मनामा में जीएसीआई वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की आईएमएफ प्रबंध निदेशक के साथ संयुक्त बैठक हुई, जिसमें जीएसीआई महासचिव जासेम अलबुदाईवी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने खाड़ी सहयोग परिषद की अर्थव्यवस्थाओं के लचीलेपन और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद विकास की गति बनाए रखने की क्षमता की सराहना की है।
जैसा कि सऊदी समाचार एजेंसी एसपीए ने बताया, यह बैठक 1 अक्टूबर 2026 को मनामा में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बहरीन के वित्त और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था मंत्री तथा वर्तमान सत्र के अध्यक्ष शेख सलमान बिन खलीफा अल खलीफा ने की।
अलबुदाईवी ने कहा कि समूह की समष्टि आर्थिक मजबूती अनुशासित नीतियों, मजबूत वित्तीय बफरों, लचीले बैंकिंग क्षेत्रों और आर्थिक विविधीकरण में निरंतर निवेश का सीधा परिणाम है। क्या यही अनुशासन आगे भी वैश्विक झटकों के बीच खाड़ी की अर्थव्यवस्थाओं को स्थिर बनाए रख सकेगा?
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र की तत्काल प्राथमिकता राजकोषीय स्थिरता की रक्षा करना है, साथ ही ऐसे चुस्त नीतिगत ढांचे बनाए रखना है जो भू-राजनीतिक विपरीत परिस्थितियों तथा व्यापार और आपूर्ति मार्गों में व्यवधानों का सामना कर सकें। क्या नीतिगत चुस्ती ही वह कवच है जो अनिश्चितता के दौर में काम आता है?
महासचिव ने कहा कि आर्थिक लचीलापन जीएसीआई की आर्थिक संरचना का एक अंतर्निहित स्तंभ बना रहना चाहिए, न कि केवल संकट के समय प्रतिक्रियास्वरूप इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लचीलापन कोई अस्थायी उपाय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक नीति का हिस्सा होना चाहिए।
दीर्घकालिक संरचनात्मक प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए अलबुदाईवी ने क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसमें वस्तुओं, सेवाओं और पूंजी की सीमा-पार आवाजाही को सुगम बनाना, लचीले व्यापार गलियारों का निर्माण, डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ाना और निजी क्षेत्र को सशक्त बनाना शामिल है। क्या सीमा-पार आवाजाही में आसानी से क्षेत्रीय व्यापार का स्वरूप बदल सकता है?
उन्होंने डिजिटल परिवर्तन को भी प्राथमिकता बताया, जिससे सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाएं अधिक प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी बन सकें। निजी क्षेत्र को सशक्त बनाना उनकी दृष्टि का केंद्रीय बिंदु रहा, ताकि आर्थिक विकास का भार केवल सरकारी खर्च पर निर्भर न रहे। क्या निजी क्षेत्र की भागीदारी के बिना आर्थिक विविधीकरण संभव है?
अलबुदाईवी ने अंत में जीएसीआई की आंतरिक समन्वय को गहरा करने और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, विशेषकर आईएमएफ के साथ रणनीतिक साझेदारियों का विस्तार करने की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि सतत आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित की जा सके। क्या अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ यह साझेदारी खाड़ी की अर्थव्यवस्थाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकेगी?
बैठक में यह भी रेखांकित हुआ कि वैश्विक अनिश्चितता का स्तर बढ़ा हुआ है, जिसमें व्यापार और आपूर्ति मार्गों में व्यवधान प्रमुख चिंता का विषय हैं। ऐसे में खाड़ी देशों की राजकोषीय स्थिरता बनाए रखने की रणनीति और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। क्या आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान आगे भी जारी रहेंगे?
अलबुदाईवी ने यह भी कहा कि मजबूत वित्तीय बफर और लचीले बैंकिंग क्षेत्र खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं की मजबूती के आधार हैं। इन तत्वों ने वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के दौरान भी स्थिरता बनाए रखने में मदद की है। क्या बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है?
आर्थिक विविधीकरण में निरंतर निवेश को भी महासचिव ने समष्टि आर्थिक मजबूती का कारण बताया। इससे स्पष्ट है कि खाड़ी देश केवल तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। क्या विविधीकरण की यह गति भविष्य में और तेज होगी?
बैठक की अध्यक्षता बहरीन के वित्त और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था मंत्री शेख सलमान बिन खलीफा अल खलीफा ने की, जो वर्तमान सत्र के अध्यक्ष हैं। यह इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय वित्तीय सहयोग में बहरीन की भूमिका सक्रिय बनी हुई है। क्या सत्र अध्यक्षता से क्षेत्रीय एजेंडा तय करने में मदद मिलती है?
अलबुदाईवी ने कहा कि जीएसीआई आंतरिक समन्वय को गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका अर्थ है कि सदस्य देश आपसी सहयोग बढ़ाने और साझा आर्थिक चुनौतियों का सामना करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। क्या आंतरिक समन्वय से व्यापार गलियारे अधिक मजबूत होंगे?
अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी का विस्तार भी महासचिव की प्राथमिकताओं में शामिल रहा, जिसमें आईएमएफ को सबसे आगे बताया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि खाड़ी देश वैश्विक वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे। क्या यह साझेदारी निवेशकों का भरोसा और बढ़ाएगी?
