रियाद में सऊदी फूड एंड ड्रग अथॉरिटी (SFDA) ने वयस्क रोगियों में आइडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) के इलाज के लिए Jascayd (nerandomilast) के पंजीकरण को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब IPF जैसी दुर्लभ और लगातार बढ़ती फेफड़ों की बीमारी के इलाज के लिए उपलब्ध विकल्प सीमित माने जाते हैं।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने 3 अक्टूबर 2026 को बताया, इस दवा को पहले SFDA ऑर्फन ड्रग प्रोग्राम के तहत ऑर्फन ड्रग का दर्जा दिया गया था। यह दर्जा उन दवाओं को मिलता है जो दुर्लभ रोगों के इलाज के लिए विकसित की जाती हैं।
आइडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस एक दुर्लभ और प्रगतिशील फेफड़ों की बीमारी है, जिसमें फेफड़ों में लगातार रेशेदार निशान (फाइब्रस स्कार टिश्यू) बनते रहते हैं। यह निशान स्वस्थ फेफड़ों के ऊतकों की जगह ले लेता है, जिससे गंभीर सांस फूलना और लगातार खांसी होती है। क्या ऐसी बीमारी में मरीजों और उनके परिवारों के लिए हर नई मंजूरी एक बड़ी राहत नहीं होती?
Jascayd एक फॉस्फोडाइएस्टरेज़ 4 (PDE4) इनहिबिटर है, जो PDE4B सबटाइप को प्राथमिकता से रोकता है। यह एंजाइम फेफड़ों में पाया जाता है और फाइब्रोसिस तथा सूजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। PDE4B को अवरुद्ध करके यह कोशिकाओं के भीतर cAMP के स्तर को बढ़ाता है और प्रो-फाइब्रोटिक ग्रोथ फैक्टर्स तथा इंफ्लेमेटरी साइटोकाइन्स की अभिव्यक्ति को कम करता है, जो IPF रोगियों में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।
SFDA ने दवा की प्रभावकारिता, सुरक्षा और गुणवत्ता के व्यापक मूल्यांकन के बाद मंजूरी दी। क्या दुर्लभ बीमारियों के इलाज में नियामकीय मूल्यांकन की गहराई ही भरोसे की असली कसौटी नहीं है?
निर्णायक फेज 3 FIBRONEER-IPF परीक्षण में IPF वाले 1,177 रोगियों को बेतरतीब ढंग से 52 सप्ताह तक Jascayd 9 मिलीग्राम दिन में दो बार, Jascayd 18 मिलीग्राम दिन में दो बार, या प्लेसीबो दिया गया। फोर्स्ड वाइटल कैपेसिटी (FVC) में गिरावट Jascayd 18 मिलीग्राम के साथ 115 मिलीलीटर और Jascayd 9 मिलीग्राम के साथ 139 मिलीलीटर रही, जबकि प्लेसीबो में यह 184 मिलीलीटर थी। प्लेसीबो की तुलना में अनुमानित उपचार अंतर क्रमशः 69 मिलीलीटर और 45 मिलीलीटर रहा। दोनों खुराकों ने प्लेसीबो की तुलना में FVC में गिरावट को सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण ढंग से कम किया।
इन निष्कर्षों को 147 IPF रोगियों पर किए गए पहले के फेज 2 अध्ययन से समर्थन मिला, जिसमें Jascayd 18 मिलीग्राम दिन में दो बार ने 12 सप्ताह बाद प्लेसीबो की तुलना में FVC पर अनुकूल प्रभाव दिखाया। क्या यह सोचने का समय नहीं है कि छोटे अध्ययनों से बड़े परीक्षणों तक का सफर कितना जरूरी है?
SFDA ने बताया कि सबसे अधिक रिपोर्ट किए गए दुष्प्रभावों में दस्त, मतली, वजन घटना, भूख में कमी और पीठ दर्द शामिल हैं। उपचार चिकित्सकीय निगरानी में और स्वीकृत उत्पाद जानकारी के अनुसार ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। क्या मरीजों के लिए यह जानना जरूरी नहीं कि हर असरकारी दवा के साथ सावधानी भी जुड़ी होती है?
IPF में फेफड़ों के ऊतकों का लगातार निशान बनना स्वस्थ ऊतकों को बदल देता है, जिससे सांस लेने में गंभीर तकलीफ और लगातार खांसी होती है। ऐसी स्थिति में FVC में गिरावट को कम करना इलाज का एक अहम लक्ष्य माना जाता है। FIBRONEER-IPF परीक्षण में दोनों खुराकों ने प्लेसीबो की तुलना में इस गिरावट को कम दिखाया। क्या यह रोगियों के लिए जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में एक अर्थपूर्ण कदम नहीं है?
