सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट ने रमज़ान 29, 1446 हिजरी यानी 29 मार्च 2025 की शनिवार शाम को शव्वाल के चाँद को देखने की अपील की है। यह अपील पूरे सऊदी अरब के मुसलमानों से की गई है।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, सुप्रीम कोर्ट ने आज एक घोषणा में कहा कि जो भी व्यक्ति नंगी आँखों से या दूरबीन के ज़रिए शव्वाल का चाँद देखे, वह निकटतम अदालत में जाकर अपनी गवाही दर्ज कराए।
यह घोषणा रियाद से 27 मार्च 2025 को जारी हुई। एसपीए के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार यह सूचना 13:24 बजे और ग्रीनविच मीन टाइम के अनुसार 10:24 बजे जारी की गई।
चाँद देखने की प्रक्रिया और गवाही
सुप्रीम कोर्ट की अपील में साफ कहा गया है कि चाँद देखने वाले व्यक्ति को निकटतम अदालत में पहुँचकर अपनी गवाही दर्ज करानी होगी। यह प्रक्रिया इस्लामी कैलेंडर में महीने के अंत और नए महीने की शुरुआत तय करने के लिए अपनाई जाती है।
क्या आप जानते हैं कि चाँद देखने की गवाही अदालत में दर्ज कराना क्यों ज़रूरी होता है? इस्लामी परंपरा में चाँद का दिखना ही नए महीने की शुरुआत का आधार माना जाता है। इसी आधार पर ईद और अन्य धार्मिक अवसर तय होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चाँद को नंगी आँखों से देखा जा सकता है या दूरबीन की मदद से। दोनों ही तरीकों से देखे गए चाँद की गवाही मान्य होगी।
क्या आपने कभी चाँद देखने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया है? सऊदी अरब में यह प्रक्रिया हर साल रमज़ान और शव्वाल के महीने में दोहराई जाती है।
एसपीए की रिपोर्ट के अनुसार, यह अपील 29 मार्च 2025 की शाम के लिए की गई है। रमज़ान 29, 1446 हिजरी उसी दिन पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जो भी व्यक्ति चाँद देखे, वह तुरंत निकटतम अदालत में जाकर अपनी गवाही दर्ज कराए। इससे चाँद की पुष्टि हो सकेगी और नए महीने की शुरुआत का फैसला लिया जा सकेगा।
क्या आप जानते हैं कि चाँद देखने की गवाही कैसे दर्ज होती है? अदालत में गवाही देने वाले व्यक्ति को अपनी पहचान और चाँद देखने की जानकारी देनी होती है। इसके बाद अदालत उस गवाही को दर्ज करती है।
एसपीए ने अपनी रिपोर्ट में यह नहीं बताया कि चाँद देखने के लिए किसी विशेष स्थान या समिति का गठन किया गया है या नहीं। रिपोर्ट में सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की अपील का ज़िक्र है।
सऊदी अरब में चाँद देखने की परंपरा इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से चलती है। रमज़ान के बाद शव्वाल का महीना शुरू होता है, जिसमें ईद उल-फ़ितर मनाई जाती है।
क्या आप जानते हैं कि ईद उल-फ़ितर कैसे तय होती है? शव्वाल का चाँद दिखने के बाद ही ईद की तारीख तय होती है। अगर चाँद नहीं दिखता, तो रमज़ान 30 दिन का पूरा किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट की अपील के मुताबिक, चाँद देखने वाले व्यक्ति को निकटतम अदालत में जाकर गवाही दर्ज करानी होगी। यह प्रक्रिया सऊदी अरब में हर साल अपनाई जाती है।
एसपीए की रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि चाँद देखने की पुष्टि के बाद क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी। रिपोर्ट सिर्फ अपील तक सीमित है।
क्या आप जानते हैं कि चाँद देखने की गवाही कितनी महत्वपूर्ण होती है? यह गवाही ही नए महीने की शुरुआत का आधार बनती है। इसी आधार पर ईद और अन्य धार्मिक अवसर तय होते हैं।
सऊदी अरब में चाँद देखने की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट हर साल अपील जारी करता है। यह अपील रमज़ान के आखिरी दिनों में की जाती है।
एसपीए के मुताबिक, यह अपील 27 मार्च 2025 को जारी की गई। इसमें मुस्लिमों से शनिवार शाम को चाँद देखने की अपील की गई है।
क्या आप जानते हैं कि चाँद देखने के लिए किस तरह के उपकरण इस्तेमाल किए जा सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, नंगी आँखों के अलावा दूरबीन का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की अपील में यह साफ किया गया है कि चाँद देखने वाले व्यक्ति को निकटतम अदालत में जाकर अपनी गवाही दर्ज करानी होगी। इससे चाँद की पुष्टि हो सकेगी।
एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि चाँद देखने की गवाही के बाद किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाती है। रिपोर्ट में सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की अपील का ज़िक्र है।
