जेद्दा में इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक (IsDB) समूह के अध्यक्ष डॉ. मुहम्मद अल-जासर और एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (AIIB) की अध्यक्ष ज़ो जियायी के बीच सीधी द्विपक्षीय बैठक हुई। यह जनवरी 2026 में ज़ो के बैंक की अध्यक्षता संभालने के बाद दोनों के बीच पहली सीधी द्विपक्षीय बैठक है।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, बैठक 28 सितंबर 2026 को जेद्दा में हुई। एसपीए के अनुसार स्थानीय समय 21:24 और जीएमटी 18:24 रहा।
दोनों पक्षों ने 2024 में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन और उससे जुड़ी कार्य योजना के क्रियान्वयन में हुई प्रगति की समीक्षा की। समझौता ज्ञापन 2024 में हस्ताक्षरित हुआ था और उसके साथ एक कार्य योजना भी जुड़ी है। एसपीए के मुताबिक बैठक में इस समझौते के अमल की स्थिति पर चर्चा हुई।
दोनों पक्षों ने सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी बात की। इनमें सदस्य देशों में सह-वित्तपोषण परियोजनाएं, क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करना और इस्लामी वित्त शामिल हैं। एसपीए ने बताया कि चर्चा इन तीन क्षेत्रों पर केंद्रित रही।
बैठक में चल रहे प्रयासों की समीक्षा भी हुई। इनमें इंडोनेशिया में सह-वित्तपोषित ट्रांस-सुमात्रा टोल रोड परियोजना शामिल है। दोनों पक्षों ने संयुक्त परिचालनों और भविष्य के अवसरों पर समन्वय बढ़ाने पर चर्चा की।
चर्चा में इस्लामी वित्त से जुड़ी पहलें भी शामिल रहीं। एसपीए के अनुसार इनमें सुकुक, मध्य एशिया में सीमा-पार संपर्क परियोजनाएं और टिकाऊ अवसंरचना वित्तपोषण को समर्थन देने के लिए ज्ञान साझा करना शामिल है।
दोनों पक्षों ने अधिक व्यवस्थित साझेदारी बनाने और उन देशों में टिकाऊ विकास का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जो दोनों संस्थानों के सदस्य हैं। एसपीए के मुताबिक यह बैठक इसी दिशा में एक कदम है।
एसपीए की विज्ञप्ति में बैठक की अवधि, स्थान के भीतर विशिष्ट बैठक-कक्ष, प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों के नाम या बैठक में तय हुए किसी ठोस नए समझौते का उल्लेख नहीं है। विज्ञप्ति में किसी वित्तीय राशि, परियोजना लागत या समय-सीमा का भी जिक्र नहीं है।
साझेदारी की पृष्ठभूमि और आगे की राह
इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक समूह और एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक के बीच सहयोग कोई नई बात नहीं है। 2024 में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन और उसकी कार्य योजना इस सहयोग की नींव है। एसपीए के मुताबिक बैठक में इसी नींव पर आगे बढ़ने की समीक्षा हुई।
दोनों संस्थानों के सदस्य देशों में सह-वित्तपोषण परियोजनाओं को बढ़ावा देना चर्चा का प्रमुख हिस्सा रहा। सह-वित्तपोषण का अर्थ है कि दो या अधिक विकास संस्थान एक ही परियोजना में संसाधन लगाते हैं। एसपीए के अनुसार बैठक में इस दिशा में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर बात हुई।
क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करना दूसरा प्रमुख विषय रहा। इसके तहत सीमा-पार संपर्क परियोजनाओं पर ध्यान दिया गया। एसपीए ने विशेष रूप से मध्य एशिया में सीमा-पार संपर्क परियोजनाओं का उल्लेख किया।