दवा को पहले ऑर्फन ड्रग का दर्जा मिलना यह दर्शाता है कि इसे दुर्लभ रोग के इलाज के रूप में मान्यता दी गई थी। SFDA की मंजूरी प्रभावकारिता, सुरक्षा और गुणवत्ता के व्यापक मूल्यांकन पर आधारित बताई गई है। क्या दुर्लभ रोगों के लिए बनी दवाओं को नियामकीय मान्यता मिलना शोधकर्ताओं और मरीजों दोनों के लिए प्रोत्साहन नहीं है?
फेज 3 परीक्षण में 1,177 रोगियों का समावेश और 52 सप्ताह की अवधि इसे एक बड़ा और विस्तृत अध्ययन बनाती है। फेज 2 अध्ययन में 147 रोगियों को 12 सप्ताह तक देखा गया था। दोनों चरणों के नतीजों ने मिलकर दवा के पक्ष में आधार तैयार किया। क्या यह नहीं दिखाता कि दवा विकास में धैर्य और चरणबद्ध परीक्षण कितने अनिवार्य हैं?
मंजूरी के बाद उपचार चिकित्सकीय निगरानी में और स्वीकृत उत्पाद जानकारी के अनुसार दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट किए गए दुष्प्रभावों में दस्त, मतली, वजन घटना, भूख में कमी और पीठ दर्द शामिल हैं। क्या मरीजों को इन संभावित असरों के बारे में पहले से जानकारी होना इलाज को अधिक सुरक्षित नहीं बनाता?
एसपीए की खबर में यह नहीं बताया गया कि दवा कब से बाजार में उपलब्ध होगी, इसकी कीमत क्या होगी, या इसे किन अस्पतालों और केंद्रों में उपलब्ध कराया जाएगा। यह भी स्पष्ट नहीं है कि मंजूरी के बाद कितने मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा। क्या ऐसी जानकारी का इंतजार मरीजों और डॉक्टरों दोनों के लिए स्वाभाविक नहीं है?
आइडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस में फेफड़ों में रेशेदार निशान बनने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। यह निशान स्वस्थ ऊतकों की जगह लेता है और सांस फूलने तथा खांसी को बढ़ाता है। ऐसे में इलाज का उद्देश्य रोग की प्रगति को धीमा करना और मरीज की स्थिति को स्थिर रखना होता है। क्या FVC जैसे मापदंड पर दिखा सुधार इस दिशा में भरोसा बढ़ाने वाला संकेत नहीं है?
SFDA द्वारा दवा की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता का मूल्यांकन किया गया। फेज 3 परीक्षण में 18 मिलीग्राम खुराक ने FVC गिरावट को 115 मिलीलीटर तक सीमित दिखाया, जबकि प्लेसीबो में यह 184 मिलीलीटर थी। 9 मिलीग्राम खुराक में यह गिरावट 139 मिलीलीटर रही। दोनों खुराकों के नतीजे सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण बताए गए। क्या खुराक के अंतर से मिले नतीजे इलाज को व्यक्तिगत बनाने की जरूरत की ओर इशारा नहीं करते?
फेज 2 अध्ययन में 18 मिलीग्राम खुराक ने 12 सप्ताह बाद प्लेसीबो की तुलना में FVC पर अनुकूल प्रभाव दिखाया। यह अध्ययन 147 रोगियों पर किया गया था। फेज 3 परीक्षण में 1,177 रोगियों को शामिल कर नतीजों को और मजबूती दी गई। क्या छोटे अध्ययन से बड़े परीक्षण तक की यात्रा दवा की विश्वसनीयता का पैमाना नहीं होती?
दवा को PDE4 इनहिबिटर बताया गया है, जो PDE4B सबटाइप को प्राथमिकता से रोकता है। यह एंजाइम फेफड़ों में मौजूद रहता है और फाइब्रोसिस तथा सूजन में भूमिका निभाता है। PDE4B को रोककर कोशिकाओं में cAMP का स्तर बढ़ता है और प्रो-फाइब्रोटिक ग्रोथ फैक्टर्स तथा इंफ्लेमेटरी साइटोकाइन्स की अभिव्यक्ति घटती है। क्या इस क्रियाविधि को समझना मरीजों के लिए इलाज पर भरोसा बनाने में मदद करता है?