क्या आप जानते हैं कि सऊदी अरब में चाँद देखने की परंपरा कितनी पुरानी है? यह परंपरा इस्लामी कैलेंडर के साथ जुड़ी हुई है। हर साल रमज़ान और शव्वाल के महीने में यह प्रक्रिया दोहराई जाती है।
सुप्रीम कोर्ट की अपील के मुताबिक, चाँद देखने वाले व्यक्ति को निकटतम अदालत में जाकर गवाही दर्ज करानी होगी। यह गवाही नए महीने की शुरुआत तय करने में मदद करती है।
एसपीए की रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि चाँद देखने की गवाही कितने लोगों की ज़रूरी होती है। रिपोर्ट सिर्फ अपील तक सीमित है।
क्या आप जानते हैं कि चाँद देखने की गवाही के बाद ईद की तारीख कैसे तय होती है? शव्वाल का चाँद दिखने के बाद ही ईद की तारीख तय होती है। अगर चाँद नहीं दिखता, तो रमज़ान 30 दिन का पूरा किया जाता है।
सऊदी अरब में चाँद देखने की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट हर साल अपील जारी करता है। यह अपील रमज़ान के आखिरी दिनों में की जाती है।
एसपीए के मुताबिक, यह अपील 27 मार्च 2025 को जारी की गई। इसमें मुस्लिमों से शनिवार शाम को चाँद देखने की अपील की गई है।
क्या आप जानते हैं कि चाँद देखने के लिए किस तरह के उपकरण इस्तेमाल किए जा सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, नंगी आँखों के अलावा दूरबीन का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की अपील में यह साफ किया गया है कि चाँद देखने वाले व्यक्ति को निकटतम अदालत में जाकर अपनी गवाही दर्ज करानी होगी। इससे चाँद की पुष्टि हो सकेगी।
एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि चाँद देखने की गवाही के बाद किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाती है। रिपोर्ट में सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की अपील का ज़िक्र है।
क्या आप जानते हैं कि सऊदी अरब में चाँद देखने की परंपरा कितनी पुरानी है? यह परंपरा इस्लामी कैलेंडर के साथ जुड़ी हुई है। हर साल रमज़ान और शव्वाल के महीने में यह प्रक्रिया दोहराई जाती है।
सुप्रीम कोर्ट की अपील के मुताबिक, चाँद देखने वाले व्यक्ति को निकटतम अदालत में जाकर गवाही दर्ज करानी होगी। यह गवाही नए महीने की शुरुआत तय करने में मदद करती है।
एसपीए की रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि चाँद देखने की गवाही कितने लोगों की ज़रूरी होती है। रिपोर्ट सिर्फ अपील तक सीमित है।
क्या आप जानते हैं कि चाँद देखने की गवाही के बाद ईद की तारीख कैसे तय होती है? शव्वाल का चाँद दिखने के बाद ही ईद की तारीख तय होती है। अगर चाँद नहीं दिखता, तो रमज़ान 30 दिन का पूरा किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या अपील की है? सुप्रीम कोर्ट ने सऊदी अरब के मुस्लिमों से शव्वाल का चाँद शनिवार शाम को देखने की अपील की है। यह अपील रमज़ान 29, 1446 हिजरी यानी 29 मार्च 2025 के लिए की गई है। एसपीए के मुताबिक, चाँद नंगी आँखों या दूरबीन से देखा जा सकता है।
चाँद देखने के बाद क्या करना होगा? सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, जो भी व्यक्ति चाँद देखे, उसे निकटतम अदालत में जाकर अपनी गवाही दर्ज करानी होगी। यह गवाही नए महीने की शुरुआत तय करने में मदद करती है। एसपीए की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
यह अपील कब जारी की गई? एसपीए के मुताबिक, यह अपील 27 मार्च 2025 को जारी की गई। स्थानीय समयानुसार यह सूचना 13:24 बजे और ग्रीनविच मीन टाइम के अनुसार 10:24 बजे जारी की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अपील रियाद से जारी हुई।
चाँद देखने के लिए कौन-से उपकरण इस्तेमाल हो सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, चाँद को नंगी आँखों से या दूरबीन के ज़रिए देखा जा सकता है। दोनों ही तरीकों से देखे गए चाँद की गवाही मान्य होगी। एसपीए की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है।
क्या रिपोर्ट में गवाही की संख्या का ज़िक्र है? एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि चाँद देखने की गवाही कितने लोगों की ज़रूरी होती है। रिपोर्ट में सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की अपील का ज़िक्र है। रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि गवाही के बाद क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।