रियाद में वरिष्ठ विद्वान परिषद के महासचिवालय ने कहा है कि हूती मिलिशिया द्वारा यमन में नागरिकों और नागरिक सुविधाओं पर किए गए हमले, जिन्होंने सुरक्षा को कमजोर किया और विभाजन बोया, तथा निर्दोष लोगों के विरुद्ध आक्रमण, पवित्रताओं का उल्लंघन और मक्का व मदीना के पवित्र शहरों पर किए गए हमलों के प्रयास «किसी भी मापदंड से आतंकवाद» हैं।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, महासचिवालय ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि इन हमलों से हूती मिलिशिया के आतंकवाद का विस्तार और अल्लाह की पवित्रताओं के उल्लंघन में उसकी ढिठाई सामने आती है। बयान में कहा गया कि मक्का और मदीना के पवित्र शहरों पर मिलिशिया के हमले के प्रयास किसी भी मापदंड से आतंकवाद हैं, जो मिलिशिया के आतंकवाद का विस्तार और अल्लाह की पवित्रताओं के उल्लंघन में उसकी ढिठाई को उजागर करते हैं।
बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि मिलिशिया का आतंकवाद आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे चरमपंथी समूहों के आतंकवाद से कम खतरनाक नहीं है, बल्कि यह धरती पर भ्रष्टाचार फैलाने और मुसलमानों के विरुद्ध आक्रमण करने के कारण उससे आगे तक जाता है।
महासचिवालय ने मस्जिद-ए-हरम और मस्जिद-ए-नबवी के दर्शन करने वालों को निशाना बनाने के प्रयास को और भी गंभीर पाप और आक्रमण बताया। इसमें जोड़ा गया कि अल्लाह ने सऊदी वायु रक्षा की सतर्कता और सऊदी सशस्त्र बलों की क्षमताओं के माध्यम से मिलिशिया की योजनाओं को विफल कर दिया।
बयान में रेखांकित किया गया कि मिलिशिया के अपराधों में कई प्रकार के आक्रमण शामिल रहे, जिनकी शुरुआत मानव जीवन की पवित्रता के उल्लंघन से हुई, इसके बाद संपत्ति, सुरक्षा और स्थिरता की पवित्रता का उल्लंघन हुआ, और फिर मुस्लिम पवित्र स्थलों की पवित्रता का उल्लंघन करने के प्रयास हुए, जिन्हें अल्लाह ने ऊँचा किया है और मुसलमानों को उनका सम्मान करने का आदेश दिया है।
महासचिवालय ने कहा कि सभी मुसलमानों का कर्तव्य है कि वे इस आतंकी मिलिशिया की कार्रवाइयों की निंदा करें और उन सभी के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े हों जो उनके पवित्र स्थलों पर हमला करते हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब यमन में हूती मिलिशिया की ओर से नागरिकों और नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाने की घटनाएँ सामने आई हैं, जिनके बारे में महासचिवालय का कहना है कि उन्होंने सुरक्षा को कमजोर किया और विभाजन बोया। बयान में इन कार्रवाइयों को निर्दोष लोगों के विरुद्ध आक्रमण और पवित्रताओं का उल्लंघन बताया गया है।
महासचिवालय ने अपने बयान में मक्का और मदीना के पवित्र शहरों पर मिलिशिया के हमले के प्रयासों को विशेष रूप से उजागर किया। उसने कहा कि ये प्रयास किसी भी मापदंड से आतंकवाद हैं और इनसे मिलिशिया के आतंकवाद का विस्तार तथा अल्लाह की पवित्रताओं के उल्लंघन में उसकी ढिठाई सामने आती है।
बयान के अनुसार, मिलिशिया का आतंकवाद आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे चरमपंथी समूहों के आतंकवाद से कम खतरनाक नहीं है। महासचिवालय ने कहा कि यह धरती पर भ्रष्टाचार फैलाने और मुसलमानों के विरुद्ध आक्रमण करने के कारण उन समूहों से आगे तक जाता है।
महासचिवालय ने मस्जिद-ए-हरम और मस्जिद-ए-नबवी के दर्शन करने वालों को निशाना बनाने के प्रयास को और भी गंभीर पाप और आक्रमण करार दिया। बयान में कहा गया कि अल्लाह ने सऊदी वायु रक्षा की सतर्कता और सऊदी सशस्त्र बलों की क्षमताओं के माध्यम से मिलिशिया की योजनाओं को विफल कर दिया।