इस्लामी वित्त तीसरा प्रमुख विषय रहा। चर्चा में सुकुक और इस्लामी वित्त से जुड़ी पहलें शामिल रहीं। एसपीए के मुताबिक इन पहलों पर दोनों पक्षों ने विचार साझा किए।
इंडोनेशिया में ट्रांस-सुमात्रा टोल रोड परियोजना सह-वित्तपोषण का एक चलता हुआ उदाहरण है। एसपीए ने इसे सह-वित्तपोषित परियोजना बताया। बैठक में इस परियोजना पर चल रहे प्रयासों की समीक्षा की गई।
ज्ञान साझा करना भी चर्चा का हिस्सा रहा। एसपीए के अनुसार इसका उद्देश्य टिकाऊ अवसंरचना वित्तपोषण को समर्थन देना है। दोनों संस्थानों के सदस्य देशों में टिकाऊ विकास का समर्थन करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
एसपीए की विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया कि अगली बैठक कब होगी। यह भी नहीं बताया गया कि समझौता ज्ञापन के तहत कितनी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं या कितनी चल रही हैं। विज्ञप्ति में किसी नए समझौते या हस्ताक्षर का जिक्र नहीं है।
एसपीए के मुताबिक दोनों पक्षों ने अधिक व्यवस्थित साझेदारी बनाने पर सहमति जताई। इसका मतलब यह है कि सहयोग को योजनाबद्ध और संरचित रूप दिया जाएगा। हालांकि विज्ञप्ति में इस व्यवस्थित साझेदारी का कोई विस्तृत खाका नहीं दिया गया।
बैठक जेद्दा में हुई, जहां इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक समूह का मुख्यालय है। एसपीए ने बैठक की तारीख 28 सितंबर 2026 बताई। यह बैठक ज़ो जियायी के अध्यक्ष बनने के बाद पहली सीधी द्विपक्षीय बैठक थी।
एसपीए की विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया कि बैठक में कितने प्रतिनिधि शामिल हुए। यह भी नहीं बताया गया कि बैठक कितने समय तक चली। विज्ञप्ति में दोनों संस्थानों के बीच पहले हुए किसी अन्य समझौते का भी उल्लेख नहीं है।
सुकुक पर चर्चा इस्लामी वित्त के संदर्भ में हुई। एसपीए के अनुसार यह इस्लामी वित्त से जुड़ी पहलों का हिस्सा था। सुकुक इस्लामी वित्त में इस्तेमाल होने वाला एक वित्तीय साधन है।
मध्य एशिया में सीमा-पार संपर्क परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। एसपीए ने इन्हें क्षेत्रीय संपर्क से जोड़कर देखा। बैठक में इन परियोजनाओं को लेकर समन्वय बढ़ाने की बात हुई।
संयुक्त परिचालनों पर समन्वय बढ़ाना भी चर्चा में शामिल रहा। एसपीए के मुताबिक दोनों पक्षों ने भविष्य के अवसरों पर भी बात की। इन अवसरों का विस्तृत ब्योरा विज्ञप्ति में नहीं दिया गया।
दोनों संस्थानों के सदस्य देशों में टिकाऊ विकास का समर्थन करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। एसपीए के अनुसार यह बैठक का एक प्रमुख नतीजा रहा। विज्ञप्ति में इस प्रतिबद्धता को किसी विशिष्ट परियोजना या राशि से नहीं जोड़ा गया।
एसपीए की विज्ञप्ति में बैठक के दौरान दोनों अध्यक्षों के किसी बयान का सीधा उद्धरण नहीं है। विज्ञप्ति में यह भी नहीं बताया गया कि बैठक में किसी तीसरे पक्ष की भागीदारी थी या नहीं।
समझौता ज्ञापन 2024 में हस्ताक्षरित हुआ था। एसपीए के मुताबिक उससे जुड़ी कार्य योजना के क्रियान्वयन में हुई प्रगति की समीक्षा इस बैठक में की गई। प्रगति का कोई आंकड़ा विज्ञप्ति में नहीं दिया गया।
