अल-जौफ क्षेत्र ने सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव के तहत अपने 2030 के वनीकरण लक्ष्य को चार साल पहले ही पार कर लिया है और 103.5 प्रतिशत पूर्णता दर हासिल की है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय हरितीकरण कार्यक्रम और राष्ट्रीय वनस्पति आवरण विकास एवं मरुस्थलीकरण से मुकाबला केंद्र के सहयोग से दर्ज की गई है।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2026 के बीच क्षेत्र में 88 लाख पेड़ लगाए गए, जो 2030 के लिए निर्धारित 85 लाख पेड़ के लक्ष्य से अधिक है। सकाका से जारी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि लक्ष्य से आगे निकलना केवल एक संख्या नहीं, बल्कि क्षेत्र में चल रहे पर्यावरणीय कार्यों की गति का संकेत है।
भूमि पुनर्स्थापन के मोर्चे पर अल-जौफ ने अब तक 1,55,000 हेक्टेयर क्षरित भूमि को बहाल किया है, जो 2030 के लिए तय 2,26,000 हेक्टेयर के लक्ष्य का 68.7 प्रतिशत है। यानी वनीकरण में क्षेत्र लक्ष्य से आगे है, जबकि भूमि बहाली में अभी लगभग एक-तिहाई काम बाकी है। क्या यह अंतर बताता है कि पेड़ लगाना भूमि को पूरी तरह ठीक करने से आसान है?
एसपीए के अनुसार यह पड़ाव सऊदी विजन 2030 के पर्यावरणीय स्थिरता लक्ष्यों की ओर तेज प्रगति को दर्शाता है, जिनका उद्देश्य मरुस्थलीकरण से मुकाबला, प्राकृतिक वनस्पति आवरण का पुनर्स्थापन और साम्राज्य भर में हरित क्षेत्रों का विस्तार है। अल-जौफ उत्तरी सऊदी अरब का क्षेत्र है, जहां सकाका प्रशासनिक केंद्र है और जहां का परिदृश्य शुष्क व अर्ध-शुष्क है। ऐसे में हर पेड़ का बचना और बढ़ना अपने आप में एक चुनौती है। क्या शुष्क क्षेत्र में 88 लाख पेड़ों की गिनती उनके जीवित रहने की गारंटी भी है?
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 2021 से 2026 तक की छह साल की अवधि में यह आंकड़ा जुटाया गया, जबकि लक्ष्य 2030 के लिए तय था। इसका अर्थ है कि क्षेत्र ने निर्धारित समय से चार साल पहले ही वनीकरण का आंकड़ा पार कर लिया। 103.5 प्रतिशत की पूर्णता दर बताती है कि लक्ष्य से लगभग तीन प्रतिशत अधिक पेड़ लगाए गए। 85 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 88 लाख पेड़ लगाना मात्रा के लिहाज से बड़ा है, लेकिन क्या गुणवत्ता और प्रजातियों के चयन पर भी उतना ही ध्यान दिया गया?
भूमि पुनर्स्थापन का आंकड़ा 1,55,000 हेक्टेयर है, जो 2,26,000 हेक्टेयर के 2030 लक्ष्य का 68.7 प्रतिशत है। इसे देखते हुए सवाल उठता है कि बाकी 71,000 हेक्टेयर को बहाल करने में कितना समय लगेगा और क्या शेष चार साल में यह लक्ष्य पूरा हो पाएगा? एसपीए ने यह नहीं बताया कि बहाल की गई भूमि में से कितनी हिस्सेदारी चरागाह, कितनी वन और कितनी कृषि योग्य भूमि की है। क्या बिना इस ब्योरे के भूमि बहाली की सफलता मापी जा सकती है?
सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव, राष्ट्रीय हरितीकरण कार्यक्रम और राष्ट्रीय वनस्पति आवरण विकास एवं मरुस्थलीकरण से मुकाबला केंद्र — तीनों संस्थाओं का नाम रिपोर्ट में साथ आया है। यह संकेत देता है कि अल-जौफ का काम अकेले क्षेत्रीय प्रयास नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ढांचे के भीतर चल रहा है। लेकिन क्या तीन संस्थाओं के समन्वय से जमीन पर काम तेज हुआ या केवल रिपोर्टिंग का दायरा बढ़ा?