बयान में मिलिशिया के अपराधों के कई रूपों का उल्लेख किया गया। इनकी शुरुआत मानव जीवन की पवित्रता के उल्लंघन से हुई। इसके बाद संपत्ति, सुरक्षा और स्थिरता की पवित्रता का उल्लंघन हुआ। फिर मुस्लिम पवित्र स्थलों की पवित्रता का उल्लंघन करने के प्रयास हुए, जिन्हें अल्लाह ने ऊँचा किया है और मुसलमानों को उनका सम्मान करने का आदेश दिया है।
महासचिवालय ने सभी मुसलमानों के कर्तव्य पर भी जोर दिया। उसने कहा कि सभी मुसलमानों का कर्तव्य है कि वे इस आतंकी मिलिशिया की कार्रवाइयों की निंदा करें और उन सभी के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े हों जो उनके पवित्र स्थलों पर हमला करते हैं।
बयान में यह भी कहा गया कि मिलिशिया की कार्रवाइयों ने सुरक्षा को कमजोर किया और विभाजन बोया, तथा निर्दोष लोगों के विरुद्ध आक्रमण और पवित्रताओं का उल्लंघन किया। महासचिवालय ने इन सभी पहलुओं को एक साथ रखते हुए कहा कि ये «किसी भी मापदंड से आतंकवाद» हैं।
एसपीए के अनुसार, यह बयान बुधवार को जारी किया गया। बयान में मक्का और मदीना के पवित्र शहरों पर मिलिशिया के हमले के प्रयासों को केंद्रीय बिंदु बनाया गया और कहा गया कि इनसे मिलिशिया के आतंकवाद का विस्तार तथा अल्लाह की पवित्रताओं के उल्लंघन में उसकी ढिठाई सामने आती है।
महासचिवालय ने अपने बयान में मिलिशिया के आतंकवाद की तुलना आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे चरमपंथी समूहों से की और कहा कि यह उनसे कम खतरनाक नहीं है। उसने कहा कि मिलिशिया धरती पर भ्रष्टाचार फैलाने और मुसलमानों के विरुद्ध आक्रमण करने के कारण उन समूहों से आगे तक जाता है।
बयान में मस्जिद-ए-हरम और मस्जिद-ए-नबवी के दर्शन करने वालों को निशाना बनाने के प्रयास को और भी गंभीर पाप और आक्रमण बताया गया। महासचिवालय ने कहा कि अल्लाह ने सऊदी वायु रक्षा की सतर्कता और सऊदी सशस्त्र बलों की क्षमताओं के माध्यम से मिलिशिया की योजनाओं को विफल कर दिया।
महासचिवालय ने मिलिशिया के अपराधों के जिन रूपों का उल्लेख किया, उनमें मानव जीवन की पवित्रता का उल्लंघन सबसे पहले आता है। इसके बाद संपत्ति, सुरक्षा और स्थिरता की पवित्रता का उल्लंघन आता है। फिर मुस्लिम पवित्र स्थलों की पवित्रता का उल्लंघन करने के प्रयास आते हैं, जिन्हें अल्लाह ने ऊँचा किया है और मुसलमानों को उनका सम्मान करने का आदेश दिया है।
बयान के अंत में महासचिवालय ने सभी मुसलमानों से आह्वान किया कि वे इस आतंकी मिलिशिया की कार्रवाइयों की निंदा करें और उन सभी के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े हों जो उनके पवित्र स्थलों पर हमला करते हैं।
एसपीए की ओर से जारी इस बयान में मिलिशिया के हमलों की संख्या, तारीख या स्थान का विवरण नहीं दिया गया। इसमें किसी विशेष घटना का जिक्र नहीं है और न ही किसी क्षति या हताहत की संख्या बताई गई है। बयान में यह भी नहीं कहा गया कि मिलिशिया के हमलों के प्रयास कब और कहाँ हुए।
बयान में सऊदी वायु रक्षा और सऊदी सशस्त्र बलों की भूमिका का उल्लेख है, लेकिन इसमें यह नहीं बताया गया कि कौन-सी योजनाएँ विफल की गईं या उनका दायरा क्या था। इसमें आईएसआईएस और अल-कायदा के साथ तुलना की गई है, पर किसी विशेष समूह या घटना का नाम नहीं दिया गया।
महासचिवालय ने अपने बयान में पवित्रताओं के उल्लंघन और मुस्लिम पवित्र स्थलों पर हमले के प्रयासों को केंद्रीय विषय बनाया। इसमें मक्का और मदीना के पवित्र शहरों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया और कहा गया कि इन पर हमले के प्रयास किसी भी मापदंड से आतंकवाद हैं।