एसपीए की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में आईएमएफ प्रबंध निदेशक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लचीलेपन की सराहना की। यह मान्यता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खाड़ी की आर्थिक नीतियों की स्वीकार्यता को दर्शाती है। क्या अंतर्राष्ट्रीय मान्यता से क्षेत्र में निवेश प्रवाह बढ़ेगा?
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि महासचिव ने व्यापार और आपूर्ति मार्गों में व्यवधानों को प्रमुख चुनौती बताया। ऐसे व्यवधान वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं और खाड़ी देशों की निर्यात-आयात गतिविधियों पर दबाव डाल सकते हैं। क्या वैकल्पिक व्यापार मार्गों पर विचार किया जा रहा है?
डिजिटल परिवर्तन को प्राथमिकता देने का अर्थ है कि खाड़ी देश तकनीकी आधार पर अपनी अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करना चाहते हैं। इससे सेवाओं का सीमा-पार व्यापार आसान हो सकता है और पूंजी की आवाजाही भी तेज हो सकती है। क्या डिजिटल बुनियादी ढांचा क्षेत्रीय एकीकरण की गति बढ़ाएगा?
निजी क्षेत्र को सशक्त बनाने पर जोर इस बात को दर्शाता है कि सरकारें अकेले आर्थिक विकास का भार नहीं उठा सकतीं। निजी निवेश और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने से रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। क्या निजी क्षेत्र की भागीदारी से आर्थिक विविधीकरण तेज होगा?
महासचिव ने आर्थिक लचीलेपन को जीएसीआई की आर्थिक संरचना का अंतर्निहित स्तंभ बताया, न कि केवल संकट के समय का उपाय। इसका अर्थ है कि लचीलापन अब नीति-निर्माण का स्थायी हिस्सा बन गया है। क्या यह दृष्टिकोण दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करेगा?
बैठक में राजकोषीय स्थिरता की रक्षा को तत्काल प्राथमिकता बताया गया। यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच खाड़ी देश अपने वित्तीय संतुलन को बनाए रखने पर ध्यान दे रहे हैं। क्या राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना आगे चुनौतीपूर्ण होगा?
एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि बैठक में कौन-से विशिष्ट निर्णय लिए गए या किन ठोस उपायों पर सहमति बनी। रिपोर्ट में किसी विशेष आंकड़े, समय-सीमा या निवेश राशि का उल्लेख भी नहीं है। यह जानकारी स्रोत में उपलब्ध नहीं है।
जीएसीआई महासचिव ने आईएमएफ की सराहना के बारे में क्या कहा? जीएसीआई महासचिव जासेम अलबुदाईवी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने खाड़ी सहयोग परिषद की अर्थव्यवस्थाओं के लचीलेपन और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद विकास की गति बनाए रखने की क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह मजबूती अनुशासित नीतियों, मजबूत वित्तीय बफरों, लचीले बैंकिंग क्षेत्रों और आर्थिक विविधीकरण में निरंतर निवेश का परिणाम है।
यह बैठक कहाँ और कब हुई और अध्यक्षता किसने की? यह संयुक्त बैठक 1 अक्टूबर 2026 को मनामा में हुई, जिसमें जीएसीआई वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर आईएमएफ प्रबंध निदेशक के साथ शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता बहरीन के वित्त और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था मंत्री तथा वर्तमान सत्र के अध्यक्ष शेख सलमान बिन खलीफा अल खलीफा ने की।
महासचिव ने तत्काल क्षेत्रीय प्राथमिकता क्या बताई? अलबुदाईवी ने कहा कि तत्काल क्षेत्रीय प्राथमिकता राजकोषीय स्थिरता की रक्षा करना है, साथ ही ऐसे चुस्त नीतिगत ढांचे बनाए रखना है जो भू-राजनीतिक विपरीत परिस्थितियों तथा व्यापार और आपूर्ति मार्गों में व्यवधानों का सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि आर्थिक लचीलापन जीएसीआई की आर्थिक संरचना का अंतर्निहित स्तंभ होना चाहिए।
दीर्घकालिक संरचनात्मक प्राथमिकताओं में क्या शामिल है? महासचिव ने क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को तेज करने पर जोर दिया, जिसमें वस्तुओं, सेवाओं और पूंजी की सीमा-पार आवाजाही को सुगम बनाना, लचीले व्यापार गलियारों का निर्माण, डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ाना और निजी क्षेत्र को सशक्त बनाना शामिल है।
जीएसीआई ने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी पर क्या कहा? अलबुदाईवी ने जीएसीआई की आंतरिक समन्वय को गहरा करने और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, विशेषकर आईएमएफ के साथ रणनीतिक साझेदारियों का विस्तार करने की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि सतत आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
रिपोर्ट में क्या जानकारी नहीं दी गई? एसपीए की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि बैठक में कौन-से विशिष्ट निर्णय लिए गए या किन ठोस उपायों पर सहमति बनी। रिपोर्ट में किसी विशेष आंकड़े, समय-सीमा या निवेश राशि का उल्लेख भी नहीं है।





