रियाद में 5 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने आतंकवादी हूती मिलिशिया द्वारा देश के नागरिकों तथा नागरिक और आर्थिक ठिकानों पर लगातार किए जा रहे हमलों की सबसे कड़ी निंदा और भर्त्सना व्यक्त की है। मंत्रालय ने इन हमलों को बार-बार और खुले तौर पर किया गया आक्रमण बताया।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, मंत्रालय ने कहा कि मिलिशिया ने पृथ्वी के सबसे पवित्र स्थलों मक्का और मदीना पर, राजधानी रियाद पर, तथा अबहा, खमीस मुशैत, जाजान, नजरान, ताइफ और यनबु शहरों पर हमले किए हैं। इसके अलावा दक्षिणी लाल सागर और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में सऊदी जहाजों को भी निशाना बनाया गया है।
क्या किसी देश के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा और अपने पवित्र स्थलों की रक्षा से बड़ी जिम्मेदारी हो सकती है? मंत्रालय का बयान इसी बुनियादी सवाल के इर्द-गिर्द घूमता है।
बयान में कहा गया है कि 2014 में यमन की वैध सरकार के खिलाफ आतंकवादी हूती मिलिशिया के तख्तापलट के बाद से सऊदी अरब ने यमन में व्यापक और स्थायी राजनीतिक समाधान का समर्थन करने के लिए लगातार और अथक प्रयास किए हैं। लेकिन शांति को अस्वीकार करते हुए मिलिशिया ने सैन्य तनाव बढ़ाना चुना और यमन तथा भाईचारे वाले यमनी लोगों को और अधिक मानवीय और आर्थिक कष्ट में धकेल दिया, जो बाहरी एजेंडों की पूर्ति करता है।
क्या शांति की पहल का जवाब सैन्य तनाव से देना किसी समुदाय के हित में हो सकता है? यह सवाल बयान की मुख्य चिंता को सामने रखता है।
सऊदी अरब ने दोहराया कि उसे अपने क्षेत्र, संसाधनों, संप्रभुता तथा अपने नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा की रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अपनी सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अंतर्निहित अधिकार है। मंत्रालय ने प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल, यमनी सरकार और भाईचारे वाले यमनी लोगों को तख्तापलट समाप्त करने तथा राज्य और उसकी संस्थाओं को आतंकवादी हूती मिलिशिया के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए अपना पूर्ण राजनीतिक और सैन्य समर्थन भी दोहराया।
क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय अपनी जिम्मेदारियों के प्रति उतना ही सजग है जितना वह अपने बयानों में दिखता है? यह प्रश्न बयान के अगले हिस्से की ओर संकेत करता है।
मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से अपनी जिम्मेदारियां निभाने, सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों को लागू करने और आतंकवादी हूती मिलिशिया का सामना करने तथा यमन, क्षेत्र और विश्व के लिए उससे उत्पन्न खतरे को समाप्त करने में यमन की वैध सरकार को पूर्ण समर्थन देने की अपील दोहराई।
बयान में मक्का और मदीना का उल्लेख विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इन्हें पृथ्वी के सबसे पवित्र स्थल बताया गया है। इसके साथ ही रियाद, अबहा, खमीस मुशैत, जाजान, नजरान, ताइफ और यनबु का नाम लेना दर्शाता है कि हमलों का दायरा देश के कई हिस्सों तक फैला हुआ है। दक्षिणी लाल सागर और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में सऊदी जहाजों को निशाना बनाना समुद्री मार्गों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा भी सामने रखता है।
क्या समुद्री व्यापार मार्गों पर हमले केवल एक देश की चिंता का विषय हैं, या यह पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं? यह सवाल बयान में उठाए गए आर्थिक पहलू से जुड़ा है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब का रुख आत्मरक्षा के अधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में है। बयान में यह भी कहा गया कि मिलिशिया ने शांति को अस्वीकार करते हुए सैन्य तनाव का रास्ता चुना, जिससे यमन और यमनी लोगों को और अधिक मानवीय और आर्थिक कष्ट झेलना पड़ा।