बयान में यह भी कहा गया कि मिलिशिया की कार्रवाइयों ने सुरक्षा को कमजोर किया और विभाजन बोया। महासचिवालय ने इन कार्रवाइयों को निर्दोष लोगों के विरुद्ध आक्रमण और पवित्रताओं का उल्लंघन बताया।
एसपीए के अनुसार, बयान में मिलिशिया के आतंकवाद को आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे चरमपंथी समूहों के आतंकवाद से कम खतरनाक नहीं बताया गया। इसमें कहा गया कि यह धरती पर भ्रष्टाचार फैलाने और मुसलमानों के विरुद्ध आक्रमण करने के कारण उनसे आगे तक जाता है।
महासचिवालय ने मस्जिद-ए-हरम और मस्जिद-ए-नबवी के दर्शन करने वालों को निशाना बनाने के प्रयास को और भी गंभीर पाप और आक्रमण कहा। बयान में कहा गया कि अल्लाह ने सऊदी वायु रक्षा की सतर्कता और सऊदी सशस्त्र बलों की क्षमताओं के माध्यम से मिलिशिया की योजनाओं को विफल कर दिया।
बयान में मिलिशिया के अपराधों के कई रूपों को सूचीबद्ध किया गया। इनमें मानव जीवन की पवित्रता का उल्लंघन, संपत्ति, सुरक्षा और स्थिरता की पवित्रता का उल्लंघन, और मुस्लिम पवित्र स्थलों की पवित्रता का उल्लंघन करने के प्रयास शामिल हैं।
महासचिवालय ने सभी मुसलमानों के कर्तव्य पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें इस आतंकी मिलिशिया की कार्रवाइयों की निंदा करनी चाहिए और उन सभी के विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए जो उनके पवित्र स्थलों पर हमला करते हैं।
एसपीए की ओर से जारी बयान में यह नहीं बताया गया कि महासचिवालय ने यह बयान किस संदर्भ में जारी किया या इसके पीछे कोई विशेष घटना थी या नहीं। इसमें मिलिशिया के हमलों के प्रयासों की तारीख, स्थान या उनके परिणाम का कोई विवरण नहीं दिया गया।
बयान में सऊदी वायु रक्षा और सऊदी सशस्त्र बलों की भूमिका का उल्लेख किया गया है, लेकिन इसमें यह नहीं बताया गया कि इन योजनाओं को कब और कैसे विफल किया गया। इसमें आईएसआईएस और अल-कायदा के साथ तुलना की गई है, पर किसी विशेष समूह या घटना का नाम नहीं दिया गया।
महासचिवालय ने अपने बयान में मक्का और मदीना के पवित्र शहरों पर मिलिशिया के हमले के प्रयासों को केंद्रीय बिंदु बनाया और कहा कि इनसे मिलिशिया के आतंकवाद का विस्तार तथा अल्लाह की पवित्रताओं के उल्लंघन में उसकी ढिठाई सामने आती है।
बयान में कहा गया कि मिलिशिया का आतंकवाद आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे चरमपंथी समूहों के आतंकवाद से कम खतरनाक नहीं है और यह धरती पर भ्रष्टाचार फैलाने तथा मुसलमानों के विरुद्ध आक्रमण करने के कारण उनसे आगे तक जाता है।
महासचिवालय ने मस्जिद-ए-हरम और मस्जिद-ए-नबवी के दर्शन करने वालों को निशाना बनाने के प्रयास को और भी गंभीर पाप और आक्रमण बताया और कहा कि अल्लाह ने सऊदी वायु रक्षा की सतर्कता और सऊदी सशस्त्र बलों की क्षमताओं के माध्यम से मिलिशिया की योजनाओं को विफल कर दिया।
बयान में मिलिशिया के अपराधों के रूपों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इनकी शुरुआत मानव जीवन की पवित्रता के उल्लंघन से हुई, इसके बाद संपत्ति, सुरक्षा और स्थिरता की पवित्रता का उल्लंघन हुआ, और फिर मुस्लिम पवित्र स्थलों की पवित्रता का उल्लंघन करने के प्रयास हुए।
महासचिवालय ने सभी मुसलमानों से आह्वान किया कि वे इस आतंकी मिलिशिया की कार्रवाइयों की निंदा करें और उन सभी के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े हों जो उनके पवित्र स्थलों पर हमला करते हैं।
