अंतरराष्ट्रीय खजूर परिषद के सदस्य देश हर साल 60 लाख टन खजूर का उत्पादन करते हैं, जो वैश्विक उत्पादन का 60 प्रतिशत है। यह जानकारी परिषद के छठे सत्र के दौरान सामने आई, जो मस्कट में ओमान की सल्तनत के आतिथ्य में आयोजित हुआ। ओमान का प्रतिनिधित्व कृषि, मत्स्य पालन और जल संसाधन मंत्रालय ने किया और सत्र में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 18 अक्टूबर 2026 को बताया, बैठक में अगले कार्यकाल के लिए कार्यकारी बोर्ड का चुनाव किया गया, सदस्य देशों के वित्तीय योगदान की गणना के लिए एक तंत्र को मंजूरी दी गई और विशेष समितियों के कार्यकाल को बढ़ाया गया। परिषद ने मोरक्को और लीबिया के सदस्यता में शामिल होने का भी स्वागत किया।
बैठक की शुरुआत कार्यकारी सचिवालय के वार्षिक रिपोर्ट की समीक्षा के साथ हुई, जिसमें पिछली अवधि में लागू प्रमुख उपलब्धियों, कार्यक्रमों और गतिविधियों पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों ने संयुक्त पहलों और परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की तथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताड़ और खजूर क्षेत्र के विकास के लिए रणनीतिक दिशाओं और प्राथमिकताओं पर चर्चा की।
क्या यह आंकड़ा दिखाता है कि वैश्विक खजूर उत्पादन में सदस्य देशों की हिस्सेदारी कितनी निर्णायक है? सत्र में अगले कार्यकाल के लिए कार्यकारी बोर्ड का चुनाव हुआ, जिसमें सऊदी अरब ने अध्यक्षता बनाए रखी। ओमान को खाड़ी देशों और यमन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया, जॉर्डन को निकट पूर्व क्षेत्र के लिए और लीबिया को उत्तरी अफ्रीका के लिए चुना गया। परिषद ने पिछले कार्यकाल के दौरान उनके प्रयासों की मान्यता में बाहर जाने वाले कार्यकारी बोर्ड सदस्यों — सऊदी अरब, ओमान, ट्यूनीशिया और फिलिस्तीन — का आभार भी व्यक्त किया।
क्या अध्यक्षता बनाए रखना सऊदी अरब की खजूर कूटनीति में निरंतरता का संकेत है? परिषद ने मोरक्को और लीबिया को नए सदस्यों के रूप में स्वागत किया, जिससे सदस्य देशों का भौगोलिक प्रतिनिधित्व बढ़ा और ताड़ तथा खजूर क्षेत्र में सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और संयुक्त पहलों के विकास के अवसरों को समर्थन मिला।
वित्तीय और संगठनात्मक मामलों पर, सदस्यों की परिषद ने परिषद के बजट में सदस्य देशों के वित्तीय योगदान की गणना के लिए एक तंत्र को मंजूरी दी, जिससे इसके वित्तीय संसाधनों को नियमित करने और इसके कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं की स्थिरता को समर्थन देने में मदद मिलेगी। इसने विशेष समितियों के कार्यकाल को अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ाने को भी मंजूरी दी।
क्या योगदान तंत्र परिषद के दीर्घकालिक वित्तपोषण को अधिक पूर्वानुमेय बना सकता है? बैठक में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और मेजबानी ओमान ने की, जिसका प्रतिनिधित्व कृषि, मत्स्य पालन और जल संसाधन मंत्रालय ने किया। सत्र ने संयुक्त पहलों और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और ताड़ तथा खजूर क्षेत्र के विकास के लिए रणनीतिक दिशाओं और प्राथमिकताओं पर चर्चा की।
क्या क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का यह विस्तार नए बाजारों और साझा अनुसंधान के द्वार खोल सकता है? परिषद ने मोरक्को और लीबिया के शामिल होने का स्वागत किया, जिससे सदस्य देशों का भौगोलिक दायरा बढ़ा। इस कदम से सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और संयुक्त पहलों के विकास के अवसरों को समर्थन मिलने की बात कही गई।
क्या खाड़ी, निकट पूर्व और उत्तरी अफ्रीका का यह प्रतिनिधित्व परिषद को अधिक संतुलित बनाता है? कार्यकारी बोर्ड के चुनाव में सऊदी अरब ने अध्यक्षता बनाए रखी, ओमान को खाड़ी देशों और यमन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व मिला, जॉर्डन को निकट पूर्व क्षेत्र का और लीबिया को उत्तरी अफ्रीका का। परिषद ने बाहर जाने वाले बोर्ड सदस्यों सऊदी अरब, ओमान, ट्यूनीशिया और फिलिस्तीन के प्रयासों की सराहना की।