मरुस्थलीकरण से मुकाबला सऊदी अरब के लिए केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है। शुष्क क्षेत्रों में वनस्पति आवरण घटने से धूल भरी आंधियां, भूमि क्षरण और चरागाहों का दबाव बढ़ता है। अल-जौफ जैसे क्षेत्र में हरित क्षेत्र का विस्तार इन प्रभावों को कम करने की कोशिश है। रिपोर्ट के अनुसार लक्ष्य प्राकृतिक वनस्पति आवरण को बहाल करना और हरित क्षेत्रों का विस्तार करना है। क्या इन पेड़ों से स्थानीय समुदायों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा?
यह उपलब्धि ऐसे समय दर्ज हुई है जब सऊदी विजन 2030 के पर्यावरणीय लक्ष्यों की समीक्षा लगातार हो रही है। अल-जौफ का 103.5 प्रतिशत का आंकड़ा उन क्षेत्रों के लिए उदाहरण बन सकता है जो अभी अपने लक्ष्यों से दूर हैं। लेकिन हर क्षेत्र की जलवायु, भूमि और पानी की उपलब्धता अलग है। क्या अल-जौफ का मॉडल दूसरे क्षेत्रों में ज्यों का त्यों दोहराया जा सकता है?
एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि लगाए गए 88 लाख पेड़ों में कौन-कौन सी प्रजातियां शामिल हैं, कितने पेड़ जीवित बचे हैं, और सिंचाई के लिए पानी का स्रोत क्या रहा। यह भी स्पष्ट नहीं है कि 1,55,000 हेक्टेयर बहाल भूमि का मूल्यांकन किस पद्धति से किया गया। रिपोर्ट में लागत, बजट या कार्यक्रम से जुड़े ठेकेदारों का कोई उल्लेख नहीं है। क्या इन ब्योरों के बिना उपलब्धि की पूरी तस्वीर बनती है?
अल-जौफ की उपलब्धि यह भी दिखाती है कि वनीकरण अभियान में समय से पहले लक्ष्य हासिल करना संभव है, बशर्ते निगरानी और क्रियान्वयन लगातार हो। 2021 से 2026 के बीच का यह सफर छह साल में पूरा हुआ, जबकि लक्ष्य 2030 तक का था। अब सवाल यह है कि आने वाले चार सालों में क्षेत्र इस गति को बनाए रखेगा या नए लक्ष्य तय किए जाएंगे। एसपीए ने इस पर कोई संकेत नहीं दिया।
भूमि बहाली के 68.7 प्रतिशत आंकड़े को देखें तो साफ है कि वनीकरण और भूमि सुधार दो अलग गति से चल रहे हैं। पेड़ लगाना अपेक्षाकृत तेज दिखता है, जबकि क्षरित भूमि को उत्पादक बनाना धीमा। क्या यही वजह है कि वनीकरण के आंकड़े पहले लक्ष्य तक पहुंचे? रिपोर्ट में इस अंतर की व्याख्या नहीं दी गई।
राष्ट्रीय स्तर पर सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव का मकसद पूरे साम्राज्य में हरित आवरण बढ़ाना है। अल-जौफ का योगदान इस लक्ष्य का एक हिस्सा है। 88 लाख पेड़ और 1,55,000 हेक्टेयर बहाल भूमि — ये दो आंकड़े क्षेत्रीय स्तर पर मापे गए हैं। एसपीए ने यह नहीं बताया कि इनका राष्ट्रीय आंकड़ों में कितना हिस्सा है। क्या क्षेत्रीय सफलता को राष्ट्रीय प्रगति से जोड़े बिना आकलन संभव है?
अल-जौफ की जलवायु और भू-आकृति को देखते हुए यहां वनीकरण के लिए सही प्रजातियों का चयन अहम हो जाता है। रिपोर्ट में प्रजातियों का जिक्र नहीं है, न ही यह बताया गया कि स्थानीय समुदायों को कार्यक्रम में किस रूप में शामिल किया गया। बिना स्थानीय भागीदारी के दीर्घकालिक रखरखाव मुश्किल होता है। क्या आने वाले वर्षों में इन पेड़ों की देखभाल की योजना भी उतनी ही मजबूत है?