एसपीए की ओर से जारी इस बयान में मिलिशिया के हमलों की संख्या, तारीख या स्थान का विवरण नहीं दिया गया। इसमें किसी विशेष घटना का जिक्र नहीं है और न ही किसी क्षति या हताहत की संख्या बताई गई है। बयान में यह भी नहीं कहा गया कि मिलिशिया के हमलों के प्रयास कब और कहाँ हुए।
बयान में सऊदी वायु रक्षा और सऊदी सशस्त्र बलों की भूमिका का उल्लेख है, लेकिन इसमें यह नहीं बताया गया कि कौन-सी योजनाएँ विफल की गईं या उनका दायरा क्या था। इसमें आईएसआईएस और अल-कायदा के साथ तुलना की गई है, पर किसी विशेष समूह या घटना का नाम नहीं दिया गया।
महासचिवालय ने हूती मिलिशिया की कार्रवाइयों को किस आधार पर आतंकवाद कहा? महासचिवालय ने कहा कि हूती मिलिशिया के यमन में नागरिकों और नागरिक सुविधाओं पर हमलों ने सुरक्षा को कमजोर किया और विभाजन बोया। इसके साथ ही निर्दोष लोगों के विरुद्ध आक्रमण, पवित्रताओं का उल्लंघन और मक्का व मदीना के पवित्र शहरों पर हमले के प्रयास «किसी भी मापदंड से आतंकवाद» हैं। बयान में कहा गया कि इनसे मिलिशिया के आतंकवाद का विस्तार और अल्लाह की पवित्रताओं के उल्लंघन में उसकी ढिठाई सामने आती है।
महासचिवालय ने मिलिशिया की तुलना किन समूहों से की और क्यों? महासचिवालय ने कहा कि मिलिशिया का आतंकवाद आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे चरमपंथी समूहों के आतंकवाद से कम खतरनाक नहीं है। बयान के अनुसार, यह धरती पर भ्रष्टाचार फैलाने और मुसलमानों के विरुद्ध आक्रमण करने के कारण उन समूहों से आगे तक जाता है। एसपीए ने बताया कि यह तुलना बुधवार को जारी बयान में की गई।
मक्का और मदीना के पवित्र शहरों पर हमले के प्रयासों के बारे में क्या कहा गया? महासचिवालय ने कहा कि मक्का और मदीना के पवित्र शहरों पर मिलिशिया के हमले के प्रयास किसी भी मापदंड से आतंकवाद हैं। बयान में कहा गया कि इनसे मिलिशिया के आतंकवाद का विस्तार और अल्लाह की पवित्रताओं के उल्लंघन में उसकी ढिठाई सामने आती है। महासचिवालय ने मस्जिद-ए-हरम और मस्जिद-ए-नबवी के दर्शन करने वालों को निशाना बनाने के प्रयास को और भी गंभीर पाप और आक्रमण बताया।
मिलिशिया की योजनाएँ कैसे विफल हुईं? बयान में कहा गया कि अल्लाह ने सऊदी वायु रक्षा की सतर्कता और सऊदी सशस्त्र बलों की क्षमताओं के माध्यम से मिलिशिया की योजनाओं को विफल कर दिया। महासचिवालय ने यह बात मस्जिद-ए-हरम और मस्जिद-ए-नबवी के दर्शन करने वालों को निशाना बनाने के प्रयास के संदर्भ में कही। एसपीए के अनुसार, बयान में यह नहीं बताया गया कि कौन-सी योजनाएँ विफल की गईं या उनका दायरा क्या था।
मिलिशिया के अपराधों के कौन-कौन से रूप बताए गए? बयान में कहा गया कि मिलिशिया के अपराधों में कई प्रकार के आक्रमण शामिल रहे। इनकी शुरुआत मानव जीवन की पवित्रता के उल्लंघन से हुई। इसके बाद संपत्ति, सुरक्षा और स्थिरता की पवित्रता का उल्लंघन हुआ। फिर मुस्लिम पवित्र स्थलों की पवित्रता का उल्लंघन करने के प्रयास हुए, जिन्हें अल्लाह ने ऊँचा किया है और मुसलमानों को उनका सम्मान करने का आदेश दिया है।
महासचिवालय ने मुसलमानों से क्या आह्वान किया? महासचिवालय ने कहा कि सभी मुसलमानों का कर्तव्य है कि वे इस आतंकी मिलिशिया की कार्रवाइयों की निंदा करें। इसके साथ ही उसने कहा कि सभी मुसलमानों को उन सभी के विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए जो उनके पवित्र स्थलों पर हमला करते हैं। एसपीए के अनुसार, यह बयान वरिष्ठ विद्वान परिषद के महासचिवालय ने बुधवार को जारी किया।