सह-वित्तपोषण परियोजनाओं को सदस्य देशों में बढ़ावा देना चर्चा का केंद्र रहा। एसपीए के अनुसार दोनों पक्ष इस दिशा में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए किसी नई व्यवस्था का ऐलान विज्ञप्ति में नहीं है।
इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक समूह के अध्यक्ष डॉ. मुहम्मद अल-जासर और एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक की अध्यक्ष ज़ो जियायी ने बैठक में हिस्सा लिया। एसपीए ने दोनों के नाम और पद स्पष्ट रूप से दर्ज किए हैं।
एसपीए की विज्ञप्ति के अंत में केवल स्रोत का संदर्भ और समय दिया गया है। विज्ञप्ति में बैठक से जुड़ी कोई तस्वीर, दस्तावेज या अतिरिक्त विवरण नहीं है। यही इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी की सीमा है।
यह बैठक क्यों अहम मानी जा रही है? एसपीए के मुताबिक यह जनवरी 2026 में ज़ो जियायी के एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक की अध्यक्षता संभालने के बाद दोनों के बीच पहली सीधी द्विपक्षीय बैठक थी। बैठक 28 सितंबर 2026 को जेद्दा में हुई, जहां इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक समूह का मुख्यालय है। विज्ञप्ति में बैठक की अवधि या प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की संख्या नहीं बताई गई।
दोनों पक्षों ने किन विषयों पर चर्चा की? एसपीए के अनुसार चर्चा में सदस्य देशों में सह-वित्तपोषण परियोजनाएं, क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करना और इस्लामी वित्त शामिल रहे। इस्लामी वित्त के तहत सुकुक और मध्य एशिया में सीमा-पार संपर्क परियोजनाओं पर बात हुई। टिकाऊ अवसंरचना वित्तपोषण के लिए ज्ञान साझा करना भी चर्चा का हिस्सा रहा।
2024 के समझौता ज्ञापन का क्या जिक्र हुआ? एसपीए के मुताबिक दोनों पक्षों ने 2024 में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन और उससे जुड़ी कार्य योजना के क्रियान्वयन में हुई प्रगति की समीक्षा की। समझौते के साथ एक कार्य योजना भी जुड़ी है। विज्ञप्ति में प्रगति का कोई आंकड़ा या पूरी हो चुकी परियोजनाओं की संख्या नहीं दी गई।
ट्रांस-सुमात्रा टोल रोड परियोजना का क्या संदर्भ है? एसपीए ने इंडोनेशिया में ट्रांस-सुमात्रा टोल रोड परियोजना को सह-वित्तपोषित परियोजना बताया। बैठक में इस परियोजना पर चल रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने संयुक्त परिचालनों और भविष्य के अवसरों पर समन्वय बढ़ाने पर भी चर्चा की। विज्ञप्ति में परियोजना की लागत या समय-सीमा नहीं दी गई।
बैठक में क्या प्रतिबद्धता दोहराई गई? एसपीए के अनुसार दोनों पक्षों ने अधिक व्यवस्थित साझेदारी बनाने और उन देशों में टिकाऊ विकास का समर्थन करने की प्रतिबद्धता दोहराई, जो दोनों संस्थानों के सदस्य हैं। विज्ञप्ति में इस व्यवस्थित साझेदारी का विस्तृत खाका नहीं दिया गया। किसी नए समझौते या हस्ताक्षर का भी जिक्र नहीं है।
विज्ञप्ति में क्या जानकारी नहीं दी गई? एसपीए की विज्ञप्ति में बैठक की अवधि, बैठक-कक्ष, प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों के नाम या अगली बैठक की तारीख नहीं बताई गई। किसी वित्तीय राशि, परियोजना लागत या समय-सीमा का भी उल्लेख नहीं है। दोनों अध्यक्षों के किसी सीधे बयान का उद्धरण भी विज्ञप्ति में शामिल नहीं है।