एसपीए की रिपोर्ट 10 अक्टूबर 2026 को सकाका से जारी हुई। इसमें 2021 से 2026 तक के आंकड़े दिए गए हैं और 2030 के लक्ष्यों से तुलना की गई है। रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि भूमि बहाली के शेष 31.3 प्रतिशत हिस्से के लिए क्या समय-सारणी है। यही वह जगह है जहां रिपोर्ट चुप हो जाती है और पाठक के सामने सवाल खड़े रह जाते हैं।
अल-जौफ ने कौन-सा लक्ष्य चार साल पहले पार किया? एसपीए के अनुसार अल-जौफ ने सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव के तहत अपने 2030 के वनीकरण लक्ष्य को चार साल पहले पार कर लिया और 103.5 प्रतिशत पूर्णता दर हासिल की। 2021 से 2026 के बीच क्षेत्र में 88 लाख पेड़ लगाए गए, जबकि 2030 के लिए लक्ष्य 85 लाख पेड़ था। यह काम राष्ट्रीय हरितीकरण कार्यक्रम और राष्ट्रीय वनस्पति आवरण विकास एवं मरुस्थलीकरण से मुकाबला केंद्र के सहयोग से हुआ।
भूमि पुनर्स्थापन में कितनी प्रगति हुई है? रिपोर्ट के अनुसार अल-जौफ ने अब तक 1,55,000 हेक्टेयर क्षरित भूमि को बहाल किया है, जो 2030 के लिए तय 2,26,000 हेक्टेयर के लक्ष्य का 68.7 प्रतिशत है। यानी वनीकरण में क्षेत्र लक्ष्य से आगे निकल गया, जबकि भूमि बहाली में अभी लगभग एक-तिहाई काम बाकी है। एसपीए ने शेष 71,000 हेक्टेयर के लिए कोई समय-सारणी नहीं दी।
यह उपलब्धि किस राष्ट्रीय ढांचे से जुड़ी है? एसपीए के अनुसार यह पड़ाव सऊदी विजन 2030 के पर्यावरणीय स्थिरता लक्ष्यों की ओर तेज प्रगति दर्शाता है, जिनका उद्देश्य मरुस्थलीकरण से मुकाबला, प्राकृतिक वनस्पति आवरण का पुनर्स्थापन और साम्राज्य भर में हरित क्षेत्रों का विस्तार है। काम सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव, राष्ट्रीय हरितीकरण कार्यक्रम और राष्ट्रीय वनस्पति आवरण विकास एवं मरुस्थलीकरण से मुकाबला केंद्र के तहत हुआ।
आंकड़े किस अवधि के हैं और कब जारी हुए? एसपीए की रिपोर्ट 10 अक्टूबर 2026 को सकाका से जारी हुई। इसमें 2021 से 2026 तक के छह साल के आंकड़े दिए गए हैं और 2030 के लक्ष्यों से तुलना की गई है। इसी अवधि में 88 लाख पेड़ लगाए गए और 1,55,000 हेक्टेयर भूमि बहाल की गई। रिपोर्ट में लागत, बजट या ठेकेदारों का कोई उल्लेख नहीं है।
रिपोर्ट में कौन-सी जानकारी नहीं दी गई? एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि लगाए गए 88 लाख पेड़ों में कौन-कौन सी प्रजातियां शामिल हैं, कितने पेड़ जीवित बचे हैं, और सिंचाई के लिए पानी का स्रोत क्या रहा। यह भी स्पष्ट नहीं है कि 1,55,000 हेक्टेयर बहाल भूमि का मूल्यांकन किस पद्धति से हुआ। भूमि बहाली के शेष 31.3 प्रतिशत हिस्से की समय-सारणी भी नहीं दी गई।
वनीकरण और भूमि बहाली की गति अलग क्यों दिखती है? रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार वनीकरण 103.5 प्रतिशत पूर्णता के साथ लक्ष्य से आगे है, जबकि भूमि बहाली 68.7 प्रतिशत पर है। यानी पेड़ लगाने का काम अपेक्षाकृत तेज दिखता है, जबकि क्षरित भूमि को उत्पादक बनाना धीमा। एसपीए ने इस अंतर की कोई व्याख्या नहीं दी और न ही यह बताया कि बहाल भूमि में चरागाह, वन और कृषि योग्य भूमि की हिस्सेदारी कितनी है।