SFDA की मंजूरी के बाद यह दवा वयस्क IPF रोगियों के इलाज के लिए पंजीकृत मानी जाएगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उपचार चिकित्सकीय निगरानी में ही किया जाना चाहिए। सबसे आम दुष्प्रभावों में दस्त, मतली, वजन घटना, भूख में कमी और पीठ दर्द शामिल हैं। क्या इलाज के साथ निगरानी और जागरूकता का यह संतुलन सबसे जरूरी नहीं है?
एसपीए की खबर में यह नहीं बताया गया कि मंजूरी के बाद दवा की आपूर्ति कैसे होगी, इसे किन मरीजों को प्राथमिकता दी जाएगी, या भविष्य में इस पर और अध्ययन होंगे या नहीं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ऑर्फन ड्रग दर्जा मिलने का मंजूरी प्रक्रिया पर क्या असर पड़ा। क्या ऐसे सवालों के जवाब मरीजों के लिए अगली अहम जानकारी नहीं होंगे?
SFDA ने किस दवा और किस बीमारी के लिए मंजूरी दी? सऊदी फूड एंड ड्रग अथॉरिटी ने Jascayd (nerandomilast) के पंजीकरण को वयस्क रोगियों में आइडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) के इलाज के लिए मंजूरी दी है। एसपीए के अनुसार दवा को पहले SFDA ऑर्फन ड्रग प्रोग्राम के तहत ऑर्फन ड्रग का दर्जा दिया गया था। IPF एक दुर्लभ, प्रगतिशील फेफड़ों की बीमारी है जिसमें फेफड़ों में लगातार रेशेदार निशान बनते हैं।
Jascayd किस तरह काम करती है? Jascayd एक फॉस्फोडाइएस्टरेज़ 4 (PDE4) इनहिबिटर है जो PDE4B सबटाइप को प्राथमिकता से रोकता है। यह एंजाइम फेफड़ों में पाया जाता है और फाइब्रोसिस तथा सूजन में भूमिका निभाता है। PDE4B को रोककर यह कोशिकाओं में cAMP का स्तर बढ़ाता है और प्रो-फाइब्रोटिक ग्रोथ फैक्टर्स तथा इंफ्लेमेटरी साइटोकाइन्स की अभिव्यक्ति घटाता है, जो IPF रोगियों में अधिक पाए जाते हैं।
फेज 3 FIBRONEER-IPF परीक्षण में क्या नतीजे मिले? परीक्षण में IPF वाले 1,177 रोगियों को 52 सप्ताह तक Jascayd 9 मिलीग्राम दिन में दो बार, 18 मिलीग्राम दिन में दो बार, या प्लेसीबो दिया गया। FVC में गिरावट 18 मिलीग्राम के साथ 115 मिलीलीटर और 9 मिलीग्राम के साथ 139 मिलीलीटर रही, जबकि प्लेसीबो में 184 मिलीलीटर थी। प्लेसीबो की तुलना में अनुमानित अंतर क्रमशः 69 और 45 मिलीलीटर रहा।
क्या फेज 2 अध्ययन के नतीजों ने भी समर्थन दिया? एसपीए के अनुसार 147 IPF रोगियों पर किए गए फेज 2 अध्ययन में Jascayd 18 मिलीग्राम दिन में दो बार ने 12 सप्ताह बाद प्लेसीबो की तुलना में FVC पर अनुकूल प्रभाव दिखाया। यही निष्कर्ष बाद में फेज 3 परीक्षण से समर्थन पाने वाले नतीजों का आधार बना। दोनों चरणों के अध्ययनों ने मिलकर दवा के पक्ष में आधार तैयार किया।
दवा के सबसे आम दुष्प्रभाव कौन-से बताए गए हैं? SFDA ने बताया कि सबसे अधिक रिपोर्ट किए गए दुष्प्रभावों में दस्त, मतली, वजन घटना, भूख में कमी और पीठ दर्द शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार उपचार चिकित्सकीय निगरानी में और स्वीकृत उत्पाद जानकारी के अनुसार ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मंजूरी प्रभावकारिता, सुरक्षा और गुणवत्ता के व्यापक मूल्यांकन के बाद दी गई।
एसपीए की खबर में क्या जानकारी नहीं दी गई? एसपीए की खबर में यह नहीं बताया गया कि दवा कब से बाजार में उपलब्ध होगी, उसकी कीमत क्या होगी, या इसे किन अस्पतालों और केंद्रों में उपलब्ध कराया जाएगा। यह भी स्पष्ट नहीं है कि मंजूरी के बाद कितने मरीजों को लाभ मिल सकेगा या भविष्य में और अध्ययन होंगे या नहीं। खबर में ऑर्फन ड्रग दर्जे का मंजूरी प्रक्रिया पर असर भी नहीं बताया गया।





