जो क्षेत्रीय स्थिरता से सीधे जुड़ा हुआ है। एसपीए के अनुसार, बैठक में विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाने की बात भी कही गई।
जीसीसी और रूस के बीच यह रणनीतिक संवाद नौवें मंत्रिस्तरीय दौर तक पहुंचा है। यह संवाद तंत्र समय के साथ चलता रहा है, जो दोनों पक्षों की निरंतरता दर्शाता है। हालांकि, एसपीए की रिपोर्ट में इस बात का कोई विवरण नहीं है कि इस बैठक में कोई नया समझौता, संयुक्त बयान या कार्ययोजना सामने आई या नहीं।
रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि बैठक से पहले या बाद में कोई द्विपक्षीय मुलाकात हुई या नहीं। एसपीए के अनुसार, बैठक में जीसीसी सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों, जीसीसी महासचिव और रूस के विदेश मंत्री ने भाग लिया।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर परामर्श और समन्वय को तेज करने की बात इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष अपने रुख को नजदीक लाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या यह समन्वय आगे चलकर किसी साझा रणनीति में बदलेगा? इसका कोई स्पष्ट संकेत एसपीए की रिपोर्ट में नहीं मिलता।
बैठक में खाड़ी-रूस संबंधों को बेहतर बनाने और रणनीतिक साझेदारी को विकसित करने के तरीकों पर चर्चा हुई। यह दर्शाता है कि दोनों पक्ष संबंधों को गहरा करने के इच्छुक हैं। लेकिन एसपीए की रिपोर्ट में इस साझेदारी के किसी विशेष क्षेत्र या परियोजना का उल्लेख नहीं है।
एसपीए की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा हुई और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया। रिपोर्ट में किसी विशेष घटना, देश या संघर्ष का नाम नहीं लिया गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर चर्चा इस बात को दर्शाती है कि समुद्री सुरक्षा इस बैठक का एक प्रमुख विषय रहा। एसपीए के अनुसार, यह ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा में योगदान देती है।
बैठक में विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाने की बात कही गई। यह सिद्धांत क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि इस सिद्धांत को किसी विशेष विवाद पर कैसे लागू किया जाएगा।
जीसीसी और रूस के बीच रणनीतिक संवाद की नौवीं संयुक्त मंत्रिस्तरीय बैठक मनामा में हुई। यह बैठक 18 अक्टूबर 2026 को रविवार के दिन आयोजित की गई। एसपीए के अनुसार, बैठक में जीसीसी सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों, जीसीसी महासचिव और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भाग लिया।
रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि बैठक में कोई संयुक्त बयान जारी हुआ या नहीं, या कोई समझौता हुआ या नहीं। एसपीए के अनुसार, बैठक में खाड़ी-रूस संबंधों को बेहतर बनाने, रणनीतिक साझेदारी विकसित करने, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर परामर्श तेज करने, क्षेत्रीय घटनाक्रमों और नौवहन की स्वतंत्रता पर चर्चा हुई।
क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखने की बात इस बैठक का केंद्रीय विषय रही। क्या ऐसी बैठकें क्षेत्र में तनाव कम करने में वास्तविक भूमिका निभाती हैं? यह प्रश्न इसलिए भी उठता है क्योंकि बैठक में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखने पर विशेष जोर दिया गया।
एसपीए की रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि बैठक में किसी विशेष आर्थिक या व्यापारिक सहयोग पर चर्चा हुई या नहीं। रिपोर्ट के अनुसार, चर्चा मुख्य रूप से राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर केंद्रित रही।
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा का उल्लेख इस बात को दर्शाता है कि खाड़ी देश और रूस इन मुद्दों को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता इसी शृंखला का हिस्सा है।
एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि बैठक में किसी विशेष देश या संघर्ष का नाम लिया गया या नहीं। रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा हुई और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