क्या तख्तापलट के बाद से किए गए शांति प्रयासों का कोई ठोस परिणाम सामने आया है? बयान इस प्रश्न का सीधा उत्तर नहीं देता, लेकिन यह स्वीकार करता है कि सऊदी अरब ने व्यापक और स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए लगातार प्रयास किए हैं।
बयान में यमन की वैध सरकार और प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रति पूर्ण राजनीतिक और सैन्य समर्थन की बात दोहराई गई है। साथ ही यह भी कहा गया कि राज्य और उसकी संस्थाओं को मिलिशिया के नियंत्रण से मुक्त कराना लक्ष्य है।
क्या क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यमन में राज्य की संस्थाओं का बहाल होना अनिवार्य शर्त है? मंत्रालय का बयान इसी दिशा में इशारा करता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की गई अपील में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों का विशेष उल्लेख किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि उन्हें अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए और सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों को लागू करना चाहिए।
क्या प्रस्तावों का क्रियान्वयन ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय की विश्वसनीयता की कसौटी है? यह सवाल बयान की अपील के केंद्र में है।
बयान में यह भी कहा गया कि मिलिशिया के हमले यमन, क्षेत्र और विश्व के लिए खतरा पैदा करते हैं। मंत्रालय ने इस खतरे को समाप्त करने के लिए यमन की वैध सरकार को पूर्ण समर्थन देने की बात दोहराई।
एसपीए की ओर से जारी इस बयान में हमलों की तारीखें, स्थानों के अलावा किसी घटना का विस्तृत विवरण, हताहतों की संख्या या क्षति का आकलन नहीं दिया गया है। बयान में यह भी नहीं बताया गया कि किन विशिष्ट हमलों के संदर्भ में यह निंदा की गई है।
क्या इस तरह के बयानों के बाद ठोस कदम उठाए जाते हैं, यह देखना बाकी है। फिलहाल मंत्रालय ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जिम्मेदारी निभाने की अपील दोहराई है।
सऊदी अरब ने किन हमलों की निंदा की है? विदेश मंत्रालय ने हूती मिलिशिया द्वारा नागरिकों तथा नागरिक और आर्थिक ठिकानों पर लगातार किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की। बयान में मक्का, मदीना, रियाद, अबहा, खमीस मुशैत, जाजान, नजरान, ताइफ और यनबु का उल्लेख है। दक्षिणी लाल सागर और बाब अल-मंदब में सऊदी जहाजों को निशाना बनाने की भी निंदा की गई।
बयान में यमन को लेकर क्या कहा गया? मंत्रालय ने कहा कि 2014 में तख्तापलट के बाद से सऊदी अरब ने यमन में व्यापक और स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए लगातार प्रयास किए। लेकिन मिलिशिया ने शांति अस्वीकार कर सैन्य तनाव बढ़ाया, जिससे यमनी लोगों को मानवीय और आर्थिक कष्ट हुआ। सऊदी अरब ने यमन की वैध सरकार और प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रति पूर्ण समर्थन दोहराया।
सऊदी अरब ने अपने बचाव का क्या अधिकार बताया? बयान के अनुसार सऊदी अरब को अपने क्षेत्र, संसाधनों, संप्रभुता तथा नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा की रक्षा करने का अंतर्निहित अधिकार है। यह अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार है और इसके तहत सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि मिलिशिया के हमले यमन, क्षेत्र और विश्व के लिए खतरा हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या अपील की गई? मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से अपनी जिम्मेदारियां निभाने की अपील दोहराई। इसमें सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों को लागू करने की बात कही गई। साथ ही यमन की वैध सरकार को मिलिशिया का सामना करने और उससे उत्पन्न खतरे को समाप्त करने में पूर्ण समर्थन देने का आग्रह किया गया।
बयान में कौन-सी जानकारी नहीं दी गई? एसपीए के बयान में हमलों की तारीखें और स्थानों के अलावा घटनाओं का विस्तृत विवरण नहीं है। हताहतों की संख्या या क्षति का आकलन भी नहीं दिया गया। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि किन विशिष्ट हमलों के संदर्भ में निंदा की गई। बयान में केवल मंत्रालय का रुख और अपील शामिल है।