किंग सऊद यूनिवर्सिटी मेडिकल सिटी ने वर्चुअल हेल्थ हॉस्पिटल, ज़ैन सऊदी और रोबोटिक समाधान विशेषज्ञ कंपनी ‘एज’ (अल-अमीन द्वारा प्रतिनिधित्व) के साथ मिलकर सऊदी टेलीसर्जरी प्रोग्राम शुरू किया है।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 10 अगस्त 2026 को बताया, इस कार्यक्रम के पहले चरण में तीन दिनों के भीतर 7 सर्जरी की गईं। मरीज किंग खालिद यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर में थे, जबकि यूनिवर्सिटी की सर्जिकल टीम ने वर्चुअल हेल्थ हॉस्पिटल के रोबोटिक सर्जरी ऑफिस से रिमोट तरीके से इन ऑपरेशनों को अंजाम दिया।
इन सर्जरी में मोटापे का इलाज, जनरल सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग और चेस्ट सर्जरी जैसे विभिन्न विशेषज्ञता क्षेत्र शामिल थे। पहले दिन विभिन्न विशेषज्ञताओं में लगातार 4 जटिल सर्जरी की गईं।
इस कार्यक्रम का लक्ष्य चिकित्सा, तकनीकी और डिजिटल विशेषज्ञों के सहयोग से टेलीसर्जरी के लिए एक राष्ट्रीय सऊदी प्रोटोकॉल विकसित करना है। किंग सऊद यूनिवर्सिटी मेडिकल सिटी के स्वास्थ्य मामलों के कार्यकारी निदेशक डॉ. अब्दुलअजीज बिन मोहम्मद अल-थुनायन ने कहा कि किंग खालिद यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल 2003 से रोबोटिक सर्जरी सेवाओं में सक्रिय है।
यह तकनीक भविष्य में हज जैसे बड़े आयोजनों, मानवीय कार्यों और आपातकालीन स्थितियों में दुर्गम क्षेत्रों तक सर्जिकल विशेषज्ञता पहुँचाने में मदद करेगी। विज्ञप्ति में उपयोग किए गए विशिष्ट रोबोटिक उपकरणों के मॉडल का उल्लेख नहीं है।
सऊदी टेलीसर्जरी प्रोग्राम के पहले चरण में क्या हुआ? पहले चरण के दौरान तीन दिनों में कुल 7 सर्जरी की गईं। इनमें से 4 सर्जरी पहले दिन ही विभिन्न विशेषज्ञताओं में पूरी की गईं, जहाँ सर्जिकल टीम ने वर्चुअल हेल्थ हॉस्पिटल से रिमोट संचालन किया और मरीज किंग खालिद यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में थे।
इस कार्यक्रम में कौन-सी सर्जिकल विशेषज्ञताएं शामिल थीं? इस कार्यक्रम के तहत मोटापे की सर्जरी, जनरल सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग (Obstetrics and Gynecology) और चेस्ट सर्जरी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में ऑपरेशन किए गए। यह कार्यक्रम रोबोटिक सर्जरी की उन्नत क्षमताओं को प्रदर्शित करता है।
इस पहल का दीर्घकालिक लक्ष्य क्या है? इसका उद्देश्य चिकित्सा, तकनीकी और डिजिटल विशेषज्ञों के सहयोग से टेलीसर्जरी के लिए एक राष्ट्रीय सऊदी प्रोटोकॉल विकसित करना है। इससे सऊदी अरब की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति मजबूत होगी और एक ऐसा राष्ट्रीय मॉडल बनेगा जिसे आगे विस्तार दिया जा सके।
इस तकनीक का उपयोग किन विशेष स्थितियों में किया जा सकता है? डॉ. अब्दुलअजीज बिन मोहम्मद अल-थुनायन के अनुसार, यह तकनीक हज जैसे बड़े आयोजनों और आपातकालीन स्थितियों में उपयोगी होगी। इसका उपयोग उन दुर्गम क्षेत्रों में सर्जिकल विशेषज्ञता प्रदान करने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कार्यों के लिए किया जा सकता है।