जीसीसी और रूस के बीच यह संवाद तंत्र नौवें दौर तक पहुंच चुका है। यह दर्शाता है कि दोनों पक्ष इस संवाद को जारी रखना चाहते हैं। एसपीए की रिपोर्ट में इस बात का कोई विवरण नहीं है कि इस संवाद से अब तक क्या ठोस परिणाम निकले हैं।
बैठक में खाड़ी-रूस संबंधों को बेहतर बनाने और रणनीतिक साझेदारी को विकसित करने के तरीकों पर चर्चा हुई। यह संकेत देता है कि दोनों पक्ष संबंधों को गहरा करने के इच्छुक हैं। हालांकि, एसपीए की रिपोर्ट में इस साझेदारी के किसी विशेष क्षेत्र या परियोजना का उल्लेख नहीं है।
एसपीए की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाने की बात कही गई। यह सिद्धांत क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि इस सिद्धांत को किसी विशेष विवाद पर कैसे लागू किया जाएगा।
मनामा में हुई इस बैठक में जीसीसी सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों, जीसीसी महासचिव और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भाग लिया। यह बैठक 18 अक्टूबर 2026 को रविवार के दिन आयोजित की गई। एसपीए के अनुसार, बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर परामर्श और समन्वय तेज करने पर चर्चा हुई।
रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि बैठक में कोई संयुक्त बयान जारी हुआ या नहीं, या कोई समझौता हुआ या नहीं। एसपीए के अनुसार, बैठक में खाड़ी-रूस संबंधों को बेहतर बनाने, रणनीतिक साझेदारी विकसित करने, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर परामर्श तेज करने, क्षेत्रीय घटनाक्रमों और नौवहन की स्वतंत्रता पर चर्चा हुई।
जीसीसी-रूस रणनीतिक संवाद की नौवीं संयुक्त मंत्रिस्तरीय बैठक कहाँ और कब हुई? एसपीए के अनुसार, यह बैठक बहरीन की राजधानी मनामा में 18 अक्टूबर 2026 को रविवार के दिन हुई। बैठक में जीसीसी सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों, जीसीसी महासचिव और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भाग लिया। विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान बिन अब्दुल्ला ने भी इसमें हिस्सा लिया।
बैठक में किन मुख्य विषयों पर चर्चा हुई? एसपीए के अनुसार, बैठक में खाड़ी-रूस संबंधों को बेहतर बनाने, दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक साझेदारी विकसित करने और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर परामर्श एवं समन्वय तेज करने के तरीकों पर चर्चा हुई। इन प्रयासों का उद्देश्य सुरक्षा और स्थिरता को समर्थन देना तथा विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाना बताया गया।
बैठक में नौवहन की स्वतंत्रता और ऊर्जा सुरक्षा पर क्या कहा गया? एसपीए के अनुसार, बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। यह ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा में योगदान देती है। बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
बैठक में कौन-कौन मौजूद रहे? एसपीए के अनुसार, बैठक में जीसीसी सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों, जीसीसी महासचिव और रूसी संघ के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भाग लिया। विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान बिन अब्दुल्ला ने भी बैठक में हिस्सा लिया। यह बैठक बहरीन की राजधानी मनामा में आयोजित की गई।
क्या बैठक में कोई समझौता या संयुक्त बयान जारी हुआ? एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि बैठक में कोई समझौता हुआ या कोई संयुक्त बयान जारी हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में खाड़ी-रूस संबंधों को बेहतर बनाने, रणनीतिक साझेदारी विकसित करने, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर परामर्श तेज करने, क्षेत्रीय घटनाक्रमों और नौवहन की स्वतंत्रता पर चर्चा हुई।
बैठक में किन विशिष्ट क्षेत्रीय घटनाक्रमों का जिक्र हुआ? एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि बैठक में किन विशिष्ट क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की आवश्यकता पर बात हुई, लेकिन किसी विशेष देश, संघर्ष या घटना का नाम नहीं लिया गया।