क्या विशेष समितियों के कार्यकाल का विस्तार निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था? वार्षिक रिपोर्ट की समीक्षा में कार्यकारी सचिवालय के काम, प्रमुख उपलब्धियों, कार्यक्रमों और गतिविधियों को रेखांकित किया गया। प्रतिभागियों ने संयुक्त पहलों और परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की।
क्या 60 लाख टन का उत्पादन और वैश्विक हिस्सेदारी का 60 प्रतिशत आंकड़ा क्षेत्र की क्षमता को पर्याप्त रूप से दर्शाता है? परिषद ने वित्तीय योगदान की गणना का तंत्र मंजूर किया, जिससे बजट संसाधनों को नियमित करने और कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं की स्थिरता को समर्थन देने में मदद मिलेगी। साथ ही विशेष समितियों का कार्यकाल बढ़ाया गया।
एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि 60 लाख टन का उत्पादन किस अवधि का है, कौन-से देश इसमें शामिल हैं, योगदान तंत्र के तहत राशि क्या होगी, विशेष समितियों का कार्यकाल कितने समय के लिए बढ़ाया गया, या अगले सत्र की तारीख और स्थान क्या होगा। रिपोर्ट में मोरक्को और लीबिया की सदस्यता की प्रक्रिया के विवरण भी नहीं दिए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय खजूर परिषद का छठा सत्र कहाँ और कब हुआ? छठा सत्र मस्कट में ओमान की सल्तनत के आतिथ्य में हुआ, जिसका प्रतिनिधित्व कृषि, मत्स्य पालन और जल संसाधन मंत्रालय ने किया। एसपीए के अनुसार तारीख 18 अक्टूबर 2026 है। बैठक में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सत्र में कार्यकारी बोर्ड का चुनाव, वित्तीय योगदान तंत्र की मंजूरी और विशेष समितियों के कार्यकाल का विस्तार हुआ।
सदस्य देशों का खजूर उत्पादन कितना है? सत्र के दौरान बताया गया कि सदस्य देश 60 लाख टन खजूर का उत्पादन करते हैं, जो वैश्विक उत्पादन का 60 प्रतिशत है। यह आंकड़ा परिषद के छठे सत्र में सामने आया। एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि यह उत्पादन किस अवधि का है या इसमें कौन-से देश शामिल हैं।
कार्यकारी बोर्ड के चुनाव में क्या तय हुआ? अगले कार्यकाल के लिए कार्यकारी बोर्ड का चुनाव हुआ, जिसमें सऊदी अरब ने अध्यक्षता बनाए रखी। ओमान को खाड़ी देशों और यमन क्षेत्र, जॉर्डन को निकट पूर्व क्षेत्र और लीबिया को उत्तरी अफ्रीका का प्रतिनिधित्व मिला। परिषद ने बाहर जाने वाले बोर्ड सदस्यों सऊदी अरब, ओमान, ट्यूनीशिया और फिलिस्तीन के प्रयासों की सराहना की।
परिषद ने किन नए सदस्यों का स्वागत किया? परिषद ने मोरक्को और लीबिया को नए सदस्यों के रूप में स्वागत किया। इससे सदस्य देशों का भौगोलिक प्रतिनिधित्व बढ़ा और ताड़ तथा खजूर क्षेत्र में सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और संयुक्त पहलों के विकास के अवसरों को समर्थन मिला। एसपीए की रिपोर्ट में सदस्यता प्रक्रिया के विवरण नहीं दिए गए हैं।
वित्तीय और संगठनात्मक मामलों पर क्या निर्णय हुए? सदस्यों की परिषद ने परिषद के बजट में सदस्य देशों के वित्तीय योगदान की गणना के लिए एक तंत्र को मंजूरी दी। इससे वित्तीय संसाधनों को नियमित करने और कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं की स्थिरता को समर्थन देने में मदद मिलेगी। परिषद ने विशेष समितियों के कार्यकाल को अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ाने को भी मंजूरी दी।
बैठक में और किन विषयों पर चर्चा हुई? बैठक की शुरुआत कार्यकारी सचिवालय के वार्षिक रिपोर्ट की समीक्षा से हुई, जिसमें पिछली अवधि की प्रमुख उपलब्धियों, कार्यक्रमों और गतिविधियों पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों ने संयुक्त पहलों और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की तथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताड़ और खजूर क्षेत्र के विकास के लिए रणनीतिक दिशाओं और प्राथमिकताओं पर चर्चा की।