सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार 7 अगस्त 2026 को सुरक्षा परिषद के सदस्यों द्वारा जारी उस बयान का स्वागत किया है, जिसमें हूती मिलिशिया द्वारा किए गए हमलों की निंदा की गई है।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 8 अगस्त 2026 को बताया, इस बयान में 13 जुलाई से सऊदी अरब के खिलाफ किए गए मिसाइल हमलों और 22 जुलाई से वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों की निंदा की गई है।
सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय कानून और सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों, विशेष रूप से प्रस्ताव 2216 के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया। इसमें यमन गणराज्य की संप्रभुता, एकता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान तथा क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री नेविगेशन के अधिकारों को खतरे में डालने वाले कार्यों को खारिज करने की बात कही गई है।
सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने और क्षेत्र की स्थिरता तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार को खतरे में डालने वाले उल्लंघनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का आग्रह किया है।
मंत्रालय ने अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अपने नागरिकों और प्रतिष्ठानों के बचाव के लिए आवश्यक कदम उठाने के संकल्प को दोहराया। साथ ही, सऊदी अरब ने यमन की वैध सरकार और संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत के शांति प्रयासों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
सुरक्षा परिषद के बयान में किन हमलों की निंदा की गई है? सुरक्षा परिषद के बयान में 13 जुलाई से सऊदी अरब के खिलाफ हूती मिलिशिया द्वारा किए गए मिसाइल हमलों की निंदा की गई है। इसके साथ ही, 22 जुलाई से वाणिज्यिक जहाजों पर किए गए हमलों की भी निंदा की गई है।
सऊदी अरब ने किन अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन पर जोर दिया? सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय कानून और सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों, विशेष रूप से प्रस्ताव 2216 के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसमें यमन की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की बात कही गई है।
क्षेत्रीय सुरक्षा के संबंध में सऊदी अरब की क्या मांग है? सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने की जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया है। उसने उन उल्लंघनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग की है जो क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को खतरे में डालते हैं।